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कई दिन बाद चार घंटे की छूट मिली कर्फ्यू में पूरी सख्ती के साथ . सडको पर कार स्कूटर से चलना मना था . सिर्फ सायकल या रिक्शा को इजाजत थी अनजाने में ही सही गरीब रिक्शे वालो की थोड़ी सी मदद हुयी इस नियम से . जो रोज़ कुआं खोदते है और पानी पीते है उनकी १४ दिन की कैद ................... कल्पना से ही भय लगता है . भुखमरी की ओर हजारो परिवार बड़ रहे है . आज के हालात को देखकर कल कर्फ्यू में ढील बड़ाई जा सकती है . शहर को जिसने इतनी हिंसा आज तक ना झेली देखकर डर सा लगता है . एक लाइन खिच गयी जो हाल फिलहाल मिटती नज़र नहीं आ रही क्योकि सियासत के सौदागर नहीं चाहते उनकी तिजारत में कोई कमी आये . दिल्ली लखनऊ के होलसेलर भी नहीं चाहते कि इतनी जल्दी उनकी दुकाने सिमटे . उन्हें तो मौका मिला है एक दुसरे को गरियाने का इसीलिए तो अपने एजेंट रोज़ बरेली की तरफ भेज रहे है . आज यह ,कल यह ,परसों यह एजेंट फिजा को बिगाड़ने आ रहे है .
ईश्वर के लिए खुदा के लिए हम बरेली वालो को अकेला छोड़ दीजिये . हम ने गलती की हम ने चोट खाई हमने सजा भुगती हम ही इस दर्द का इलाज़ ढूंड लेंगे . आप हम पर रहम करे हमारे जख्मो को सूखने दे उन्हें कुरेदे नहीं .