गुरुवार, सितंबर 09, 2010

आप कौन से नम्बर के भारतीय हो ?

 बच गये बाल बाल बच गये . आज इस बात की खुशी है की २ नम्बर का होना कितना फ़ायदेमंद है . मुझे गर्व है मै २ नम्बर का हिन्दुस्तानी हूं. क्योकि हर तीसरा हिन्दुस्तानी भ्रष्ट है . ऐसा मानने वाले सी बी सी मि.सिन्हा क्या कहना चाहते है पता नही .लेकिन इतनी लम्बी और महत्वपूर्ण पद से रिटाइर सिन्हा साहब आज तक यह नही जान पाये हिन्दुस्तान  कहां है .

भारत में ८० % जनता गांव मे रहती है . गांव मे रहने वाले मेहनत मजदूरी करने वाले भूख से लडकर मरने वाले कब से भ्रष्ट की श्रेणी मे आ गये . हां सिन्हा साहब जहा रहते है और जहा उन्होने नौकरी की है वहा जरुर हर व्यक्ति भ्रष्ट है . वहां ना कोई एक नम्बर वाला ईमानदार है ना दो नम्बर वाला और ना ही तीन नम्बर वाला . पता नही तीसरा कह कर किसे बचाना चाहते है सिन्हा साहब .  
दिल्ली मे एक दो तीन नम्बर पर है राष्ट्रपति ,प्रधानमंत्री,और सोनिया गान्धी . और सी वी सी के अनुसार हर तीन मे से एक भ्रष्ट है . इन तीनो मे से कौन वह यह बताये . खैर जो है सो है .

एक सवाल आप सब से आप कौन से  नम्बर के भारतीय हो ?

मंगलवार, सितंबर 07, 2010

धन्यवाद धन्यवाद और धन्यवाद

धन्यवाद धन्यवाद और धन्यवाद . इसके सिवा और कुछ कह भी तो नहीं सकता . ५ सितम्बर को रात में सोया था तब तक आने वाली खुशियों से अन्जान था . ठीक १२ बजे मोबाइल बजा उधर से आवाज़  थी आपको जन्मदिन की शुभकामनाये .क्या आपको डिस्टर्व तो नहीं किया . कुछ सैकेंड तो मैं कुछ समझ नहीं पाया लेकिन तभी चेतना आयी और समझ आ गया यह आवाज़  तो अपने पाबला जी की है . पाबला जी एक ऐसे ख़ास रिश्तेदार है जिन्हें अभी तक देखा ही नहीं . लेकिन सुख दुःख में पाबला जी हमेशा साथ खड़े मालूम होते है . पाबला जी से बात हो ही रही थी तभी फोन पर एक काल ने और दस्तक देना शुरू की .

वह थे दीपक मशाल जी . सात समुन्दर पार से बधाई मिलने लगी .मैं तो सोच भी नहीं सका इतनी दूर दूर से भाई लोग मेरा जन्मदिन मना  रहे  है जबकि  घर  वाले  अभी सो  ही रहे  है .दीपक मशाल जी को  तो धन्यवाद के शब्द भी कम पड़ रहे है . तभी एक फोन और बजा वह था अपने ललित शर्मा जी का . ललित जी को भी धन्यवाद दिया और बधाई ली .

खुशियाँ ज्यादा देर तक साथ नहीं रही मैं उस दिन नोयडा में था और जिस होटल में था वहा अपना बी एस एन एल का नेटवर्क दम तोड़ गया . और सुबह तक मृत रहा . कई लोगो से बात नहीं हो पाई जिसका मुझे खेद है . लेकिन एक खुशी इस बात की है ब्लॉग ने बहुत से साथी दिए इससे अच्छा उपहार और क्या  हो सकता है .

उसके बाद जब घर आकर शाम को जब मेल चैक की तो वहा  अग्रज समीर जी , दिनेशराय द्विवेदी जी ,नरेश सिंह जी सहित कई लोग वहा वधाई दे रहे थे . और पाबला जी के ब्लाग  पर तो वधाईयां  ही बधाईयाँ मौजूद थी .

