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बुधवार, अक्टूबर 29, 2008

क्या ब्लॉग लिखना निठल्लेपन की निशानी है ?

ब्लॉगर बिरादरी से कुछ घायल सवाल

हम समाज के कौन से हिस्से का प्रतिन्धित्व करते है ?
हमारी आवाज कहा तक पहुच रही है ?
क्या हम अपना समय खराब कर रहे है ?
क्या पोस्ट लिखना हमारे निठल्लेपन की निशानी है ?

यह सवाल मुझे आंदोलित कर रहे है , कल मैं एक ब्यूरोक्रेट से मिला और गर्व सहित बताया कि आजकल मैं नियमित ब्लोगिंग कर रहा हूँ तो उनका जबाब था यह तो निठल्लों का काम है आपका लिखा हुआ पढता ही कौन है खुद ही लिखते हो और आपस में एक दूसरो को पढ़वाते हो । दस बीस लोग पढ़ते है दो ,चार टिप्पणी कर देते है । एक सबसे कम प्रसारित अखवार से भी कम पाठक है ब्लॉग के ।

आप लोग अपना समय खराब कर रहे है ,आपकी आवाज़ कम्पुय्टर के अंदर ही रह जाती है ,आप लोग मानसिक विलासता कर रहे हो सिर्फ अपनी कुंठा को जिसे आप अपनी प्रतिभा समझते हो को ब्लॉग में लिख कर अपने को प्रतिष्ठित पत्रकारों ,लेखको व कविओं की श्रेणी में समझते हो ।

उसी समय से उनके तीर रुपी सवाल मुझे परेशानकर रहे है । वैसे उनके कुछ सवाल जबाब के हक़दार है । आये ,सोचे , और जबाब ढूंढे कि हम समाज के किस काम आ सकते है ? आखिर अस्तित्व का प्रश्न है ।