गुरुवार, दिसंबर 31, 2009

हे २००९ तुम जाते जाते महंगाई ,आतंक को भी अपने साथ ले जाओ .






नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाये 

ना ना करते हुए भी २००९ में १०० पोस्ट  पूरी हो गयी दरबार की . यह कोई उपलब्धि तो नहीं लेकिन मेरी निरंतरता है .  क्योकि मुझ पर ठप्पा लगा है कोई काम मैं लग कर नहीं कर सकता . बहुत से सपने मेरे पिता ने मेरे लिए देखे होंगे लेकिन मैं भी समझता हूँ आज तक मैं खरा उतरा नहीं . साल दर साल हर नए साल पर प्रतिज्ञा करता हूँ कसम खाता हूँ . लेकिन आज तक पहले हफ्ते में ही सारी कसमे खा जाता हूँ और प्रतिज्ञा तो याद भी नहीं रहती . 

अबकी भी कुछ सोचा है २०१० के लिए . शायद पहले कि तरह वह ना हो जो आज तक हुआ . आमीन 
खैर २०१० की ३१ दिसम्बर को मैं स्वयम विश्लेषण करूंगा और आपको भी बताउंगा . अभी से क्या बताये क्या हमारे दिल में है . 

आखिर में एक प्रार्थना २००९ से -   

   हे २००९ तुम जाते जाते महंगाई ,आतंक को भी अपने साथ ले जाओ

मंगलवार, दिसंबर 29, 2009

नक्कार खाने में तूती बजाते है ब्लागर है लिख कर भूल जाते है

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नक्कार खाने में तूती बजाते है 

ब्लागर  है लिख कर भूल जाते है 

दुनिया भर के दुःख जब देखते है 

तो उन्हें दर्द सहित हम लिखते है 

और लिख कर हम भूल जाते है 

क्योकि ब्लागर है हम  

 नक्कार खाने में तूती बजाते है 



शनिवार, दिसंबर 26, 2009

साबित हो गया एक ही युवा है भारत मे वह है ८५ साल के युवा नरायण दत्त तिवारी -- देखे

युवा 


युवा 


आज चारो तरफ से एक ही आवाज़ आ रही है युवा ही देश को बचा और चला सकते है . इसलिए युवा की परिभाषा और खुद को युवा साबित कराने के लिए युवाचित हरकते कर रहे है अपने ८५ साल के बूढ़े क्षमा करे ८५ साल के जवान युवा नारायण दत्त तिवारी


नारायण दत्त तिवारी के कथित सेक्स स्कैण्डल की स्टिल फोटो
        
       




तो यह कांग्रेस के युवा नेता और ........ और क्या .  राहुल बाबा  राहुल बाबा तो अभी बच्चे है . 

शुक्रवार, दिसंबर 25, 2009

पहले औरत जनती थी आज आदमी जनता है



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आज़ादी  के बाद नए नए शब्द गड़े जाने लगे नयी नयी वस्तुए प्रयोग में आने लगी वनस्पति घी प्रचलन में आ गया . नागरिको को जनता के रूप में शब्द प्रचलित होने लगे . कुछ कवियों ने तो कविताएं भी लिखी उनमे की दो पंक्ति यह है 



पहले घी से सब्जी बनती थी


 अब सब्जी से घी बनता है 




           पहले औरत जनती थी                        


           आज आदमी जनता है  





मंगलवार, दिसंबर 22, 2009

मैं समीर लाल आपको डिस्टर्व तो नहीं किया सुबह सुबह

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sam lalआज सुबह टहल कर वापिस ही लौटे थे और अखवार पढने की कोशिश कर रहे थे तभी मोबाईल बज उठा . देखा तो अनजाने से लम्बे नम्बर से फोन था .  फ़ोन उठाने पर अनजानी सी  मधुर आवाज़ कानो में मिसरी घोलती सी महसूस हुई . उधर से आवाज़ आई मैं समीर लाल आपको डिस्टर्व तो नहीं किया सुबह सुबह . ऐसा लगा जैसे एक उड़नतश्तरी मेरी आँखों के सामने से तेज़ी से गुज़र गयी . 

एक छण विश्वास ही नहीं हुआ . लेकिन पूर्ण चेतन अवस्था में होने के कारण मै समझ गया यह हकीकत है . बातचीत का सिलसिला चल ही पड़ा . कितना अद्बुत समय था वह . परदेश से अपने का फोन एक नई अनुभूति थी मेरे लिए . क्योकि हम ग्रामीण पृष्टभूमि के है और परदेश से ज्यादा संपर्क नहीं है . 

और अब तो ऐसा है कि सात समुन्द्र पार भी अपने परिवार के लोग है . कितना सुखद है कि ब्लॉग के माध्यम से हुआ परिचय रिश्तो में बदल रहा है . और ज्यादतर रिश्ते थोपे जाते है बताये जाते है की यह तुम्हारे यह है यह है . और ब्लॉग में रिश्ते अपने आप बन जाते है कभी भी ना बिछड़ने के लिए . क्योकि इन रिश्तो में लालच नहीं होता है . और लालच रिश्तो में दरार लाता है . 

रविवार, दिसंबर 20, 2009

दुनिया में सबसे बड़ा दुःख क्या है ? बूढ़े बाप के कंधो पर जवान बेटे की लाश

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मैने बचपन से एक आदमी को बहुत मेहनत करते देखा वह रिक्शा चलाता है . जाड़ा , गर्मी ,बरसात उसके लिए कोई मायने नहीं रखती . उसका एक ही धर्म है मेहनत और एक ही प्रसाद है मजदूरी . हाड तोड़ मेहनत के बाद भी उसके चहरे पर कोई शिकन नहीं दिखती थी . हमेशा मुस्कराता हुआ दिखा मुझे जब भी मैने उसे देखा . नन्नू लाल है उसका नाम . 


अभी कुछ दिन से मुझे वह नहीं दिखा जो आपको रोज़ मिलता है और ना दिखे तो चिंता तो होती ही है . दो चार दिन बाद नन्नू मुझे दिखा मैने तुरंत उसके गायब रहने का कारण पूछा . तो पहली बार उसकी आँखों में आसूं से दिखे और उसने बताया उसका जवान इकलौता बेटा अचानक मर गया . कैसे क्या वह बीमार था ? नहीं बिलकुल तो भला चंगा था एक दर्द सा उठा और सब ख़त्म . रात को दवा दी थी सुबह वह सो कर ही नहीं उठा . सब ऊपर वाले का खेल है ना जाने किस पाप की सजा दी ,इतना कह वह सामान से भरा अपना रिक्शा लेकर चल दिया . 


मैं यह सोचता रह गया खून पसीने की कमाई खाने वाला मेहनत  मजूरी करने वाला नन्नू ने ऐसा क्या पाप किया जिसकी उसे सजा मिली .  उस बेचारे  पर तो पाप करने का टाइम ही नहीं था जिन्दगी में . और जो पाप में  आकंठ तक डूबे है उनेह तो आज तक सजा मिलती नहीं दिखी . क्या ऐसे हादसे पाप पुण्य के कारण होते है ? 
बेचारे नन्नू लाल को अपने साथ हुई ईश्वर की नाइंसाफी को जायज ठहराने का एक वाक्य मिल गया पाप की सजा

रविवार, दिसंबर 13, 2009

हैलो मै बी .एस .पावला बोल रहा हूँ भिलाई से और धीरू भाई मैं महफूज

हैलो मै बी .एस . पावला बोल रहा हूँ भिलाई से . जैसे ही मोबाईल उठाया उधर से आवाज़ आई . एक क्षण अनजानी सी मधुर आवाज़ जानपहचान सी लगने लगी . अरे पावला जी नमस्कार नमस्कार , यह एक फोन काल थी मुझे बधाई देने को मेरी शादी की साल गिरह पर .कितना अपनापन  खूब बात हुई . ब्लोगिंग से एक नया रिश्तेदार मिला .

थोड़ी देर में फिर घंटी बजी अब उधर से आवाज आई धीरू भाई मैं महफूज  . एक अनजानी आवाज़ फिर से अपनी सी लगने लगी . और एक नया रिश्ता जुड़ गया .

