बुधवार, अक्टूबर 19, 2011

एक अन्ना हुये थे

बहुत दिनों बाद हां या ना में जूझते  हुए आखिर लिखने का मन करने लगा . लेकिन बिषय का आभाव साल रहा है . भ्रष्टाचार और अन्ना मुझे आकर्षित नहीं करते .क्योकि मै कितने भी कुछ कहू लेकिन यह सच है भ्रष्टाचार का शिकार या शिकारी हर आम व्यक्ति है . या कहे आम आदमी शिकार और जो शिकारी हो जाता है वह ख़ास हो जाता है . 

आज अन्ना और उनकी टीम ईमानदारी का ढिंढोरा पीट रही है शायद वह ईमानदार इसलिए है की उन्हें बेईमानी  का मौक़ा नहीं मिला है . हम आम लोग इन्हें भी बेईमान बना कर छोड़ेंगे क्योकि जब जब व्यक्ति को जनसमर्थन हासिल होता है या तो वह निरंकुश हो जाता है या भ्रष्ट . टीम अन्ना निरंकुश  तो है ही समय रहते वह भ्रष्ट भी हो ही जायेगी . और टीम अन्ना ने साबित कर दिया है वह हरवाने की क्षमता रखते है . जितवाना उनके लिए सम्भव नहीं .एक ना एक दिन वह आम जनता के उस विश्वास को भी हरा देंगे जो १२ दिन २४ घंटे उपवास के समय हासिल हुआ था . 

अन्ना के कहेनुसार यदि कांग्रेस जनलोकपाल बिल लाती है तो कांग्रेस के समर्थन में वह आगे आयंगे . कांग्रेस जरुर यह बिल लायेगी . क्योकि फुदकने वाले चूहों के लिए बिल मिल जाए तो वह शांत रहते है .

खैर अन्ना प्रकरण बहुत ही थोड़े समय के अन्दर कोल्ड स्टोर में फ्रीज़ कर दिया जाएगा . कई सालो बाद याद करेंगे एक अन्ना हुए थे 

बुधवार, सितंबर 14, 2011

आज हिन्दी का वार्षिक श्राद्ध है



आज हिन्दी का वार्षिक श्राद्ध है . तमात विज्ञापन छपे है हिंदी को याद करने के लिए अखबारों में . तभी याद आया हिंदी डे का . आज से हिन्दी की सेवा के लिए पखवाड़े मनाये जायेंगे . बेंको ,सरकारी आफिसो में हिन्दी की सहानुभूति के जो पट लगे है वह साफ़ किये जायेंगे जिन पर लिखा होता है हम हिन्दी में लिखे पत्रों को स्वीकार करते है . 

आज हिन्दी के बेचारे लेखको को खोज खोज  कर उनको अंगवस्त्र व् श्री फल के उपहार दिए जायेंगे . उनकी रचनाओं को जो शायद पढी भी ना हो प्रशंसित की जायेंगी . 

 मुझे यह सब उसी तरह लगता है जैसे हम अपने  पितरो का श्राद्ध करते है .

 हिन्दी की दुर्दशा के दोषी कौन है अगर खोज की जाए तो हम सब दोषी ही साबित होंगे . ६२ साल हो गए हिन्दी दिवस मानते हुए लेकिन आज भी कृषि ,विज्ञानं के शोध अंगरेजी में ही होते है जबकि उनका फायदा तभी हो सकता है जब वह हिंदी ,तमिल ,तेलगू ,कन्नड़ ,बंगाली ,मराठी ,असामी ,पंजाबी,गुजराती आदि में हो क्योकि हम यही भाषाए जानते है अंगरेजी नहीं .

खैर लेट्स सैलीव्रेट हिंदी डे  


गुरुवार, अगस्त 25, 2011

लोकपाल बिल खारिज , सरकार आज लायेगी भ्रष्टाचार संरक्षण बिल

अभी अभी सभी राजनैतिक दलों  की  बैठक  में  यह  निर्णय  लिया गया है की देश की वैश्विक पहचान को बचाने के लिए तुरंत एक बिल पास किया जाए जिसको कहा जाएगा भ्रष्टाचार संरक्षण बिल  

बैठक समाप्त होने  बाद एक साझा ब्यान में यह कहा गया है लोकपाल जैसे फ़ालतू बिल देश के विकास में बाधक है . ४२ सालो से यह बिल नही है तभी देश आज तक तरक्की कर रहा है . और जन लोकपाल बिल की मान्ग करने वाले हताश और निराश लोगो की टोली है जो देश और दूसरो की तरक्की बर्दाश्त नही कर पा रहे है . सिर्फ़ दो ,चार या दस लाख लोगो का यह आन्दोलन पूरे भारत की जन्संख्या का .०००१% भी नही है . इसलिये इस राष्ट्र विरोधी हरकत को तुरन्त बन्द करने की हिदायत की गई है . 

