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मंगलवार, नवंबर 10, 2009

सपा सफा हो गई ,भाजपा विदा हो गई और कम्युनिष्ट हरी झंडी लाइन सफा - सुहाग नगरी ने सुहाग की त्यागी सीट पर सुहागन को भी नही बैठने दिया



उप चुनाव ने तो कहर ढा दिया . सपा सफा हो गई ,भाजपा विदा हो गई और कम्युनिष्ट हरी झंडी लाइन सफा . सबसे खतरनाक यह हुआ महंगाई को साँसे मिल गई क्योकि कांग्रेस आई महंगाई लाई . और माया ममता छाई

लेकिन जनता तो चक्रव्यूह से निकल ही नहीं पाती उसकी तो नियति ही है चक्कर में पड़े रहना . जनता ने इस चुनाव में विधानसभाओ में तो उत्तर प्रदेश को छोड़ सब जगह सत्ता को करारा तमाचा रसीद किया . ३१ साल का लाल शासन के शासको का चेहरा लाल कर दिया . बंगाल और केरल तो हिल ही गया लग रहा है . हिमाचल में नेताओ की  बीबियों को टिकिट नहीं दिया तो अपनी सीटे दूसरी पार्टियों को जितवा दी . धन्य हो

उत्तर प्रदेश में तो कमाल ही हो गया चुप मायावती ने बड़बोले लोगो की जुवान  पर ताला लगा दिया . इसे कहते है हाथी की चाल .

और एक लोक सभा की सीट का हाल फिरोजाबाद सुहाग नगरी ने सुहाग की त्यागी सीट पर  सुहागन को भी नही बैठने दिया . धरतीपुत्र की अपनी धरती ने ही अनदेखी की अनोखी सजा दी जो जीवन भर मुलायम सी चुभन  दिल में होती रहेगी . आखिर कितने पारिवारिक लोग जनता की सेवा करेंगे तो उनकी सेवा कौन करेगा इसलिए जनता ने उनका आग्रह ठुकरा दिया और जनादेश दे दिया बहू घर पर रह परिवार की देख रेख करे हमारी सेवा के लिए आप इतने लोग तो हो ही .

फिरोजाबाद की जीत ना तो राहुल गाँधी की है ना राज बब्बर की . यह हार है मुलायम सिंह की ,उनकी पार्टी की ,उनके परिवार की , उनके घमंड की , और उनके सलाहकारों की .

सोमवार, जून 01, 2009

आज की द्रोपदी भाजपा का चीर हरण पतियों के द्वारा

कलयुग की द्रोपदी सी लगने लगी है बेचारी भाजपा । द्रोपदी और भाजपा में कुछ समानता है , द्रोपदी के कई पति थे और भाजपा के भी आर .एस.एस , विहिप , हिंदू जागरण मंच , बजरंग दल , विधार्थी परिषद आदि जैसे कई पति है । द्रोपदी और भाजपा की दूसरी समानता यह है दोनों के पतियों ने उसे दांव पर लगाया ।

लेकिन द्रोपदी और भाजपा में एक असमानता शायद कलयुग के कारण है - वह यह है बेचारी द्रोपदी का चीर हरण कौरवो ने किया यानी दुश्मनों ने किंतु बेचारी भाजपा का चीर हरण तो उसके सगे पतियों ने ही सरे आम कर दिया और कोई कृष्ण भी न आ सका भाजपा को बचाने के लिए । द्रोपदी रूपी भाजपा का विलाप उनके ही कोरवो रूपी पतियों के अट्टहास में दव रहा है । बेचारी भाजपा को अपने पतियों के जिन्दा रहते हुए सती हो जाना ही एक विकल्प रह गया है ।

इस भाजपा को बचाने कृष्ण क्यो नही आए सवाल विचारणीय था उत्तर खोजा तो पता चला उसके पतियों ने श्री राम को लूटा , उनको विवादों में घसीटा इसी गुस्से के कारण कृष्ण भाजपा का चीर हरण होने पर भी सामने नही आए । और कृष्ण कौन ? .............. अरे वही आम जनता ।