दोनों लोगो को पहचानने में मुझे देर नहीं लगी और उनकी आवाज़ के साथ उनकी तस्वीर मेरे जेहन में तैरती रही जैसे कितने दिनों से पहचान है . यह बाकया जब मैने घर पर सुनाया तो मेरे पापा जी को बहुत ख़ुशी हुई .

ब्लोगिंग से रिश्ते भी बन रहे है ऐसा होता है मैने जिया है .

शनिवार, दिसंबर 12, 2009

ईश्वर से प्रार्थना कीजिये मुझे शक्ति दे यह कष्ट सहने की और दो मिनट का मौन मुझे शांति प्रदान करने के लिए

अगर मुझे उमर कैद भी होती आज रिहा हो जाता क्योकि १४ -१५ साल में अच्छे चाल चलन को देखते हुए कानून भी दया कर देता है . लेकिन लम्हों की  खता सदियों तक उठानी पढ़ती है . और अपने यहाँ तो सात जन्मो का साथ का प्रचलन है . अगर यह सातवाँ फ़ाइनल जन्म है तो सिर्फ १५ साल ही तो कटे है अभी तक . और अपने यहाँ शता: जीवेत का भी चक्कर है . ना जाने कितने साल और ..............

ईश्वर से प्रार्थना कीजिये मुझे शक्ति दे यह कष्ट सहने की और दो मिनट का मौन मुझे शांति प्रदान करने के लिए { जीते जी } वैसे गलती मैने खुद की सजा भी खुद भुगतुगा .

ख़ैर १५ साल तक का कष्ट सहते सहते अब कष्ट कष्ट नहीं लगता . लेकिन आज़ादी छिनने का कष्ट तो महसूस होता ही है .  

शुक्रवार, दिसंबर 04, 2009

सेकुलर को हिन्दी में क्या कहेंगे ?- धर्मनिरपेक्ष या पंथनिरपेक्ष

सेकुलर को हिन्दी में क्या कहेंगे ?

धर्मनिरपेक्ष या पंथनिरपेक्ष

वैसे भारत के संविधान में सेकुलर शब्द को पंथनिरपेक्ष लिखा गया है . कृपया जबाब दे यह कोई पहेली नहीं है एक प्रश्न है जो कई समस्याओं का हल हो सकता है जो सुडो सेकुलर को जबाब दे सकता है .

सेकुलर के नाम पर हो रहे व्यभिचार को रोकना ही मकसद है .

बुधवार, नवंबर 25, 2009

६ दिसम्बर का नंगा सच - चश्मदीद की जुबानी

क्या निहत्ते गैर प्रशिक्षित आन्दोलन कारी इतने मजबूत ढाचे को बिना औजारों के मटियामेट कर सकते थे . नहीं कभी नहीं यही आपके अन्दर से निकलेगा . सन ९२ में जब रामजन्मभूमि आन्दोलन चरम पर था उस समय मेरे पिताजी संसद सदस्य थे उनेह संसद के अंदर कुछ कांग्रेसी सांसदों ने कहा हमारे बुड्ढे [ नरसिंह राव ] ने कहा है आराम करो घर बैठो चुनाव जीतो ६ दिसम्बर  के बाद यह बी जे पी वाले सडको पर पीटेंगे . जनता इनेह कहीं का नहीं छोड़ेगी .

बात आई गई हो गई . मज़ाक में बात चली लेकिन इस बात की सच्चाई ६ दिसम्बर को ही पता चली .

अयोध्या में कार सेवको की भारी भीड़ उमड़ी . गैर विवादित चबूतरे को सरयू के जल से धोने के लिए . तमाम नेता ,पत्रकार वहां पहले ही पहुच गए . मंच पर नेताओ का जमघट लगा था भाषण बाज़ी शुरू हो चुकी थी . उसी समय कुछ पत्रकारों ने कार सेवको से पुछा कितने रूपय रोज़ पर लाये गए हो एक विदेशी पत्रकार ने सेंड विच फेका और कुछ कहा . कारसेवक उद्धेलित हो गए और पत्रकारों की ठुकाई कर दी गई .

सांकेतिक कारसेवा चालु हुई तभी अचानक कुछ लोग गुम्बद पर चढ़ गए . नेताओ के चेहरे पर भाव बदलने लगे लेकिन लगा की पहले की तरह उत्साह में लोग चढ़ गए है और उतर जायेंगे . मंच से नीचे उतरने की अपील की जाने लगी लेकिन कोई नहीं सुन रहा था . उमा भारती ने हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया . अडवानी जी , स्व. राजमाता सिंधिया , जोशी जी , संघ प्रमुख शेषाद्री जी ने कारसेवको से रुकने की अपील की लेकिन कोई मानने को तैय्यार नहीं था . तभी अचानक एक हल्का विस्फोट हुआ और एक गुम्बद गिर गया . स्थति हाथ  से निकल गई थी . लोगो का जोश चरम पर आ गया . मंच से ही अडवानी जी ने कल्याण सिंह से फ़ोन पर बात की और कहा जो हुआ सो  हुआ गोली नहीं चलनी चाहिए . और गोली नहीं चली .

मेरे पिताजी उस समय उस मंच पर मौजूद थे . अचानक उनेह अपने साथी कांग्रेस सांसद की वह बात याद आगई जो उसने कहा था क़ि हमारे बुड्ढे ने इंतजाम कर दिया है . और यह था इंतजाम शरद पवार तत्कालीन रक्षा मंत्री के सौजन्य से . प्रशिक्षित लोगो द्वारा उस ढाचे को तकनिकी के माध्यम से ढा दिया . षड्यंत्र का पहला चरण तो पूरा हो गया दूसरा चरण यह था राज्य सरकार गोली चलवाए और उसमे सैकड़ो कार सेवक मारे जायेंगे सारा इलज़ाम भाजपा के सर आएगा और जनता का आक्रोश सारे भारत में फैल जाएगा भाजपा के नेता सडको पर पिटते और भाजपा हमेशा के लिए ख़त्म

इस पूरे प्रकरण में भाजपा क़ि स्थिति रपट गए तो हर हर गंगे वाली हो गई . भाजपा के हाथ से एक मुद्दा हाथ से निकल गया अब वह ढाचा भी नहीं रहा जिसको दिखा दिखा कर वह हिन्दुओ को पटा पाते . उस समय भाजपा के  नेताओ पर अपनी चार  सरकार जाने का ज्यादा गम था . उसके बाद आज तक भाजपा जुगाड़ तुगाड़ से तो सरकार बना पायी लेकिन अपने बूते पर नहीं . यह मुद्दा खत्म हो गया था ६ दिसम्बर ९२ को .

लेकिन कांग्रेस लिब्राहन आयोग के द्वारा इस मरे मुद्दे को फिर उठा रही है अपनी कमियों को छुपाने के लिए . राजीव गाँधी ने बोफर्स को हल्का करने के लिए शिलान्यास करवाया . नरसिंह राव ने अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए ढाचा तुडवाया और अब मनमोहन सिंह ने महंगाई ,गरीबी , और देश पर आये संकट को छुपाने के लिए राम जन्म भूमि के विवाद को फिर आगे कर दिया .

और भाजपा व सपा इसमें भी राजनीती की सम्भावना खोज रहे है . किसी मुस्लिम को शायद ही जय श्री राम से इतनी आपत्ति नहीं होंगी जितनी मुस्लिम वोटो के चाहत में सपा को है . कांग्रेस ने तो  हड्डी फेक दी है और कुछ समय के लिए तो वह ज्वलंत मुद्दों को ढकने में कामयाब हो ही गई है .

रविवार, नवंबर 22, 2009

गे और लेस्बियन का इलाज़ योग द्वारा करेंगे बाबा राम देव

बाबा राम देव की जय हो आज तो बाबा ने कमाल कर दिया . बाबा ने आज इण्डिया टी. वी . पर आपकी अदालत में अपनी बात सुश्री सम्भावना सेठ और सुश्री कश्मीरा शाह से कही . बात का स्तर इतना गिर गया की चैनल बदलना पड़ा . बाबा भी लाजबाब हो गए दोनों हूरों से बात कर . सेक्स ,सम्लेंगिकता ,कंडोम जैसे विषयो पर बाबा का आत्म विश्वास और उनके चेहरे पर आये भाव और मुस्कान एक अलग ही कहानी ब्यान कर रहे थे .