आज तक मेरा जन्मदिन इतनी शानदार तरीके से नहीं मना .वैसे मैं भी जन्मदिन नहीं मनाता हूँ और कई सालो से अपना फोन भी बंद कर लेता था इस दिन . परन्तु पाबला जी ने वह परम्परा समाप्त करा दी .

बुधवार, सितंबर 01, 2010

आतंक कलर ब्लाइंड होता है

आधा अगस्त अस्त व्यस्त रहा मेरा . अब गाडी पटरी पर लग रही है . अभी बे कार हूँ क्योकि अपनी तो कार चोरी हो चुकी है और बिना क्लेम मिले नई कार सोचना अपने से मज़ाक करना ही है . खैर जब वह  दिन ना रहे तो रहेंगे यह भी नहीं .

बहुत दिनों से ब्लॉग से भी दूर रहा . नोयडा के एक अस्पताल में १० दिन तीमारदारी में रहा जहां इन्टरनेट सुबिधा नहीं थी और शायद जो थी वह सिर्फ विदेशी मरीजों को ही उपलव्ध थी . कोई बात नहीं हम को तो सदियों से आदत है इस तरह के दुर्व्यवहार की . इन १५ दिनों में हालात जैसे भी हो कई समाचार पढ़कर देखकर लिखने का मन करता था . लेकिन मजबूर था . फिर भी दो चार विषय पर दो चार लेने तो लिख ही सकता हूँ .....

१- सांसदों का वेतन भत्ते बेहताशा बड़ा दिए गए . मज़ा आ गया .............. अब कोई गरीब नहीं रहेगा सांसद लेकिन जिन सांसदों ने उसका विरोध किया उन्ही सांसदों की खबर सुनने को आतुर हूँ उन्होंने बढोतरी को ठुकरा दिया . शायद बड़ी बिंदी वाली बहन जी या उनके देवर समान साथी जल्द घोषणा करे . पर मुझे मालूम है आती हुई लक्ष्मी ठुकराता कौन है .

२- भगवा आतंक का हौआ मचा दिया चिदम्बर ने थोड़ी देर को नक्सल ,कश्मीर को भुलावे में तो डाल ही दिया . अब पढ़े लिखे जो कहें वह सही ........पर मैं जानता हूँ यदि भगवा में थोड़े आतंक की कीटाणु होते तो हरा काला सफ़ेद कही ना होता . क्योकि सबसे पहले सदियों से भगवा ही तो था . वैसे आतंक कलर ब्लाइंड होता है यह सब जानते है . और आज सबसे ज्यादा तो आतंक रंग बिरंगा है पट्टियों वाला  जिसके किनारे पर कई तारे जड़े है .

३- आखिर  यमुना की बाढ़ ऐसा लगा जैसे हथिनी कुंड से छोड़ा गया पानी सिर्फ  दिल्ली को ही डुबोयेगा . टी वी पर समाचार चैनल देखकर तो ऐसा ही लगा .यमुना का सफ़र जो इलहाबाद तक   है सिर्फ दिल्ली तक  ही महसूस   हो रहा था इन्हें . बिलकुल कूप मंडूक है हमारे चौथे खम्बे वाले . वैसे अगर आपको बाढ़ देखनी हो तो हमारे यहाँ आइये हजारो बीघा जमीन डूबी हुई है . जिसमे ४० बीघा मेरी भी है .

शेष शुभ अब नियमियतिता बनी रहे यही कामना है किशन कन्हैया से

रविवार, अगस्त 22, 2010

यह मुसीबते अकेले क्यो नही आती .