इस बिल का ड्राफ़्ट  तैयार करने के लिये एक कमेटी बनाई गई है जिसमे मुख्य रूप से चिदम्बरम . कपिल सिब्बल , अरुन जेटली ,लालु यादव , सुषमा स्वराज , ए राजा , कलमाणी आदि मुख्य रूप से शामिल रहेंगे .

प्रधान मंत्री ने इस बिल को अपने कार्यकाल का सबसे अहम बिल स्वीकार किया है . उनहोने कहा है यह बिल देश की तरक्की को और आसान करेगा . लोकपाल जैसे स्पीड बेकर को भुलाने से ही देश सोने की चिडिया बनने के हाइ वे पर फ़ुल स्पीड से दौडेगा . 

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शेष आगे ........ समय समय पर इस बिल के बारे मे चर्चा होती रहेगी 

गुरुवार, अगस्त 18, 2011

क्या एक कानून भ्रष्टाचार खत्म कर सकता है

हल्ला मचा है जन लोक पाल का ............ बहुत समय से सोच  रहा हूँ क्या एक कानून से भ्रष्टाचार सच में ख़त्म किया जा सकता है . बहुत सोचने पर लगता है नहीं ...... अगर कानूनों से अपराध ख़त्म होता तो आज हम आज
अपराध मुक्त वातावरण में सांस ले रहे होते . खैर एक तबीयत से पत्थर तो उछाला ही जा सकता है . 

लाखो लोग सड़को पर है मेरा मानना है वह भीड़ जन लोकपाल के समर्थन में नहीं पर भ्रष्टाचार के विरोध में है . जनता को लोकपाल से कोई सरोकार नहीं यह  सच है .और अन्ना ........अन्ना सिर्फ निमित्त मात्र है इस लड़ाई में या कहे तो एक मौखुटा या कहे आवाज़ 

यह जो चिंगारी लगी है दावानल से पहले ना रुके ........और भ्रष्टाचार इसमे दफ़न हो जाए ......................आमीन 

शनिवार, जुलाई 23, 2011

चलता है होता है दुनिया है

चाह कर भी आलस्य के कारण ब्लॉग पर नियमित नहीं आ पाता . रोज़ के घटना क्रम जो हो रहे है उन पर लिखना चाहता हूँ लेकिन आलस्य मुझे यह नहीं करने दे रहा है . आज  आलस्य को हराकर कुछ लिखने की ठानी है . 

राहुल गांधी पदयात्रा पर निकले अच्छा  लगा . उन्होंने यह दिखाया वह चल भी सकते है . लेकिन हासिल क्या किया लोगो को फ़ायदा क्या यह तो पता भी ना चला . खैर बड़े बड़े लोग बड़ी बड़ी बाते हमें क्या 

जिन्हें फ़ायदा हुआ उन्हें जांच से पहले निर्दोष साबित कर दिया और जोकरों को बंद ....मै बात कर रहा हूँ नोट के बदले वोट के बारे में . अमर सिंह और उनके तथाकथित जोकरों ने उचल कूद उस समय की थी मुझे नहीं लगता वह सोनिया ,मनमोहन को पता ना हो . आखिर फ़ायदा तो उन्ही का था . लेकिन उन्हें तो क्लीनचिट मिल ही गई .कितना अजीब है . फिर भी चलता है होता है दुनिया है . 

और भी घटनाएं रोज़ हो रही है आजकल तो सावन में भोले शंकर के भक्त भक्ति का भोडा प्रदर्शन कर रहे है . डीजे पर बजाते फिल्मी धुन के भजन और सड़क पर कब्जा देख कर दया तो आती है लेकिन पैदल सैकड़ो मील चलने का जज्बा देख कर भक्ति पर विशवास भी होता है 

रविवार, जून 19, 2011

फादर्स डे................. जस्ट सैलीब्रेट

अमरीकी तहजीब या कहे मार्केटिंग के फंडे ने तरह तरह के डे इजाद  कर दिए है . फादर ,मदर ,सिस्टर ,ब्रदर ,सन,डाटर और ना जाने क्या क्या .................. और हम उसे आत्मसात भी कर रहे है . आज फादर डे है . एक पुत्र और एक पिता होने के नाते इस दिन को अपने तरीके से देख रहा हूँ मै .