हमेशा चर्चा में रहने को आतुर यह तीनो एक दूसरे पर वार करते रहे . सम्भावना सेठ के कई प्रश्नों पर बाबा खिस्याई हसी में टाल गए . एक सवाल बाबा आप तो योगी हो सेक्स के बारे में कैसे जानते हो ? बाबा सिर्फ हें हें हें . और फिर सम्भावना ने कहा एक गाना लगा दीजिये मैं नाचूंगी अगर बाबा भी खुश होकर ताली ना बजाये तो मेरा नाम नहीं . बाबा हें हें हें .

और सबसे ज्यादा जोर समलैंगिकता पर हुआ . बाबा ने दावा किया वह योग द्वारा समलैंगिकता की आदत को दूर कर सकते है . बेचारा योग उसे यह भी दिन देखने को मिला . बाबा के अपने दावे और रक्कासाओं के अपने . आगे और देखने की इच्छा नहीं हुई चैनल बदल दिया . वैसे एक नया अनुभव प्राप्त हुआ कि चर्चित रहने के लिए योगी और भोगी एक ही रस्ते चलते है .

गुरुवार, नवंबर 19, 2009

महंगाई महंगाई हाय हाय महंगाई

क्या 

ऐसा 

हो 

सकता 

कि

हम 

महंगाई 

पर 

भी 

कुछ 

सोचे 

और भी गम है जमाने में 

माना

लेकिन 

महंगाई 

जला कर राख कर देगी 

हम को भी 

और आप को भी शायद 

महंगाई महंगाई हाय हाय महंगाई 

मंगलवार, नवंबर 17, 2009

आओ चीन से भी कुछ सीखे

कभी अफीमचियों का देश चीन अपने अदम्य इच्छा शक्ति से एक शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में परिवर्तित हो गया . आज चीन की ताकत के  आगे अमरीका भी नतमस्तक हो गया . तिब्बत को चीन का अंदरूनी मसला कह बराक ओबामा ने चीन की वन चाइना पोलिसी का समर्थन कर दिया . 

कभी चीन की सुरक्षा दीवार बनने के तुरंत बाद चंगेज खान ने चीन को लूट कर चीन की कमजोरी को जग जाहिर किया था आज वही चीन इतना समर्थ हो गया की हर देश उसके सही गलत फैसलों को सिर्फ और सिर्फ सही बता रहे है . 

चीन हमारा शत्रु देश है उसको मजबूत करने में हमारा भी बहुत बड़ा योगदान है उसकी अर्थव्यवस्था को सुद्र्ण बनाने में हम ही आगे है . हम उसके उत्पादन के सबसे बड़े उपभोक्ता है . हम अपने पैसे से उसे ताकत दे रहे है और वह हमें आँखे दिखा रहा है . 

दूसरी ओर हम वैभव शाली इतिहास को साजो कर रखने वाले ,सपनो में जीने वाले ,अपने को श्रेष्ट समझने वाले गौरवशाली  भारतीय चीन के आगे कहीं टिक ही नहीं पा रहे है . हम आज तक दुनिया से नहीं कहलवा पाए कश्मीर हमारा अंदरूनी मामला है . हमें चीन से कुछ सीखना ही चाहिए . कैसे अपने जीवट से दुनिया को झुका पाए . और यह गलत भी नहीं राम ने रावण को मारने के समय भी उसके ज्ञान का लाभ उठाया . लक्ष्मण को रावण से शिक्षा ग्रहण करवाई . 

आइये चीन से कुछ सीखे क्योकि आज की तारीख में वह हमसे ज्यादा शक्तिशाली है हर  क्षेत्र में चाहे वह अर्थ व्यवस्था  हो , देश प्रेम हो या अपनी मातृ भाषा के प्रति उसका प्रेम हो या कुछ और 


गुरुवार, नवंबर 12, 2009

क्या हम ब्लॉगरो का समाज के प्रति कोई कर्तव्य है या नहीं - क्यों हम महंगाई और गरीबी के खिलाफ खडे नहीं होते

एक तूफ़ान उठा और मडरा कर चला गया . मुम्बई बची गुजरात बचा . अच्छा हुआ बबाल टला . प्रक्रति की उठा पटक तो रुक गयी लेकिन यह आप्रक्रतिक बबंडर जो पुरे भारत में मडरा रहा है . कब थमेगा पता नहीं . खासकर हमारे ब्लोगजगत पर भी एक तूफ़ान सा उठता रहता है . विवाद तो हमारी पहचान बनते जा रहे है .

किस्से कहानियों , शायरी ,चुटकले ,पहेलियों के बाद बेकार के झगडो में हम लोग फस चुके है . अपनी ऊर्जा को हम जाया कर रहे है . हिन्दू और मुस्लिम धर्म का छिद्रान्वेष्ण जितना हम लोगो  ने किया है शायद ही किसी ओर माध्यम में हुआ हो . दुनिया भर की कमिया घर बैठे निकाल देते है . नकारात्मकता का एक माहोल बना रखा है हमने . कौन से दिशा में भटक रहा है यह ब्लॉग जगत .

हम गडे मुर्दे उखाड़ लेते है , हम मुर्दों  को गोबर सुंघा कर जिन्दा करने की कोशिश करते है . मुर्दा मतलब विवाद . मै भी कोई दूध का धुला नहीं मैने भी इस नाले में चाहे अनचाहे गोते खाये  है .

मुझे नहीं लगता कोई सकरात्मक दिशा की ओर हम कदम उठाते है . महंगाई , गरीबी के बारे में हम नहीं सोचते शायद हम पर यह चीजे फर्क  नहीं डालती है .लेकिन यही दो चीजे नक्सलवाद को बढावा दे रही है.  एक अराजकता को क्रान्ति का नाम देकर गरीबो की भावनाओ से खिलवाड़ कर जो राष्ट्रविरोधी माहोल बन रहा है उसके दोषी भी हम ही है क्योकि इनके कारणों को हम अनदेखा कर रहे है .

हम ब्लोगरो की एक लम्बी चोडी फौज है . जो इतनी दम रखती है अपनी आवाज से दिल्ली को हिला सकती है . किसी चौराहे पर बैठे १०० लोग भी अपनी आवाज़ सरकार तक पंहुचा देते है ओर हम तो दस हज़ार है ओर सब सक्षम सब सामर्थ्य वान तो क्यों  ना हम गरीब ,कमज़ोर ,दबे कुचले ,किसान ,झुग्गी झोपडे के इंसान की आवाज़ बने . उनके बारे में भी सोचे .

इस सब में हमारा भी हित है क्योकि अगर यह गरीब तबका थोडा भी संतुष्ट हुआ तो तथाकथित क्रांति के नाम पर जो अराजकता फैल रही है उसकी धार  शायद थोडी कुंद हो . अगर ऐसा नहीं हुआ तो इस अराजकता के सबसे बड़े  शिकार हम जैसे दिमागी खटपट करने वाले होंगे क्योकि हम है ही इस के जिम्मेदार ..

  

मंगलवार, नवंबर 10, 2009

सपा सफा हो गई ,भाजपा विदा हो गई और कम्युनिष्ट हरी झंडी लाइन सफा - सुहाग नगरी ने सुहाग की त्यागी सीट पर सुहागन को भी नही बैठने दिया



उप चुनाव ने तो कहर ढा दिया . सपा सफा हो गई ,भाजपा विदा हो गई और कम्युनिष्ट हरी झंडी लाइन सफा . सबसे खतरनाक यह हुआ महंगाई को साँसे मिल गई क्योकि कांग्रेस आई महंगाई लाई . और माया ममता छाई

लेकिन जनता तो चक्रव्यूह से निकल ही नहीं पाती उसकी तो नियति ही है चक्कर में पड़े रहना . जनता ने इस चुनाव में विधानसभाओ में तो उत्तर प्रदेश को छोड़ सब जगह सत्ता को करारा तमाचा रसीद किया . ३१ साल का लाल शासन के शासको का चेहरा लाल कर दिया . बंगाल और केरल तो हिल ही गया लग रहा है . हिमाचल में नेताओ की  बीबियों को टिकिट नहीं दिया तो अपनी सीटे दूसरी पार्टियों को जितवा दी . धन्य हो

उत्तर प्रदेश में तो कमाल ही हो गया चुप मायावती ने बड़बोले लोगो की जुवान  पर ताला लगा दिया . इसे कहते है हाथी की चाल .

