सोने की चिडिया को लूटने की मंशा से विदेशी आक्रमणकारी हिन्दुस्तान को रौंधने के लिए सिंध पंजाब की तरफ से आने लगे । सिकंदर आया चला गया । गजनी आया गुजरात तक लूट कर ले गया । चंगेज खान आया । शक आए हूण आए । हलाकू आया . न जाने कितने आए और चले गए लेकिन मुग़ल आए और यही बसने के लिए कोशिश करने लगे उनके लश्कर आगे बड़ने लगे । लूट ,नरसंहार करते हुए एक लश्कर कश्मीर की तरफ बढ़ा ।
कौतहुल वश गाँव के कई युवा छुप कर लश्कर देखने आए । फौज डेरा डाल वहां आराम कर रही थी और उनका खाना बन रहा था । अचानक एक सिपाही उन लड़को के सामने आ गया । और उसने कुछ नही कहा। एक लड़का खुशबु सूंघ कर सिपाही से बोला बहुत बढ़िया महक आ रही क्या पक रहा है । इतना सुन कर सिपाही हसा और बोला अब तुम हिंदू नही रहे क्योकि गाय का मांस पक रहा है और तुमने उसे पसंद किया ।
यह बात आग की तरह फैली और जब वह लड़का गाँव पंहुचा तब पंचायत हुई । और पंचायत ने उसे अलग कर दिया । क्योकि उसने गाय के मांस की तारीफ की । क्षमा याचना का भी असर नही हुआ पंडितो ने भी उसे धर्म से अलग किया । हर धर्म अधिकारी से गुहार यहाँ तक बनारस तक से उस युवक को निराशा मिली ।
वह युवक क्रोधित हुआ और उसने अपमान का बदला लेने के लिए हिंदू धर्म को छोड़ कर मुस्लिम धर्म अपनाया । और बदला लेने के लिए हिन्दुओं का संहार किया । किद्व्नती है उसने अस्सी किलो जनेऊ काटे । और वह काला पहाड़ के नाम से जाना गया ।
यह कहानी है या हकीकत पता नही लेकिन अंधविश्वास , धार्मिक सत्ता और तथाकथित धर्म रक्षको ने अपने देश का सबसे ज्यादा नुक्सान किया । संस्कृति के रक्षा के नाम पर वही गलतियां आज भी दोहराई जा रही है । न जाने कितने काला पहाड़ और बनवायेंगे यह लोग