शनिवार, मई 21, 2011

मै जिन्दा हूं

पता नहीं कैसे  हुआ मै दुनिया से कुछ दिन के लिए कट गया . कारण रहा मेरा लैपटाप जो काल के गाल में समा गया . हुआ यह जब से लिया था तब से बिना एंटी वायरस के बिंदास काम कर रहा था . सयानो की सलाह से उसमे एंटी वायरस वह भी खरीद कर डाला और उसे डालते ही एंटी वायरस ही उसका काल बन गया . आजतक वायरस जो नुक्सान ना पहुचा पाया वह एंटी वायरस ने पहुचा दिया . तमाम जरुरी दस्तावेज ,फोटो गायब हो गए जो अब कभी नहीं मिल पायेंगे .

खैर अब दुबारा से मै लौट आया हूँ .  सब तैयारी के साथ . आज २१ मई को दुनिया भी ख़त्म नहीं हुई . ना होने थी इसलिए एक डर भी निकल गया है कल आधी रात के बाद चली आधी और तूफ़ान ने एक बार को तो डरा ही दिया था . लेकिन दिल को  तसल्ली थी रजनीकान्त ने दुनिया बचाने के लिए अस्पताल में जाना स्वीकार कर लिया .

खैर अब दूबारा आ ही गए  तो मिलते रहेंगे

सोमवार, मई 02, 2011

ओसामा को जन्नत .............खुदा खैर करे

धोखा धोखा धोखा अपनो से धोखा ......... यह तो पाकिस्तान की नापाक आदत है . बेचारे ओसामा को जंगल और पहाडो से धोखे से मारने के लिए गद्दारों ने एबटाबाद में रिहायश देकर खुद ही मरवा दिया . कितनी नाइंसाफी है यह तो गद्दारी है इनका हिसाब तो क़यामत के दिन होगा . 

आज तो मुहर्रम सा लग रहा है . एक बार फिर से अपनो ने अपने को मरवा दिया . खुदा भी मुआफ नहीं करेगा इन्हें ..... अब जेहाद अपनो के खिलाफ करना पडेगा . अगर अपने ही धोखा नहीं देते तो यह कौम के गुनाहगार बाल भी बांका ना कर पाते . और अफ़सोस सबसे बड़ा यह भी अमरीका का राष्ट्रपति जो अपना ही था पहले अपने इलेक्शन जीतने के चक्कर में ओसामा  को शहीद कर दिया . खुदा इन्हें कभी मुआफ नहीं करेगा .

यही कुछ लिखना चाहता है बीबीसी शायद  इतनी शालीनता से ओसामा की मौत की खबर दी है उसने कमाल है .

बुधवार, अप्रैल 20, 2011

गिद्ध

इतना तो व्यस्त भी नहीं रहता कि ब्लॉग भी ना लिख सकू लेकिन थकान या कहे आलस्य हावी हो जाता है . ना लिखू तो कई विषय जो सामयिक है जिस पर लिखना चाहता हूँ वह पुराने हो जाते है . अन्ना हजारे की क़वायद भी मुझसे लिखने की रह गई . आज तक समझ नहीं पा रहा हूँ एक क़ानून कैसे भ्रष्टाचार को ख़त्म कर देगा . अगर कानूनों से कुछ होता तो पोटा से आतंक तो कब का हार चुका होता . 

भ्रष्टाचार हमारी जीवनशैली में सुविधानुसार समा चुका है . सिर्फ रिश्वत ही भ्रष्टाचार है यह मुझे कुछ बात हलकी लगती है . १०० में से सिर्फ १० या १५ रिश्वत जरूर माँगी जाती है और ८० से ९० बार हम लोग अपनी सुविधा के लिए रिश्वत देते है . ऐसा मेरा मानना है . 

खैर यह एक लम्बी बहस है मै तो मानता हूँ खुद  सुधरोगे जग सुधरेगा .  