और एक लोक सभा की सीट का हाल फिरोजाबाद सुहाग नगरी ने सुहाग की त्यागी सीट पर  सुहागन को भी नही बैठने दिया . धरतीपुत्र की अपनी धरती ने ही अनदेखी की अनोखी सजा दी जो जीवन भर मुलायम सी चुभन  दिल में होती रहेगी . आखिर कितने पारिवारिक लोग जनता की सेवा करेंगे तो उनकी सेवा कौन करेगा इसलिए जनता ने उनका आग्रह ठुकरा दिया और जनादेश दे दिया बहू घर पर रह परिवार की देख रेख करे हमारी सेवा के लिए आप इतने लोग तो हो ही .

फिरोजाबाद की जीत ना तो राहुल गाँधी की है ना राज बब्बर की . यह हार है मुलायम सिंह की ,उनकी पार्टी की ,उनके परिवार की , उनके घमंड की , और उनके सलाहकारों की .

सोमवार, नवंबर 09, 2009

वन्देमातरम ,मराठी हिन्दी जैसे विवाद प्रायोजित है क्योकि महंगाई पर ध्यान ना जाए

वन्देमातरम , मराठी , हिन्दू मुस्लिम जैसे विवाद या कहे रोज़ एक नया विवाद और उस पर चर्चा में जो वक्त जाया करा जा रहा है या कहे कराया जा रहा है  . कभी सोचा क्यों ? यह एक षड्यंत्र सा है जो हम आदमी को वह नहीं सोचने देता जिस पर चर्चा बहुत जरुरी है .

महंगाई सुरसा सा मुहं फाड़े खड़ी है . कोई उस और ध्यान ना दे इसलिए रोज़ एक नया विवाद . बेकार का विवाद - चीन के सैनिको ने घुसपैठ की , दलाई लामा की अरुणाचल यात्रा , देश की सीमा पर संकट , अल कायदा का अगला निशाना, कोडा के कारनामे  और ना जाने क्या क्या . और अब १० -१५ दिनों के लिए राज ठाकरे .

सिर्फ एक मकसद है इन विवादों के पीछे की जनता या कहे आम आदमी महंगाई और मूलभूत समस्याओ को भूल जाए उसका ध्यान ही ना पड़ने दिया जाए इन ज्वलंत विषयों पर . सत्ता पक्ष अपनी चालो पर कामयाब हो रहा है और हमारा नाकारा विपक्ष जो विपक्ष कहलाने के लायक भी नहीं वह अपने रास रंग में मस्त है क्योकि महंगाई की तपिश  उनके घर में महसूस नहीं होती .

इसी देश में जब विपक्ष की नेता इंदिरा गाँधी थी तो सिर्फ सोने और प्याज की महंगाई का रोना रो कर सत्ता में आ गई . उनके बाद उन्ही की पार्टी ने बीजेपी की राज्य सरकारे प्याज की महंगाई में धो डाली . और आज का विपक्ष महंगाई की समस्या को मुद्दा ही नहीं बना पा रहा है क्योकि विपक्ष के नेता भी तो सत्ता सुख तो भोग ही रहे है .

डर तो इस बात का लग रहा है अगर आम आदमी महंगाई की तपिश को ज्यादा महसूस नहीं कर पाया और उसके पेट की आग उसके हाथो में पहुच गई तो क्या क्या जलेगा कल्पना भी भयावह है . और यह आग फैलेगी जरुर क्योकि प्रधानमंत्री और कृषि मंत्री कहते है महंगाई अभी कम नहीं होगी .

बुधवार, नवंबर 04, 2009

चचा अंग्रेजो के शुक्रगुजार क्योकि अंग्रेजो ने मुसलमानों से हिन्दुस्तान की कमान ले कर हिन्दुओ को सौंप दी

हमारे ऊपर राज करने वालो में अंग्रेजो  की मानसिक गुलामी आज भी हम कर रहे है . राष्ट्रकुल खेल इसी का तो प्रमाण है .राष्ट्रकुल यानी अंग्रेजो के गुलाम देशो का समूह . जो आज भी अपने को धन्य मानते है की अंग्रेजो ने हम पर उपकार किया हमें दुनिआवी तहजीव सिखाई . तरक्की के रस्ते दिखाए .

ऐसे ही एक हमारे चचा है इंग्लेंड रिटर्न . अगर आज अंग्रेज राज कर रहे होते तो निश्चित ही उनेह राय बहादुर या राय साहेब से नवाजते . उनकी आस्था आज भी अंग्रेजो के  प्रति अगाध है . उनका यह पागल पन कभी कभी निरुत्तर कर देता है वकौल उनके हमें अंग्रेजो का शुक्रगुजार होना चाहिए . क्यों ? पूछने पर उनका रिकार्ड चालु हो जाता है .

चचा पूछते  है और याद भी दिलाते है अंग्रेज जब भारत में आये तो किस्से उन्होंने राज छीना . कुछ बोलने से पहले ही बोल उठे बादशाह बहादुर शाह जफ़र से . यानी यानि  क्या तुम तो ऐसे गाली देते हो जैसे अंग्रेजो ने प्रथ्वी राज चौहान से राज छीना . मतलब क्या मतलब यह की अंग्रेजो ने मुसलमानों से हिन्दुस्तान की कमान ले कर हिन्दुओ को सौंप दी .नहीं तो जजिया देते देते अब तक हिन्दुओ का नामोनिशान मिट जाता .

अब इस चचा का क्या करू एक नयी बहस को जन्म दे दिया चचा ने . चलिए इस बहस पर भी तलवार भाँज ले .

सोमवार, अक्तूबर 26, 2009

खर्चा उठाने को तैयार हो तो विजेता घोषित किया जायेगा ब्लॉग श्री , ब्लॉग भूषण ,ब्लॉग विभूषण और ब्लॉग रत्न

ब्लागर बनते हो इलाहाबाद से बुलावा आया नहीं और हमें कह रहे हो ब्लॉग लिखता हूँ . भाड़ में जाओ तुम और तुम्हारा ब्लॉग . पता चल गई अपनी औकात खाली टाइम खोटी करते हो . ऐसी कुछ आवाज़ कई लोगो के अंदर से निकल रही होगी शायद .

अब ब्लोगरो में दो खेमे है एक जो इलाहाबाद से बुलावा पाए और दूसरे वह जो ठुकराए . वैसे सब को बुलावा आ भी जाता तो उतने ही जाते जितने वहां पहुचे . बाकी तो सिर्फ मुँह गलत ही फुलाए बैठे है .

मैने तो ऐसी अंतर राष्ट्रीय समारोह सुने है जिसमे आयोजको के आलावा लोग ही नहीं पहुचते . लोग घर बैठे ही राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय जर्नल छाप देते है . यह विद्या सरकारी विश्वविध्यालय के लोगो को बहुत अच्छी तरह से आती है .

कोई बात नहीं अब हम  लोग एक पुरस्कार  समारोह रखेंगे जिसमे ब्लॉग श्री , ब्लॉग भूषण ,ब्लॉग विभूषण और ब्लॉग रत्न बाटे जायंगे . पुरस्कार विजेताओ को खर्च उठाना पड़ेगा और पुरस्कार वितरण के लिए एक नामी हस्ती जैसे पूर्व राज्यपाल , लेखक या आलोचक कि व्यवस्था भी विजेताओ को खुद ही करनी पड़ेगी .

यदि मेरा विचार सही लगे तो अपने सुझाव आपस में बाटे .

शुक्रवार, अक्तूबर 16, 2009

हिन्दू खोजन मैं गया हिन्दू ना मिलाया कोय जब हिन्दू ना मिला तो हिंदुत्व कहाँ से होय

हिन्दू ! हिन्दू ! हिन्दू !. हिन्दू कमजोर है ! हिंदुत्व खतरे में !. लेकिन अब हिन्दू कहाँ है . हिन्दू थोड़े दिनों में अजायबघर कि किसी अलमारी में धूल खाता दिखेगा . मैने हिन्दू को खोजने कि कोशिश की मुझे तो नहीं मिला शायद आपको कहीं हिन्दू मिले तो सूचना दे .