यह मुसीबते एक साथ ही क्यों आती है अकेले क्यों नहीं . पिछले कई दिनों से कई मुसीबते एक साथ सामने आ गयी . अभी कुछ नए और पुराने व्यापार के सिलसले में बिजी हूँ . तभी अचानक मेरे जीजा जी के पिताजी को हार्ट अटैक हुआ और उन्हें नोयडा के मेट्रो हास्पिटल ले जाना पड़ा . एंजियोग्राफी के बाद तुरंत बाई पास की सलाह दी गई . हम लोग परेशान थे ही तुरंत खून और पैसे की व्यवस्था करनी थी इसलिए तुरंत अपने शहर को गए . 

वहा से सब व्यवस्था हासिल कर अपनी कुछ ही महीने पुरानी टाटा सफारी से हास्पिटल पहुचे . जैसे ही हम अन्दर गए और थोड़ी देर बाद बाहर आये तो पता चला की सफारी चोरी हो चुकी है . गाडी तो गई ही गई उसमे रखा सब सामान ,कपड़ा लित्ता ,कागज़ और रुपये भी चोरी हो गए . रिपोर्ट लिखवा दी . जो नुक्सान हुआ वह कुछ ज्यादा ही था . 

संतोष इस बात का है आपरेशन सफल हुआ . अब वह ठीक है और गहन चिकित्सा कक्ष में है एक आध दिन में वार्ड में शिफ्ट हो जायंगे . 

इस घटना से पुरानी कहावत सही साबित हुई . कि मुसीबते अकेले नहीं आती .

गुरुवार, अगस्त 12, 2010

यूनाईटेड स्टेट्स आफ़ इण्डिया

स्वायत्तता सिर्फ कश्मीर को क्यों ? सब राज्यों को क्यों नहीं . कश्मीर से लेकर केरल तक ,गुजरात से बंगाल तक और पूर्वोत्तर के राज्यों को भी स्वायत्तता दे देनी चाहिए . अपने क़ानून बनाये यह राज्य . अपने हिसाब से चलाये मुख्यमंत्री अपने राज्य को गवर्नर बन कर . अपनी फौजे  बनाए .और इंडिया के साथ रहे .

यह कायराना विचार कमजोर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मूंह से निकाले गए ब्यान से आया जिसमे कश्मीर की स्थिति को देखते हुए और स्वायत्तता देने की बात कही गयी है . लाखो करोड़ खर्च  कर दिए इन कश्मीरियों { यहाँ पर कश्मीरियों से मतलब उनसे है जो आज कश्मीर में रह रहे है } पर फिर भी वह पाकिस्तान परस्त है . आतंक के हिमायती है और इन्डियन डोग गो बैक के नारे लगाते है . फिर भी हम सौ सौ जूते खा कर उन्हें समझाने की कोशिश कर रहे है . हमारी कमजोर और नाकारा सरकारे हमें आज तक नीचा दिखाती आ रही है .

 यदि  सरदार पटेल ना होते तो शायद सौ दो सौ कश्मीर पूरे हिन्दुस्तान में पल रहे  होते . कश्मीर पर उनकी नहीं मानी गई तो यह हाल हुआ . ५०० से ज्यादा छोटे बड़ी स्टेट मिला दी भारत में लेकिन कश्मीर गृह राज्य था हमारे पहले प्रधानमंत्री का और उनके चहेते शेख अब्दुल्ला को वहाँ  की बागडोर देना ही गुनाह हो गया . अब्दुला ने ही कश्मीर मिलिशिया नाम से एक सेना का भी गठन किया था . जो बाद में बड़ी मुश्किल से जम्मू कश्मीर लाइट इन्फैंट्री बनी .

जब कश्मीर की बात होती है तो सिर्फ कश्मीर का ध्यान रखा जाता है जम्मू या लदाख का नहीं . कभी वहां के लोगो से पूछे किस दोयम दर्जे में रह रहे है वह . खैर उनकी यह नियति हमारी यह सरकार की वजह से ही है . अगर इस कमजोर  सरकार पर अंकुश  नहीं लगाया तो यू एस आई और उसके बाद अपनी ढफली अपना अपना राग .

