सोमवार, दिसंबर 08, 2008
हाँ कांग्रेस महंगी पड़ी भाजपा को
भाजपा के बड़बोले नेता कहीं खो गए है उनेह खोजे और उन से पूंछे कांग्रेस महंगी पड़ी या आप सस्ते हो गए ।
और भाजपा के एक बुजुर्ग तो विजय प्राप्त नहीं कर पाए , दुसरे का क्या होगा ............... तेरा क्या होगा लाल
शनिवार, दिसंबर 06, 2008
मैं अयोध्या इन्साफ चाहती हूँ
मैं सरयू पुत्री अयोध्या
इन्साफ चाहती हूँ
चार सौ साल पहले मुझे लूटा गया
बलात्कार किया मेरी भावनाओ के साथ
खंडहर कर दिया
मेरी पहचान को बदल दिया
मेरे राम को बेघर कर दिया
तब से आज तक मैं इन्साफ चाहती हूँ
जज सहाब
अगर हिम्मत हो तो इंसाफ करना
नहीं तो मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो
मेरे तो भाग्य मे ही लिखा है
लुटना और पिटना
शुक्रवार, दिसंबर 05, 2008
क्यों जब भगवा बिग्रेड पर कोई संकट आता है तभी कोई आतंकी घटना घट जाती है
यह मजाक है या कुछ और लेकिन बात मे से बात तो निकली है और बात फैलेगी ही ।
एक सवाल
क्यों जब भगवा बिग्रेड पर कोई संकट आता है तभी कोई आतंकी घटना घट जाती है
- ताबूत घोटाला जब चरम पर था तभी संसद पर हमला हो गया ।
- भगवा सरकार फेल हो रही थी यो कारगिल हो गया ।
- चार राज्यों में कमजोर हालत थी तभी मुंबई पर हमला हो गया ।
एक इतेफाक है और यह इतेफाक क्या सोचने को मजबूर कर रहा है , लेकिन यह सही नहीं है , है बिलकुल गलत लेकिन किस किस की जबान पकडेंगे ।
इस जबान के चक्कर मे राम का वनवास हुआ , और सीता को बाद मे घर निकाला ।
क्या अजाब गज़ब है यह सब आये सोचे और चर्चा करे
गुरुवार, दिसंबर 04, 2008
हिन्दू आतंकवादी नहीं हो सकता
एक फ्रेंच सम्पादक का कहना है हिन्दू आतंकवादी हो ही नहीं सकता । फ्रंकोइस गवातिय्र 'ला रेवूय डी लदे' के सम्पादक है जो पेरिस से प्रकाशित होता है । उनका लिखना है भारत मे एक अरब हिन्दू रहते है यानी दुनिया का है छटा आदमी हिन्दू है तथा सर्वाधिक उदार है ।
भारत की अस्मिता व अस्तित्व हिन्दू धर्म पर टिका है । यह देश हिंदुत्व के आध्यात्मक पर आधारित है । आप भारत के लाखो गावों मे जाए तथा एक औसत भारतीय से मिले तो आप पाएंगे कि वे सीधे ,सरल तथा धार्मिक विचारो के होते है । वे भारत के बहुल वाद व उदारवाद मे विश्वास करते है । चाहे आप ईसाई हो या मुस्लिम हो या कोई और सबके प्रति उदारता है यहाँ किसी से दूरत्व का भाव देखने मे नहीं आता ।
हिन्दू धर्म की इस उदारता का परिणाम भारतीय मुस्लिम और ईसाई मे भी दीखता है वे लोग भी अन्य ईसाईयों और मुस्लिमों से भिन्न है । पिछले ३५०० वर्षो के इतिहास मे हिन्दुओं ने कभी किसी देश पर हमला नहीं किया है ,और न ही ताकत के बल पर किसी पर अपने धर्म को लादने का प्रयास नहीं किया है । आप दुनिया मे किसी हिन्दू को कट्टरपंथी नहीं पाएंगे ।
एक बात जो मुझे कहनी है यह लेख पढ़ कर हिन्दू धर्म नहीं है । वेदों ,पुराणों, रामयण, गीता मे कही भी हिन्दू शब्द का प्रयोग नहीं हुआ है । हिन्दू हिन्दुस्तान की राष्ट्रीयता है । हिन्दुस्तान मे रहने वाला हर व्यक्ति हिन्दू है । अरबी भाषा मे स शबद का उचारण न होने के कारण सिन्धु को हिन्दू कहा जाने लगा क्योकि सिंध के आगे रहने वाले सब हिन्दू कहलाने लगे ।
मुझे लगता है हमारी परम्परा , हमारी उदारता हमारी कमजोरी बन गई है ,हमारी दयाशीलता को कायरता समझ लिय गया है । हमें पीड़ित और शोषित मान लिय गया है । समय है हम जागे और अपनी हस्ती को बचाए । क्योकि रोम मिट गया मेसो पोटामिया मिट गया
कुछ बात है की हस्ती मिटती नहीं हमारी
बुधवार, दिसंबर 03, 2008
अंतर भारत और इस्राइल की मानसिकता का