मेरी एक खोज हिन्दू के लिए शुरू हुई मुझे ब्राह्मण .क्षत्रिय ,वैश्य ,जाट, यादव ,गुजर्र ,जाटव ,बाल्मीकि ,धोबी ,नाई, आदि आदि तो मिले लेकिन हिन्दू ना मिले . जब हिन्दू को और खोजा तो इन के भी टुकड़े मिले कोई साढ़े सात घर का कोई बारह घर का . ,कोई सूर्यवंशी ,चन्द्र वंशी , कोई खमरिया कोई घोसी लेकिन हिन्दू नहीं मिला .

 एक किस्सा बहुत याद आ रहा है एक ब्राह्मण और पठान में दोस्ती थी पठान बोला यार पंडित तुम तो रोज़ दावत छकते हो कभी हमें भी ले चलो . पंडित जी बोले मौका लगने दो . एक कथा कि दावत में ब्रह्म भोज का न्योता आया . पंडित जी ने पठान को धोती पहनाई ,तिलक लगाया ,जनेऊ पहनाया और समझाया कोई पुछे कौन बामन हो तो कहना गौर . दोनों खुश  होकर चल दिए . पंगत में बैठ गए तभी पड़ोस के दूसरे ब्राह्मण पठान से बोले पंडित जी कौन से गाँव से आये है उसने तुंरत बता दिया .फिर पूछा कौन ब्राह्मण है पठान बोला गौर . दूसरे ब्राह्मण ने फिर सवाल किया कौन से गौर . पठान एक साथ बोल उठा या खुदा गौर में भी कोई और

यह किस्सा हिन्दुओ और हिंदुत्व को आइना दिखाने को काफी लगता है .

हिंदुत्व एक वट वृक्ष है और जातियाँ उसकी शाखाएँ और उपजातियां शाखाओ के पत्ते . आज हम वृक्ष को पानी ना लगा कर उसके पत्तो को पानी दे रहे है और थोडा बहुत शाखाओ को लेकिन पेड़ कि जड़ को कोई पानी नहीं दे रहा इसलिए पेड़ कमजोर हो रहा है . और कमजोर पेड़ पर दीमक लग रही है . 


अगर हम अभी भी ना चेते तो अपनी अपनी शाखाएँ[टहनियां ] लिए घूमेंगे . और हिंदुत्व रूपी पेड़ की लकडी चिता जलाने के काम तो आएगी . ............

 सोचे ...............विचारे ...............फिर मुझे  जो घोषित करना हो करे .

हिन्दू खोजन मैं गया हिन्दू ना मिलाया कोय
जब हिन्दू ना मिला तो हिंदुत्व कहाँ से  होय



बुधवार, अक्तूबर 14, 2009

चिपलूनकर जी सिर्फ एक बात कि हिंदुत्व का ठेका संघ , भाजपा या शिवसेना का नहीं है

चिपलूनकर जी जब मैं चल नहीं पाता था तब पिता की गोद में संघ की शाखा जाता था . जब बोलना सिखा तो पहले कुछ स्पष्ट शब्दों में नमस्ते सदा वत्सले मातृ भूमे था . जब दूसरी कक्षा में था तब पहला शिविर में गया . सायं शाखा का मुख्य शिक्षक था .  आई टी सी ,ओ टी सी किया . सरस्वती शिशु मंदिर और विद्या मन्दिर में पढाई की .

आपको व पढने वालो को लग रहा होगा मैं यह सब लिख  कर क्या कहना चाहता हूँ . सिर्फ एक बात कि हिंदुत्व का ठेका संघ , भाजपा या शिवसेना का नहीं है . और हिंदुत्व पर कोई विपदा भी नहीं है . आज आपका लेख राज ठाकरे कि चर्चा में हिंदुत्व को घसीटा जाना कुछ अच्छा नहीं लगा .

जब तक हिंदुत्व इन तथाकथित पालनहारों से दूर नहीं हटेगा तब तक साम्प्रदायिक ही कहलायेगा . आज तक किसी हिंदुत्व के पुरोधा को यह कहते नहीं सुना जब तक राम लला का मन्दिर नहीं बनेगा तब तक वह भी टेंट में रहेगा . राम लला को बेघर कर सिर्फ इलेक्शन में ही उनकी कुटिया का ध्यान आता है .

चिपलूनकर जी अगर हिन्दू और मुस्लिम पर आधारित राजनीती चलती होती तो हिन्दू महासभा और मुस्लिम लीग के आलावा कोई नहीं होता सत्ता में .

हिंदुत्व कि उलटी माला जपते जपते भाजपा कहाँ पहुच गई है यह किसी से नहीं छुपा है . शायद २२ तारीख को आसूं पुछे लेकिन आपका लेख घोषित कर रहा है कि मुंबई का सपना सपना ही रह जाएगा .

मंगलवार, अक्तूबर 13, 2009

राष्ट्रीय समाचार पत्र का उदघाटन और कोकटेल पार्टी

दो चार दिन पहले हमारे शहर से एक राष्ट्रीय समाचार पत्र प्रकाशित होना शुरू हुआ . उससे एक फायदा हमें हुआ कि हमारे पुराने छपने वाले अखवारो की कीमत आधी रह गई . हमारे खर्चो में कटौती हो गई . अभी तक का फायदा आम पाठक को हुआ है कल यह अखवार वाले फिर मिल गए तो हमें फिर दुगना देना पड़ेगा . पर जब तक मौज ले ही रहे है .

यह तो हुआ हम जैसो को . औए फायदा तो उन लोगो को हुआ जो उस राष्ट्रीय अखवार के उद्घाटन से पहले कोकटेल पार्टियों में शामिल हुए . बढ़िया शराब बढ़िया मुर्गा बढ़िया डी. जे . . पार्टी में शराब बह रही थी हाकर से लेकर पार्टी में शामिल बिन बुलाये रिक्शे वाले , सड़क छाप प्रशंसक भी शराब का आनन्द लेते हुए इतने मस्त हो गए की डी जे फ्लोर पर ही लोट गए और कुछ लोग इतने धर्मात्मा थे जो पिया वही फ्लोर पर ही निकाल दिया .

ख़ैर उनकी लीला वह जाने अपने बाप का क्या जाता है . अपने को तो एक की कीमत में दो अखवार पढने को मिल रहे है . और एक बात और जितने का अखबार उतने की तो रद्दी हो जाती है . क्यों क्योकि अब अखबार सम्पादक या संम्वादाता नहीं निकालते महा प्रवन्धक और विज्ञापन मनेजर निकालते है .

सोमवार, अक्तूबर 12, 2009

"जो आदमी सम्पूर्ण सल्तनत को आग लगाने की क्षमता रखता था , आज अग्नि ने उसे ग्रास बना लिया "

"जो आदमी सम्पूर्ण सल्तनत को आग लगाने की क्षमता रखता था , आज अग्नि ने उसे ग्रास बना लिया "  यह कहा था नीलम संजीव रेड्डी ने राम मनोहर लोहिया के दाह संस्कार के समय . आज ही के दिन १९६७ को समाजवादी चिंतक लोहिया जी का निधन हुआ था .

राम मनोहर लोहिया जिन्होंने इंग्लेंड की पढाई इसलिए छोड़ दी उनेह उस देश की शिक्षा रास नहीं जिसने उनके देश को गुलाम बना रखा था . बाद में बर्लिन से अपनी पढाई पूरी की . अध्ययन  के दौरान जेनेवा में हुए लीग ऑफ़ नेशंस की कान्स्फ्रेंस में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे बीकानेर के महाराज जो अंग्रेजो ए गुणगान कर रहे थे सीटी बजकर उनका प्रतिरोध किया . यह अहिंसक प्रतिरोध लोहिया को मशहूर कर गया .

१९३६ में कांग्रेस के मंत्री की हैसियत से विदेश मंत्री का दायित्व बखूबी निर्व्हान किया . भारत की भावी विदेश निति पर लिखी पुस्तक आजाद भारत के स्वतंत्र गुट निरपेक्ष नीति की बुनियाद मानी जा सकती है .

समाजवादी नेता लोहिया ने संसद में गरीबो की वकालत की . इसके लिए उनका संसद में दिया भाषण में कहा देश के ३० करोड़ लोग रोजाना तीन आने रोज़ पर गुज़ारा करते है प्रधानमन्त्री के कुत्ते पर आठ रुपए रोज़ खर्च होते है .

