गुरुवार, दिसंबर 31, 2009

हे २००९ तुम जाते जाते महंगाई ,आतंक को भी अपने साथ ले जाओ .






नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाये 

ना ना करते हुए भी २००९ में १०० पोस्ट  पूरी हो गयी दरबार की . यह कोई उपलब्धि तो नहीं लेकिन मेरी निरंतरता है .  क्योकि मुझ पर ठप्पा लगा है कोई काम मैं लग कर नहीं कर सकता . बहुत से सपने मेरे पिता ने मेरे लिए देखे होंगे लेकिन मैं भी समझता हूँ आज तक मैं खरा उतरा नहीं . साल दर साल हर नए साल पर प्रतिज्ञा करता हूँ कसम खाता हूँ . लेकिन आज तक पहले हफ्ते में ही सारी कसमे खा जाता हूँ और प्रतिज्ञा तो याद भी नहीं रहती . 

अबकी भी कुछ सोचा है २०१० के लिए . शायद पहले कि तरह वह ना हो जो आज तक हुआ . आमीन 
खैर २०१० की ३१ दिसम्बर को मैं स्वयम विश्लेषण करूंगा और आपको भी बताउंगा . अभी से क्या बताये क्या हमारे दिल में है . 

आखिर में एक प्रार्थना २००९ से -   

   हे २००९ तुम जाते जाते महंगाई ,आतंक को भी अपने साथ ले जाओ

मंगलवार, दिसंबर 29, 2009

नक्कार खाने में तूती बजाते है ब्लागर है लिख कर भूल जाते है

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नक्कार खाने में तूती बजाते है 

ब्लागर  है लिख कर भूल जाते है 

दुनिया भर के दुःख जब देखते है 

तो उन्हें दर्द सहित हम लिखते है 

और लिख कर हम भूल जाते है 

क्योकि ब्लागर है हम  

 नक्कार खाने में तूती बजाते है 



शनिवार, दिसंबर 26, 2009

साबित हो गया एक ही युवा है भारत मे वह है ८५ साल के युवा नरायण दत्त तिवारी -- देखे

युवा 


युवा 


आज चारो तरफ से एक ही आवाज़ आ रही है युवा ही देश को बचा और चला सकते है . इसलिए युवा की परिभाषा और खुद को युवा साबित कराने के लिए युवाचित हरकते कर रहे है अपने ८५ साल के बूढ़े क्षमा करे ८५ साल के जवान युवा नारायण दत्त तिवारी


नारायण दत्त तिवारी के कथित सेक्स स्कैण्डल की स्टिल फोटो
        
       




तो यह कांग्रेस के युवा नेता और ........ और क्या .  राहुल बाबा  राहुल बाबा तो अभी बच्चे है . 

शुक्रवार, दिसंबर 25, 2009

पहले औरत जनती थी आज आदमी जनता है



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आज़ादी  के बाद नए नए शब्द गड़े जाने लगे नयी नयी वस्तुए प्रयोग में आने लगी वनस्पति घी प्रचलन में आ गया . नागरिको को जनता के रूप में शब्द प्रचलित होने लगे . कुछ कवियों ने तो कविताएं भी लिखी उनमे की दो पंक्ति यह है 



पहले घी से सब्जी बनती थी


 अब सब्जी से घी बनता है 




           पहले औरत जनती थी                        


           आज आदमी जनता है  





मंगलवार, दिसंबर 22, 2009

मैं समीर लाल आपको डिस्टर्व तो नहीं किया सुबह सुबह

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sam lalआज सुबह टहल कर वापिस ही लौटे थे और अखवार पढने की कोशिश कर रहे थे तभी मोबाईल बज उठा . देखा तो अनजाने से लम्बे नम्बर से फोन था .  फ़ोन उठाने पर अनजानी सी  मधुर आवाज़ कानो में मिसरी घोलती सी महसूस हुई . उधर से आवाज़ आई मैं समीर लाल आपको डिस्टर्व तो नहीं किया सुबह सुबह . ऐसा लगा जैसे एक उड़नतश्तरी मेरी आँखों के सामने से तेज़ी से गुज़र गयी . 