और एक खबर आज अभी पढी अब गिद्धों की गिनती हो रही है . टाइगर तो गिन लिए थे पहले . अब गिद्धों का संरक्षण होगा . एक तरफ जन लोकपाल बिल और दूसरी ओर गिद्ध ...................... क्या सामंजस्य है . खैर उस दिन का बेसब्री से इन्तजार है जब भ्रष्टाचारियो का संरक्षण करना पडेगा जब यह खात्मे की तरफ हो . शायद यह मुमकिन नहीं लेकिन दिल बहलाने को यह ख्याल तो अच्छा है 

गुरुवार, अप्रैल 07, 2011

मिलिये एक नये ब्लागर से

मिलिये एक नये ब्लागर से . यह मेरा भान्जा है अक्षय  जिसने अभी +२ के पेपर दिये है . पढने मे बहुत तेज़ है क्लास १० मे उसने डिस्ट्रिक टॉप किया था . अभी डाक्टर बनने का इरादा है उसका .उसी की तैयारी में जुटा है . 

आजकल की युवा पीढी जैसी है वैसा ही है और वह अंगरेजी में सोचता  है और लिखता भी है  उसने अपने ब्लॉग का नाम रखा है SHARE YOUR TONGUE  

कृपया उसका मार्गदर्शन करे और उसका उत्साह बढाए .

बुधवार, मार्च 30, 2011

रुकावट के लिए खेद है

कभी कभी लगता है जिसने आपको लायक बनाया उसी का साथ पीछे छूट जाता है . मेरे साथ भी एसा हो रहा है . ज्यादा काम के कारण मै ब्लॉग से दूर हो रहा हूँ . अगर ज्यादा दूर हुआ तो कही एक दिन गुमनाम ना हो जाऊ इस ब्लॉग की दुनिया से ,इसी डर के कारण रात मै एक बार नींद उजड़ गई .तो जल्दी से चंद लाईने लिखने बैठ गया हूँ .

एक लाइन जो बचपन  से टीवी पर देखी थी ..... रुकावट के लिए खेद है . .........वह लिखने का मन कर रहा है ब्लॉग पर .......इसलिए  जल्द ही हाज़िर होते है ब्रेक के बाद . इंतज़ार कीजिये आज से अपना टाइम टेबिल सुधारा है 

गुरुवार, मार्च 10, 2011

चोरी लेकिन सीना जोरी से

आज पहली बार अपने नए प्रतिष्ठान से यह पोस्ट लिख रहा हूँ . पहले एक चर्चा छिड़ी थी कार्यस्थल से ब्लोगिंग क्या जायज है . यह सच है अगर मेरा स्टाफ यह करेगा तो मै परमीशन नहीं दूंगा . यहाँ तक की टीवी भी देखने की भी मनाही है स्टाफ को .खैर हेड होने का यह तो फ़ायदा है ही कोई आपको टोक नहीं सकता . आप सर है और आपके अंडर में आने वाले लोग आपको कुछ नहीं कह सकते क्योकि यह परम्परा है . 

दिन के चौबीस  घंटे कुछ कम पड़ने लगे है . बिलकुल घड़ी की सुइया हमें चला रही है . सब कुछ एक सा सब दिन एक सा . खैर ओखली में सर दिया तो मूसलो से क्या डरना .

तो कुछ दिनों तक यही चोरी चकोरी चलेगी . तब तक क्षमा सहित उनसे जो अपने ऑफिस से ब्लॉग नहीं लिख सकते .




शुक्रवार, मार्च 04, 2011

आप सादर आमन्त्रित है

मेहनत जब रंग लाती है तब अपने पर एक अज़ीब सा गर्व महसूस होता है . जबकि मै तो निमित्त मात्र हूं और दुनिया के इस रंग मंच पर अपनी भूमिका निभा रहा हूँ . उपाधिया बदल सी रही है पहले मै धीरू भैय्या कहलाता था अब धीरू सर कहलाया जा रहा हूँ कुछ लोगो द्वारा . 






कुछ इस तरह मेरा ऊपर भी मुलम्मा चढ़ रहा है . आजकल यहाँ ही कार्यरत  हूँ . यह सब ईश्वर की कृपा ,माँ पिता के आशीर्वाद , और मित्रो की सद्भावना  के बिना हासिल नहीं होता . 

६ मार्च को पूजा अर्चना के साथ हम इसका शुभारम्भ कर रहे है . आप सादर आमंत्रित है 
स्थान ;- कोरल मोटर्स 
             बरेली रोड 
             बदायूं