ऐसे राम मनोहर लोहिया को भी हम भुला बैठे . और उनके समाजवाद का झंडा उठाने वाले आज के लोग  समाजवाद की परिभाषा भी नहीं जानते .

{यह लेख आज अखवार में श्री मोहन सिंह द्वारा लिखा पढ़ कर लिखा }

रविवार, अक्तूबर 11, 2009

जयप्रकाश नारायण - सम्पूर्ण क्रांति का जनक जो भुला दिया गया




जयप्रकाश जन्मजात  योद्धा है , उसने अपने देश की मुक्ति के लिए सबकुछ का त्याग किया है । परिश्रम और प्रयत्न करने से वह कभी चूकता नहीं । कष्ट  और यातना सहने की उसकी क्षमता का कोई जवाब नहीं ।

                                                                 - महात्मा गांधी


आज समाजवादी जन परिषद् पर जे . पी के बारे में गाँधी जी के यह विचार पढ़ कर जे . पी . और महात्मा के बीच समानताये कौंधने लगी . महात्मा और जे . पी . ने आज़ादी के लिए निस्वार्थ भाव से संघर्ष किया . बापू तो आज़ादी दिलाने के दो ढाई साल के भीतर दुनिया छोड़ गए . भारत आजाद तो हुआ स्वराज्य कुछ परिवारों का मिला .  बापू का सपना उनके सामने ही टूट गया लेकिन बापू के चेलो ने उनेह पत्थर  और कागजो में तो उकेर ही दिया , इसलिए आज तक बापू की स्मृति है दिमागों में .

बापू की अधूरी आज़ादी जब तानाशाही में बदल गई तभी आज़ादी के योद्धा सर्वोदय नेता  जय प्रकाश नारायण ने १९७४ में गुजरात के नव निर्माण आन्दोलन में युवा और छात्रों के हाथो परिवर्तन की कमान देकर सम्पूर्ण क्रान्ति का बिगुल फूका. जो ६ मार्च १९७५ को जनसंघ के दिल्ली अधिवेशन में आकर सभी लोगो को साथ लेकर चलने का इसदा जताया . और नारा लगा सिंहआसन खाली करो की जनता आती है .

आपातकाल लागु हुआ जे पी का आन्दोलन तेज़ हुआ और सत्ता परिवर्तन के साथ जे पी के चेलो ने सत्ता सम्हाल ली . और जे पी को भूल गए . कितना दुर्भाग्य है जे पी के जिन्दा रहते हुए संसद में जे पी को श्रधान्जली दे दी गई .

गाँधी को तो उनके चेलो ने बुतों में ढलवा दिया लेकिन जे पी के चेलो ने उनेह गुमनामी में चुनवा दिया . जो जे पी भ्रष्टाचार के विरूद्व क्रांति कर बैठे आज उनके कई शिष्य भ्रष्टाचार के आइकोन बन चुके है .

आज उन्ही जय प्रकाश नारायण की जयंती है . हो सके तो उनकी भारत के प्रति बलिदानों को याद किया ही जा सकता है .

.

शुक्रवार, अक्तूबर 09, 2009

लंगोट ,चूहा ,बिल्ली ,गाय ,बाई जी और गुरु चेला

एक पहुचे हुए माहत्मा थे . अपने आश्रम में रहते थे एक बार उनेह तीर्थ यात्रा की सूझी उन्होंने अपने एक चेले को  आश्रम की जिम्मेदारी सौप कर चले गए . चेला आश्रम की साफ़ सफाई में व्यस्त रहा लेकिन एक बात बहुत परेशान करती थी उसका लंगोट एक चूहा काट देता था रोज़ . लोगो की सलाह पर एक बिल्ली पाल ली .

चूहे से तो निजात मिल गई लेकिन बिल्ली बेचारी भूखी रह जाती थी . लोगो की सलाह मिली एक गाय लेलो बेचारी बिल्ली पल जायेगी . गाय आ गई दूध की नदियाँ बहने लगी . अब दूध की चिंता होने लगी . सलाह देने वाले फिर आगे आये . सलाह मिली एक बाई जी ले आओ . बाई जी आ गई दूध का निस्तारण होने लगा . लेकिन बाई जी चेले को भाने लगी . समय के साथ साथ बाई  जी चेले के बच्चो की माँ बन गयी .

उसी समय महात्मा लौट के आये और चेले से पूछा यह सब कैसे हुआ चेला बोला गुरूजी सब लंगोटी का चक्कर है  और क्या

ऐसे ही बात कहां से कहां पहुच जाती है . और आज भी ऐसा ही हो रहा है . बात भी कहाँ से कहाँ तक पहुच रही है .

- वाह भाई वाह

मंगलवार, अक्तूबर 06, 2009

मेरा ब्लॉग न हुआ कूड़ा घर हो गया हो उन्होंने चेलेंज के साथ १३ बार मेरे ब्लॉग पर गंदगी फैलाई

मेरा ब्लॉग न हुआ कूड़ा घर  हो गया या मोहम्मद उमर कैरान्वी को गंदगी फैलाने का इतना शौक हो गया उन्होंने चेलेंज के साथ १३ बार मेरे ब्लॉग पर गंदगी फैलाई यह कह कर -
                
                            Mohammed Umar Kairanvi ने कहा…

13 कमेंटस के बाद आया मैं, 13 को पैदा हुआ, सुना है 13 का अंक बहुत अशुभ होता, मैं 13 को जन्‍म लिया, जिस कुप्रचारी के ब्लाग पर नजर डाली उसके शुभ दिन गये, आज मैं तुझे 13 बार यह कमेंटस दूंगा, अगर तुमने मेरे कमेंटस डिलिट किया तो इतना पेट भर दूंगा कमेंटस से कि सारे कुप्रचारियों को बुला लेना सफाई करने लिये जब भी स्‍वच्‍छ नहीं होपायेगा तेरा दरबार, इन्‍शाअल्‍लाह (अगर अल्‍लाह ने चाहा तो)

signature:
विचार करें कि मुहम्मद सल्ल. कल्कि व अंतिम अवतार और बैद्ध मैत्रे, अंतिम ऋषि (इसाई) यहूदीयों के भी आखरी संदेष्‍टा? हैं या यह big Game against Islam है?
antimawtar.blogspot.com (Rank-1 Blog)

6 अल्‍लाह के चैलेंजसहित अनेक इस्‍लामिक पुस्‍तकें
islaminhindi.blogspot.com (Rank-2 Blog) 




इसको मैं क्या समझू ? मेरी समझ में नहीं आ रहा ऐसा क्या लिखा मैने जो जनाब अपने पैजामे से बाहर आ गए . मैने आज तक न किसी से अपशब्द कहा न ही लिखा . लेकिन एक बात बताना भूल गया मेरा शहर एक बात में और प्रसिद्ध है वह है गाली देने में . हमारे मुहं से गालियाँ स्वतः ही निकलती बिना किसी विचार के . फिर भी मैं सयिमित  हूँ . 


सच में मोहम्मद उमर ने मुझे सोचने पे मजबूर कर दिया मैने जो लिखा था पिछली पोस्ट में वह गलत थी या सही . मैं आज तक इन विवादों में नहीं पड़ा . न ही मेरी ऐसी कोई मंशा है और न ही मेरी सभ्यता है और न ही मेरे खून में यह सब गंदगी . लेकिन मो .उमर की यह टिप्पणी तो ना काबिले बर्दाश्त है . 


