आधा अगस्त अस्त व्यस्त रहा मेरा . अब गाडी पटरी पर लग रही है . अभी बे कार हूँ क्योकि अपनी तो कार चोरी हो चुकी है और बिना क्लेम मिले नई कार सोचना अपने से मज़ाक करना ही है . खैर जब वह दिन ना रहे तो रहेंगे यह भी नहीं .
बहुत दिनों से ब्लॉग से भी दूर रहा . नोयडा के एक अस्पताल में १० दिन तीमारदारी में रहा जहां इन्टरनेट सुबिधा नहीं थी और शायद जो थी वह सिर्फ विदेशी मरीजों को ही उपलव्ध थी . कोई बात नहीं हम को तो सदियों से आदत है इस तरह के दुर्व्यवहार की . इन १५ दिनों में हालात जैसे भी हो कई समाचार पढ़कर देखकर लिखने का मन करता था . लेकिन मजबूर था . फिर भी दो चार विषय पर दो चार लेने तो लिख ही सकता हूँ .....
१- सांसदों का वेतन भत्ते बेहताशा बड़ा दिए गए . मज़ा आ गया .............. अब कोई गरीब नहीं रहेगा सांसद लेकिन जिन सांसदों ने उसका विरोध किया उन्ही सांसदों की खबर सुनने को आतुर हूँ उन्होंने बढोतरी को ठुकरा दिया . शायद बड़ी बिंदी वाली बहन जी या उनके देवर समान साथी जल्द घोषणा करे . पर मुझे मालूम है आती हुई लक्ष्मी ठुकराता कौन है .
२- भगवा आतंक का हौआ मचा दिया चिदम्बर ने थोड़ी देर को नक्सल ,कश्मीर को भुलावे में तो डाल ही दिया . अब पढ़े लिखे जो कहें वह सही ........पर मैं जानता हूँ यदि भगवा में थोड़े आतंक की कीटाणु होते तो हरा काला सफ़ेद कही ना होता . क्योकि सबसे पहले सदियों से भगवा ही तो था . वैसे आतंक कलर ब्लाइंड होता है यह सब जानते है . और आज सबसे ज्यादा तो आतंक रंग बिरंगा है पट्टियों वाला जिसके किनारे पर कई तारे जड़े है .
३- आखिर यमुना की बाढ़ ऐसा लगा जैसे हथिनी कुंड से छोड़ा गया पानी सिर्फ दिल्ली को ही डुबोयेगा . टी वी पर समाचार चैनल देखकर तो ऐसा ही लगा .यमुना का सफ़र जो इलहाबाद तक है सिर्फ दिल्ली तक ही महसूस हो रहा था इन्हें . बिलकुल कूप मंडूक है हमारे चौथे खम्बे वाले . वैसे अगर आपको बाढ़ देखनी हो तो हमारे यहाँ आइये हजारो बीघा जमीन डूबी हुई है . जिसमे ४० बीघा मेरी भी है .
शेष शुभ अब नियमियतिता बनी रहे यही कामना है किशन कन्हैया से