पूर्वजन्मो का फल है मुझे ऐसे घर में जन्म मिला जो बिरलो को ही मिलता होगा . मेरे पिता एक प्रेरणा हो सकते है किसी के भी . मेरा सौभाग्य है मेरे पापा . उनकी मेहनत लगन ने उन्हें वहां तक पहुचाया जहां लोग कल्पना ही कर सकते है . 

एक ऐसे परिवार में जन्म लिया मेरे पापा ने जहा किसी बात की कोई कमी नहीं थी . उस जमाने में अपने इक्के [तांगा] से स्कूल जाना बहुत ही विलासता मानी जाती थी . लेकिन एक दुर्भाग्य भी था उनकी माँ का निधन उस समय हो गया जब वह दूध पीते बच्चे थे . समय के साथ दूसरी माँ आई और वह वैसी ही साबित हुई जैसे लोगो के मन में छवि है दूसरी माँ की . बचपन कष्ट कारक बीता . आज तक यह समझ नहीं आता है पति क्यों कमजोर पड़ जाता है पत्नी के सामने . खैर ......... .. कल्पना कीजिये चार पांच साल का बच्चे को आटा,  दाल ,नमक दे कर कहा जाए की अपना खाना खुद बनाओ तो क्या होगा ............. किसी तरह बचपन कट गया लेकिन मन में ठाना किसी से कुछ नहीं लेंगे . अपने पैरो पर खड़े होने की ललक ने उन्हें कठिन परिश्रम की ओर आगे किया . 

पहली शुरुआत सायकिल पर सामान रखकर लगभग १०० किमी रोज़ की परिक्रमा . यह कार्य मुझे लगता है जीवकोपार्जन से ज्यादा घर वालो को यह दिखाना था मै कुछ भी कर सकता हूँ . शुरू से ही समाज सेवा व् राजनीति का भी जज्बा था वह भी साथ साथ चलता रहा . राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के  प्रचारक बन संघ के शुरआती दौर में घर घर ,गाँव गाँव उसका काम किया . बाद में जनसंघ में सक्रिय रूप से शामिल हुए . अपना व्यापार शुरू किया और उसे बुलंदियों तक पहुचाया . 

बाद में अपनी मेहनत और इमानदारी से तीन बार संसद सदस्य चुने गए . आज के दौर के ऐसे नेता जो इतने ऊँचे पदों पर रहने के बाद भी बेदाग़ है . विरोधी भी उन पर आरोप लगाने का साहस ना कर सके . आज वह रिटायर है राजनीति से भी क्योकि आज के माहोल  को वह अड्जेस्ट नहीं कर पा रहे है . सब एक थैली के चट्टे बट्टे है यह उनका मानना है . 

मै उनका पुत्र जो इस कोशिश में हूँ अपने पिता के पदचिन्हों पर कदम दो कदम चल सका तो अपने  को धन्य समझूंगा . 



शनिवार, जून 04, 2011

मुफ्ते माल दिले बेरहम

कुछ दिनों से व्यापार कर रहा हूँ . व्यापार भी कार का . बहुत पैशन और टेंशन का काम है यह . टारगेट की तलवार हमेशा सर पर  लटकती है . कैसे हमारे सेल्स की टीम मेहनत करती है तब कही जाकर टारगेट के नज़दीक पहुँच पाते है . 

नए नए अजीबोगरीब ग्राहक से रोज़ पाला पड़ता है . आजकल दहेज़ के लिए  कारे बिक रही है जैसे कभी मोटर साइकिल और उनसे पहले साइकिल बिका करती थी . लड़की का बाप जो निरही गाय नज़र आता है उस समय और लडके का बाप कसाई . आते है कम कीमत की कार खरीदने और शोरूम पर पसंद करते है उससे महंगी कार .वह समय लड़की के बाप के लिए बहुत भारी होता है . मुझ से मदद की उम्मीद लिए मेरे चेंबर में जब आता है तो मुझे समझोता कराना पड़ता है . जब जब मैंने यह कहा की लड़की वालो की सामर्थ्य इतनी ही है क्यों ना आप और पैसा डाल कर इससे बढ़िया कार खरीद ले . तब तब लड़के वाले उसी कार पर आ जाते है जो लड़की वाले दे ना चाहते थे . 

मुफ्ते माल दिले बेरहम का उदहारण रोज़ देखने को मिल रहा है .........................