Mohammed Umar Kairanvi ने कहा…




मैं ऐसा क्‍या नहीं करता, लेकिन कल तुमने जूतों से साबित करना चाहा था कि केवल हिन्‍दुओं के प्रतीक चिन्‍हों के जूते आ रहे हैं, जब तुम्‍हें बताया कि मुस्लिम के भी आ रहे हैं तो तुमने डिलिट कर दिया था, उससे मैं समझ गया तुम धार्मिक नहीं कुप्रचारी हो, और कुप्रचारियों के लिये मेरा नाम अनजाना नहीं रहना चाहिये, कमेंटस गिन लो 13 हैं कि नहीं या 130 चा‍हते हो डिलिट कर देना,
13 कमेंटस मुझसे पहले 13 उनके बाद, अब आशा करो कि 13 तुम्‍हें कमेंटस करने वाले इनके बाद मिल जायें,
सांकल लगालो मुफत का मशवरा है

सोमवार, अक्तूबर 05, 2009

मेरा धर्म महान और तुम्हारा धर्म शैतान

मैं महान 


मेरा धर्म महान 


मेरा भगवान् महान 


और 


तुम शैतान 


तुम्हारा धर्म शैतान 


तुम्हारा भगवान् शैतान 


ऐसा ही कुछ हो रहा है आजकल . कुछ ब्लोगर कसम खाए बैठे है सब कुछ छोड़ कर धर्म का अनाचार  ,भावनाओ का बलात्कार कर रहे है . और हम लोग जाने अनजाने खेमो में बट रहे है . बस बहुत हुआ अभी बहुत जिन्दा है हिन्दू मुस्लिमो में जहर घोलने वाले समाज में . हम क्यों पाप के भागी बन रहे है .

बोलने और लिखने की आज़ादी का दुरूपयोग हो रहा है . आइये इसकी भर्त्सना करे हो सके तो इन महानुभावो का सामाजिक वहिष्कार करे .

शनिवार, अक्तूबर 03, 2009

मनेका गाँधी के संसदीय जिले में बकरा देता है दूध

पशु प्रेम के लिए विख्यात मनेका गाँधी के संसदीय क्षेत्र के जिले में  बकरे ने इतना अपार स्नेह पा कर दूध देना शुरू कर दिया . यह मज़ाक नहीं सत्य है .


 प्राप्त जानकारियों के अनुसार ग्राम चन्दऊ के रेवती राम का बकरा एक बार में २५० ग्राम तक दूध देता है . और जांच कराने पर दूध की क्वालिटी भी ठीक निकली है .और खास बात बकरे की प्रजनन शक्ति भी काफी अच्छी है . 


ख़ैर इस क्या कहेंगे  यह आप ही जाने . 







शुक्रवार, अक्तूबर 02, 2009

गाँधी जयंती पर एक और सत्याग्रह - चीन उत्पादित वस्तुओ का बहिष्कार

आज से ही हमें एक सत्याग्रह करना है वह है चीन की बनी वस्तुओ का वहिष्कार . जहाँ तक हो सके कोशिश करे की चीन उत्पादित वस्तुओ का प्रयोग न करे . यही नहीं सरकार को भी रोक लगानी चाहिए आयात पर क्योकि चीन का मुकाबला हम इसी हथियार से कर सकते है .

चीन की शैतानी चाले आज कश्मीर के हिन्दुस्तानियों  को अलग पहचान दे रही है . अरुणाचल पर कब्जे की कोशिश हो रही है . और हम किस डर से अपनी बात नहीं रख पा रहे है समझ नहीं आ रहा .

साम्यवादी चीन अब पूरी तरह से व्यापारिक चीन है और हम एक बहुत बड़ा बाज़ार . यह सत्य है की व्यापारी कितना भी बड़ा हो ग्राहक को नाराज़ नहीं कर सकता .

 इस तथाकथित ड्रेगन के प्राण इसके उन हथियारों में नहीं जो इसने कल दिखाए  . इसके प्राण है उसकी अर्थव्यवस्था में जो हम आसानी से संकट में डाल सकते है . और उसका फायदा हमें उठाना ही चाहिए आज गाँधी जयंती पर संकल्प ले की चीन उत्पादित वस्तुओ का प्रयोग न करे .

गुरुवार, अक्तूबर 01, 2009

२ अक्टूबर - आज का नंगा सच

 हेलो बापू
कैसे है आप ? आप की कृपा से हम लोग तो बहुत मौज से है । आपका जन्मदिन आ ही गया समझो ,कल  है । बहुत बिजी हूँ आपके जन्मदिन पर होने वाली छुट्टी को कैसे सेलिव्रेट करू यह सोअच कर । आपके जन्मदिन पर होने वाली पूरी छुट्टी यह बताती है की आपने जरुर कुछ अच्छे से काम किये होंगे । काश ऐसे आप जैसे ४ या ५ लोग और हो जाते तो छुट्टी और मिलती ।
बापू एक बात समझ में नहीं आती उस दिन ड्राई डे क्यों होता है ,बहुत परेशानी होती है । पहले से ही इंतजाम करना पड़ता है पिछले साल बहुत परेशानी हुई थी ।
यह है मन की बात जो अधिकांश लोगो के मन में उमड़ रही होगी । यह सच है की अगर सार्वजानिक अवकाश न हो तो २ अक्टूबर का इंतजार कोई न करे । आखिर अभी कल या परसों हम लोग शहीद भगत सिंह का जन्मदिन याद नहीं रहा क्यिंकि उस दिन छुट्टी नहीं होती।
यह सच है नंगा सच और सच के सिवा कुछ नहीं । हम भूल चुके है बापू को .लाल बहादुर शास्त्री को , और इसके जिम्मेदार हम खुद है ।
कहा जाता है  अपने बुजर्गो को भूलने वाली कौमे बहुत जल्दी भुला दी जाती है


सोमवार, सितंबर 28, 2009

दिखावे के लिए ही रावण को मार कर दशहरा मनाते है

  हर साल की तरह दशहरा इस बार भी निभा  ही लिया


  एक बार फिर  रावण  मार कर जश्न  मना  ही  लिया 


  लेकिन दिलो में बसे रावण को हम साल भर पालते है 


  क्योकि अपनी लंका को सोने की बनाने को जो ठानते है 


  और साल में एक बार अपने दिलो को सकूं देने के लिए 


 दिखावे के लिए ही रावण को मार कर दशहरा मनाते है 

शुक्रवार, सितंबर 18, 2009

आपबीती - काश हम वी आई पी न होते तो आज मेरी माँ मेरे साथ होती

वी आई पी यह एक तमगा है जो शान की बात लगती है . जहाँ जाईये सबसे आगे क्योकि वी आई पी जो ठहरे . एक बार मुंबई से दिल्ली आते समय हवाई जहाज में इसलिए कम्फर्ट नहीं मिला  क्योकि उसमे जे क्लास नहीं था पुराना बोइंग था और उसमे जे क्लास नहीं थी . हवाई जहाज उड़ने में देर थी कई अभिनेता और बड़े आदमी लोंबी में टहल रहे थे और हम आराम से वी वी आई पी लाउंज में बैठे आराम कर रहे थे क्योकि हम आखिर वी आई पी थे उस समय .

दिल्ली में लुटियन के बंगलो में आराम से रहे हम . ए.सी . की कूलिंग कम लगती तो नया बदलवा देते थे आखिर सरकार के दामाद हुआ करते थे . जिस समय क्वालिटी आइस क्रीम की ब्रिक ५० रु की थी तब हमे मात्र १४ रु की मिलती थी . २.५० रु की थाली ,१० रु का बटर चिकन वाह वाह , क्या दिन थे भाई आखिर वी आई पी थे उस समय . जब लोग नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर धक्के खाते थे तो हम स्टेट एंट्री से सीधे प्लेटफार्म नम्बर  १ तक अपनी गाड़ी से जाते थे .

उसी समय एक झटका लगा और हमें लगा काश हम वी आई पी ना होते . मेरी माँ को थायरोड था और गले में सूजन थी दिल्ली में मिलेट्री अस्पताल में इलाज़ चल रहा था पिता जी एक साथी जो बाद में मुख्मंत्री भी बने मेजर जनरल से रिटायर थे उनके सहायता से वहां इलाज़ चल रहा था . आप्रेस्शन की तारीख तय थी . तभी हमारे यहाँ हमारे यहाँ हमारे प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री आये और उन्होंने कहा की उनके लिए शर्म की बात है की उनकी भाभी का ओप्रेस्शन दिल्ली में हो . आपने साथ वह हमको लखनऊ ले गए और एस.जी .पी .जी.आई में इलाज़ शरू हुआ .

स्वास्थ्य मंत्री तीमारदार ,मुख्यमंत्री समय समय पर हाल चाल ले रहा हो तो कल्पना कर सकते है अस्पताल में क्या स्थति होगी . बड़े सा बड़ा डाक्टर वह काम कर रहे थे जो कम्पौवडर करते है . वही हुआ ओप्रेस्शन के समय अनेस्थिसिया के लिए हेड ऑफ डिपार्टमेंट आये जिन्होंने शायद २० साल से पढाने के आलावा कुछ नहीं किया था . ओप्रेस्शन से पहले ही मेरी माँ की मृत्यु हो गई . वह भी इसलिए हुआ क्योकि हम वी आई पी थे .

