नए साल में सूरज के दर्शन मुश्किल हो गए . ठण्ड ने कमाल कर दिया कभी कभी लगता है ठण्ड के मारे सूरज छुट्टी पर सुसराल चले गए . हां सुसराल से ध्यान आया बड़े बड़े सूरमा छुट्टियों पर सुसराल जाते है राज़ी से नहीं तो .......... तो क्या जिन्दगी हराम कर ले ना करके ........ खैर सुसराल है ही स्वर्ग की सार
सुसराल की बात चली तो सुसराल वकेशन मनाने हमारे शहर एक ब्लागर भाई खुशदीप सहगल आज कल आये है . इसीलिए देशनामा छुट्टी पर है और स्लाग ओवर बंद और मक्खन ........ मक्खन भी गया सुसराल मक्खनी के साथ . खैर अब आगे
एक फोन काल आई मैं खुशदीप सहगल बरेली में . वाह वाह क्या बात हुई तो मिलने का प्रोग्राम तय हो गया . ठीक समय पर खुशदीप भाई आये हमारे घर . कभी हम उनको कभी अपने घर को देखते रहे . कितने सुंदर व्यक्तित्व पता नहीं क्यों कम्प्यूटर और कलम तोड़ी १५ साल अगर माडल होते तो सुपर .
इतने जिम्मेदार पोस्ट पर कार्यरत खुशदीप भाई कितने सरल है उनसे दो मिनट बात करके ही पता चल जाता है . एक पत्रकार होने के कारण भारत के बिगड़े सिस्टम से दुखी खुशदीप भाई कुछ करना चाहते है और युवा सोच ही इस देश का कल्याण कर सकती है ऐसा मानना है उनका . मेरे पिता जी से एक लम्बी चर्चा हुई दुनिया जहान की बाते हुई और परिवार की भी .
उनके द्वारा कुछ टिप्स भी मिले ब्लॉग पर लिखने के लिए . समय कितनी जल्दी बीत रहा था पता ही नहीं चला . समय की अपनी मर्यादा होती है और ना चाहते हुए भी मुलाक़ात का वक्त ख़त्म करना पड़ा . पहली बार किसी ब्लॉगर से रूबरू हुआ था तो एक खुशी भी थी मुझे और परिवार को भी
और आखिरी बात पहली बार कोई मेरी पहचान से मेरे घर आया .
स्लाग ओवर
मक्खन सुसराल गया वहां मक्खनी से पूछा अब तो खुश हो .....
मक्खनी क्या बोली ..........................
फिर कभी ....................