मुंबई हमले मे शहीद हुए नागरिको मे इस्राइल के ६ नागरिक थे और उन नागरिको को जो सम्मान उनके देश ने दिया है वह सम्मान हमारे यहाँ के खास शहीदों को भी नही मिला । सारे इस्राइल ने अपने राष्ट्रपति की उपस्थिति मे अपने मुंबई के शहीदों को अन्तिम बिदाई दी । और एक आया जिसने भारत की पन्ना धाय की परम्परा को आगे बढाते हुए अपनी जान पर खेल कर एक दो वर्ष के अनाथ मोशे को बचाया उसका भी ऐसा सम्मान किया जो हमारे यहाँ कल्पना से परे है । और अपने नागरिको की मौत का बदला लेने का प्रण किया और इस्राइल यह कर भो सकता है ।
और दूसरी तरफ़ हम राष्ट्रभक्ति से ओत -प्रोत ,नर मे नारयण का दर्शन करने वाले विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता के वंशज अपने नागरिको की आतंकी हमले मे मौत को हादसा ही मानते है सिर्फ़ सरकारी व्यक्ति ही शहीद माने जाते है और वह भी बेचारे उस सम्मान को प्राप्त नही कर पाते जिसके वह सच्चे हकदार है । हमारे देश मे शायद कुछ ही परिवारों को वह दर्जा मिला है जो एक इस्रायली को अपने देश मे मिला है ।
यही एक अंतर भारत और इस्राइल की मानसिकता का फर्क उजागर करता है । इस्राइल पर एक हमले का प्रति शोध इतना तीव्र होता है की हमलावर देश का राष्ट्रपति को भी वह बंधक बना लेता है । और हम वीर देश के बहादुर लोग चिट्ठी पतरी मे लग जाते है । लिस्ट देते है, वार्ता करते है , हल्की धमकी भी देते है और भूल जाते है कोई हमला भी हुआ था । और अगले हमले पर यही प्रतिक्रिया अपनाते है ।
क्या हम इस्राइल से थोडी हिम्मत ,थोड़ा देश प्रेम ,थोड़ा सम्मान उधार नही ले सकते ? क्या हम अपने अतीत गौरव शाली अतीत से कुछ सबक लेकर कुछ ऐसा कर जाए जिससे दुनिया को यह लगे भारतीयता अभी मरी नही है हिन्दुस्तानी भी अपमान का बदला लेना जानते है ।
हे ईश्वर यदि तुम कही हो तो हम ११० करोड़ लोगो को मानसिक शक्ति प्रदान करो जिससे हम अपने सम्मान की तो रक्षा कर सके ।
मंगलवार, दिसंबर 02, 2008
हम स्वाभिमानी फिर से कब होंगे ?
शहीद सिर्फ अपने घर वालो की ही यादो मे रह जायेंगे , हमारी याददाश्त इतनी नहीं की हम उनेह लम्बे समय तक याद करे क्योकि हम अपने ऊपर हुए अहसान तो याद नहीं रहते यह तो देश की बात है ।
एक प्रश्न जो मुझे परेशान कर रहा है कि हम स्वाभिमानी फिर से कब होंगे ? हमारा खून सफ़ेद हो गया है और ह्रदय पत्थर ।
कौन से अवतार के इंतज़ार मे है हम हिन्दुस्तानी , या कौन सी दुर्घटना हमारी अंतरात्मा को जगायेगी ? इस यक्ष प्रश्न के भी जबाब का इंतज़ार है । मेरी मदद करे
सोमवार, दिसंबर 01, 2008
बिना देश के सैनिक है यह आतंकी पूरी तरह से प्रशिक्षित
और हम लोग इसे हमला समझ कर हल्के मे ले रहे है यह हमला बम्ब विस्फोट की तरह आसान नहीं । यह संसद हमले की अगली कड़ी है और आगे बहुत जल्दी इसकी पुनरावर्ती होगी । यदि हमारा खुफिया तन्त्र अभी भी नहीं जागा तो हम चिदम्बरम साहब का भी इस्तीफा देखेंगे बहुत जल्दी ।
हर हिन्दुस्तानी को एक सिपाही बनना पड़ेगा तब हम यह ज़ंग जीत पाएंगे । क्योकि यह जंग अद्रश्य दुश्मनों से है जिनका एक ही उदेश्य है भारत की बर्बादी । हमारी मिडिया जिम्मेदार मिडिया {?} इस जंग मे जो अपनी भूमिका निभा रही है वह देश का मनोबल तोड़ने के लिए काफी है । तरह तरह की नई कहानी पूरे देश को भ्रमित कर रही है । यह काम खुफिया विभाग का है और उसे करने दे उसे समय दे ।
ओर आखिरी बात सबकी जबाबदेही तय हो चाहे वह आम आदमी हो ,नेता हो ,अधिकारी हो ,मिडिया हो ,सरकार हो , धार्मिक नेता हो या कोई भी । क्योकि देश से बड़ा कोई नहीं