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर चिंतन करे की कितने साल और तक यह स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा . मुझे तो नहीं लगता यह दिवस अक्षुण रह पायेगा .

सोमवार, अगस्त 09, 2010

कश्मीर की समस्या कश्मीरियों की नहीं है कश्मीर की समस्या हिन्दुस्तानियों की है .

 हड़बड़ी में आज़ादी लेने के चक्कर में आधा कश्मीर, आधा पंजाब ,आधा बंगाल और पूरा सिंध हमने खो दिया .भारत की आजादी के समय एक अधूरा  कश्मीर हमें मिला या कहें मेजर सोमनाथ शर्मा जैसे परमवीरो की शाहदत के कारण इतना बच सका . कश्मीर के असली कश्मीरियों को मार मार के भगा दिया और हम उन जहरीले सापों को दूध पिला पिला कर आज तक पाल रहे है जिन्होंने यह कुकृत्य किया . चंद खानदान घुमा  फिरा कर कश्मीर को चला रहे है . और अलगाववादियों को हवा दे रहे है .  हमारी आज तक की सरकारे सिर्फ और सिर्फ बाते ही कर रही है . 

कश्मीर की समस्या कश्मीरियों  की नहीं है कश्मीर की समस्या हिन्दुस्तानियों की है . और उसका फैसला सब हिन्दुस्तानियों को ही मिल बैठ कर करना चाहिए . अलगाववादियों से सिर्फ गोली ही बात करे तो देश के लिए हितकर होगा . समय समय पर अपने सैनिको और अर्धसैनिको का मनोबल तोडा जाता है . मानवाधिकार के नाम पर देश के रक्षको पर अत्याचार होता है . शांतिकाल{?} में ही हजारो सैनिक शहीद हो गए . जितने सैनिक इस में शहीद हुए है शायद ही किसी युद्ध में हुए हो .

हुर्रियत के चलाने वाले आतंकवादी आज कहते है हम १४ अगस्त को आज़ादी का दिन मनाएंगे और १५ अगस्त को शर्म दिवस . और हमारी सरकारे चुप है . राष्ट्र द्रोह को मूक समर्थन देने वाले भी राष्ट्र द्रोही ही है . अगर कश्मीर को भारत में ही जोड़े रखना है तो इसी १५ अगस्त तक इन देशद्रोहियों को जहनूम में भिजवा देना चाहिए .  .








गुरुवार, अगस्त 05, 2010

खुदा के वास्ते पर्दा ना काबे से उठा जालिम - कहीं ऐसा ना हो यहाँ भी वही काफिर सनम निकले

राम भगवान् राम का बर्थ सार्टिफिकेट चाहिए उन्हें . बहुत चेलेंज हो रहे है मजाके हो रही है . और हम लोग चुप है . हम बर्दाश्त की हद तक खामोश है . क्योकि हम सेकुलर है .................... सेकुलर माने ..............???????????

रोज़ रोज़ हमले सहते सहते मुझे अपने बजूद पर भी शक होने लगा है . मेरी मसे क्यों नहीं भिज रही ,मेरी रीड़ की हड्डी में झनझनाट क्यों नहीं हो रही , क्योकि शायद मैं सेकुलर हूँ ............ सेकुलर माने ..............???????????

देने को तो हर बात का जबाब दे सकता हूँ . पर अंधे के आगे रोय अपनी आँखे ख़ोय ..............

इसलिए आग से मत खेलो पत्थर मत उछालो क्योकि जब पत्थर इधर से फिका तो मुश्किल होगी .

अमन की बात करो चैन की बात करो ,दीन दुनिया की बात करो  . तरक्की की बात करो . अच्छे मुस्तकबिल की बात करो .

चचा ग़ालिब भी कह गए है

खुदा के वास्ते पर्दा  ना  काबे  से  उठा  जालिम 
कहीं ऐसा ना हो यहाँ भी वही काफिर सनम निकले 
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