एक छण विश्वास ही नहीं हुआ . लेकिन पूर्ण चेतन अवस्था में होने के कारण मै समझ गया यह हकीकत है . बातचीत का सिलसिला चल ही पड़ा . कितना अद्बुत समय था वह . परदेश से अपने का फोन एक नई अनुभूति थी मेरे लिए . क्योकि हम ग्रामीण पृष्टभूमि के है और परदेश से ज्यादा संपर्क नहीं है . 

और अब तो ऐसा है कि सात समुन्द्र पार भी अपने परिवार के लोग है . कितना सुखद है कि ब्लॉग के माध्यम से हुआ परिचय रिश्तो में बदल रहा है . और ज्यादतर रिश्ते थोपे जाते है बताये जाते है की यह तुम्हारे यह है यह है . और ब्लॉग में रिश्ते अपने आप बन जाते है कभी भी ना बिछड़ने के लिए . क्योकि इन रिश्तो में लालच नहीं होता है . और लालच रिश्तो में दरार लाता है . 

रविवार, दिसंबर 20, 2009

दुनिया में सबसे बड़ा दुःख क्या है ? बूढ़े बाप के कंधो पर जवान बेटे की लाश

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मैने बचपन से एक आदमी को बहुत मेहनत करते देखा वह रिक्शा चलाता है . जाड़ा , गर्मी ,बरसात उसके लिए कोई मायने नहीं रखती . उसका एक ही धर्म है मेहनत और एक ही प्रसाद है मजदूरी . हाड तोड़ मेहनत के बाद भी उसके चहरे पर कोई शिकन नहीं दिखती थी . हमेशा मुस्कराता हुआ दिखा मुझे जब भी मैने उसे देखा . नन्नू लाल है उसका नाम . 


अभी कुछ दिन से मुझे वह नहीं दिखा जो आपको रोज़ मिलता है और ना दिखे तो चिंता तो होती ही है . दो चार दिन बाद नन्नू मुझे दिखा मैने तुरंत उसके गायब रहने का कारण पूछा . तो पहली बार उसकी आँखों में आसूं से दिखे और उसने बताया उसका जवान इकलौता बेटा अचानक मर गया . कैसे क्या वह बीमार था ? नहीं बिलकुल तो भला चंगा था एक दर्द सा उठा और सब ख़त्म . रात को दवा दी थी सुबह वह सो कर ही नहीं उठा . सब ऊपर वाले का खेल है ना जाने किस पाप की सजा दी ,इतना कह वह सामान से भरा अपना रिक्शा लेकर चल दिया . 


मैं यह सोचता रह गया खून पसीने की कमाई खाने वाला मेहनत  मजूरी करने वाला नन्नू ने ऐसा क्या पाप किया जिसकी उसे सजा मिली .  उस बेचारे  पर तो पाप करने का टाइम ही नहीं था जिन्दगी में . और जो पाप में  आकंठ तक डूबे है उनेह तो आज तक सजा मिलती नहीं दिखी . क्या ऐसे हादसे पाप पुण्य के कारण होते है ? 
बेचारे नन्नू लाल को अपने साथ हुई ईश्वर की नाइंसाफी को जायज ठहराने का एक वाक्य मिल गया पाप की सजा

रविवार, दिसंबर 13, 2009

हैलो मै बी .एस .पावला बोल रहा हूँ भिलाई से और धीरू भाई मैं महफूज

हैलो मै बी .एस . पावला बोल रहा हूँ भिलाई से . जैसे ही मोबाईल उठाया उधर से आवाज़ आई . एक क्षण अनजानी सी मधुर आवाज़ जानपहचान सी लगने लगी . अरे पावला जी नमस्कार नमस्कार , यह एक फोन काल थी मुझे बधाई देने को मेरी शादी की साल गिरह पर .कितना अपनापन  खूब बात हुई . ब्लोगिंग से एक नया रिश्तेदार मिला .

थोड़ी देर में फिर घंटी बजी अब उधर से आवाज आई धीरू भाई मैं महफूज  . एक अनजानी आवाज़ फिर से अपनी सी लगने लगी . और एक नया रिश्ता जुड़ गया .

दोनों लोगो को पहचानने में मुझे देर नहीं लगी और उनकी आवाज़ के साथ उनकी तस्वीर मेरे जेहन में तैरती रही जैसे कितने दिनों से पहचान है . यह बाकया जब मैने घर पर सुनाया तो मेरे पापा जी को बहुत ख़ुशी हुई .

ब्लोगिंग से रिश्ते भी बन रहे है ऐसा होता है मैने जिया है .