आज से ठीक १८ साल पहले आज ही के दिन (२० सितम्बर ) को अस्पताल में ढेरो वी आई पी मेरी माँ के पास खडे थे खाली हाथ . सैकडो लाल नीली बत्ती , सैकडो कमांडो हजारो तमाशबीन गवाह थे की वी आई पी के परिवार को भी मौत आसमयिक उठा ले जाती है और उस समय वी आई पी और लाचार में कोई अंतर नहीं होता .

काश उस समय हम वी आई पी नहीं होते तो वह ओपरेशन छोटा सा डाक्टर भी किसी साधारण से अस्पताल में सफलतापूर्वक कर देता . ख़ैर अब हम आम आदमी है क्योकि वी आई पी बन बहुत कुछ खोया जो हमें फिर कभी वापिस नहीं मिल पाया .

गुरुवार, सितंबर 17, 2009

सरकार के खर्च कटौती प्रस्ताव के पक्ष में मेरा भी योगदान

सूखे के कारण मै भी बचत और सादगी से दिसम्बर तक अपना जीवन बिताने के लिए तैय्यार हूँ आखिर देश की तरक्की में अपना योगदान भी तो देना है . इसलिए मैने खर्चो पर कटौती लगाने के लिए एक रूप रेखा बनाई है शायद आपके भी काम आये - 



  • पिछले १० सालो से मैं विदेश में छुट्टी मनाने का प्लान बनाता था लेकिन इस साल मै यह प्लान नहीं बनाऊंगा . 
  • एक तमन्ना थी परिवार के साथ कभी फाइव स्टार होटल में जाऊ लेकिन बचत के कारण स्थगित . 
  • इस बार सत्यनारायण की कथा का आयोजन करना चाहता था लेकिन सूखे के कारण अब अगले साल तक स्थगित 
  • रिश्तेदारों से कह दिया जाएगा दिसम्बर तक दूर की रिश्तेदारी ही रखे . 
  • बहुत सालो से सपना था की एक कार खरीदू  नैनो यह सपना पूरा करने के करीब थी लेकिन इस साल कार का सपना नहीं देखूंगा . 
  • ऐसे कई सपने जो मै देखता हूँ इस साल नहीं देखूंगा आखिर हम सरकार के कहे पर नहीं चलेंगे तो कौन चलेगा . 

रविवार, सितंबर 13, 2009

लॉन्ग लिव हिन्दी - सेलिब्रेट हिन्दी डे


ओह गोड कल  हिन्दी डे कैसे करे सलेब्रेशन थिंक ? बॉस ने कहा 


सर एक सजेस्शन क्यों न हिन्दी डे  पर एक प्रोग्राम रखे । सेकेट्री ने कहा


गुड वैरी गुड क्या प्रोग्राम करे थिंक ?


एक हिन्दी के रिटाएर टीचर को बुके एंड गिफ्ट प्रेसेंट कर देंगे ,ओल्ड हिन्दी डे के बैनर साफ़ करके लगवा देंगे । आल स्टाफ मीटिंग विथ हाई टी , एंड अ प्रेस रिलीज़ विथ फोटो इससे जायदा हिन्दी डे पर क्या करे 

ओ.के .एक मेरे लिय स्पीच रेड्डी करो उसमे हिन्दी की इम्पोर्तेंस  के बारे में लिखना ।

प्रोग्राम स्टार्ट एंड बॉस स्पीअच बीगन 


रेस्पेक्टेड़ गुरु जी एंड आल ऑफ़ माय कुलीग्स , आज हम हिन्दी डे इव स्लिब्रेशन कर रहे है ,हिन्दी हमारी नेशनल लेंग्वेज ही नहीं हमारी मदर टंग भी है । कितनी ब्यूटी फुल बात है ऑवर चिल्ड्रन रीड हिन्दी । इन द प्रोग्रेस ऑफ़ हिन्दी हमको एवेरी मोंथ हिन्दी डे सलिब्रेट करना चाहिए । बिदआउट हिन्दी हमारी प्रोग्रेस नहीं हो सकती है बी काज इफ वी नॉट रेस्पक्ट ऑवर नेशनल लैंग्वेज वह नेशन को क्या प्रोफिट करेंगे ।
बेल प्रोग्राम में पार्टीस्प्रेट  के लिए थैंक्स ,एंड टेक क्येर । प्लीअज हाई टी वेटिंग यू ।

लॉन्ग लिव हिन्दी   

शनिवार, सितंबर 12, 2009

जुल्म की इन्ताह और ऊपर वाले का इन्साफ

जुल्म की दास्ताने आपने पढ़ी होंगी . महसूस की होंगी लेकिन जुल्म की इन्ताह कैसी होती है उसकी एक बानगी ...

जमींदारो के जुल्मो को अगर लिखा जाए तो एक ब्लॉग बनाना होगा और रोज़ एक पोस्ट भी लिखी तो सालो तक लिखने पर भी जुल्मो की दास्ताँ खत्म न होगी . ऐसे कई जमींदारो से दुर्भाग्य से दूर की रिश्तेदारी भी रही है उनका जुल्म के किस्से सुने और और उनके जुल्मो की सजा उनेह झेलते हुए भी देखा है . 

ऐसे ही एक जमींदार का जुल्म की दास्ताँ है यह . गाँव के तालाब में कुत्ता बैल पानी पिए या निकाले कोई प्रतिवंध नहीं था लेकिन अछूत अगर वह पानी पिने के लिए भर ले तो कयामत आ जाती थी . जानवरों से बदतर जिन्दगी बिताने के लिए ही पैदा होते थे वह बेचारे . 

कभी किसी दयालु ने उनकी बस्ती में एक कुँआ बनबा दिया जिससे पानी तो साफ़ मिल ही जाए उनको . यह जमींदार को नागवार लगी . बेगार न करने पर उनके कुए पर आदमी का मैला डलवा दिया जिससे वह लोग पानी न पी सके . फरियाद कहीं नहीं क्योकि मुंसिफ ही जुल्मी था . मुलजिम था . 

ऐसे कई जुल्म झेल कर वह बेचारे गरीब पैदा से मरने तक का सफर पूरा करते थे . उधर जमींदार सहाब अपनी अय्याशी से भरपूर जिन्दगी बिताने के बाद जब बुडापे में  पहुंचे तो अर्ध विछिप्त हो गए थे क्योकि कहां जाता है स्वर्ग भी यहीं और नर्क भी यहीं . समय के साथ साथ हालात ऐसे हो गए कि जमींदार को आपने खाने में मैला दिखने लगा . और ऐसी दर्दनाक मौत हुई उनकी जिसके वह हक़दार थे   इस कहते है ऊपर वाले का इन्साफ और सही है उसकी लाठी में आवाज़ नहीं होती

मंगलवार, सितंबर 08, 2009

काला पहाड़ - सिर्फ़ कहानी ही नही है यह

सोने की चिडिया को लूटने की मंशा से विदेशी आक्रमणकारी हिन्दुस्तान को रौंधने के लिए सिंध पंजाब की तरफ से आने लगे । सिकंदर आया चला गया । गजनी आया गुजरात तक लूट कर ले गया । चंगेज खान आया । शक आए हूण आए । हलाकू आया . न जाने कितने आए और चले गए लेकिन मुग़ल आए और यही बसने के लिए कोशिश करने लगे उनके लश्कर आगे बड़ने लगे । लूट ,नरसंहार करते हुए एक लश्कर कश्मीर की तरफ बढ़ा ।

कौतहुल वश गाँव के कई युवा छुप कर लश्कर देखने आए । फौज डेरा डाल वहां आराम कर रही थी और उनका खाना बन रहा था । अचानक एक सिपाही उन लड़को के सामने आ गया । और उसने कुछ नही कहा। एक लड़का खुशबु सूंघ कर सिपाही से बोला बहुत बढ़िया महक आ रही क्या पक रहा है । इतना सुन कर सिपाही हसा और बोला अब तुम हिंदू नही रहे क्योकि गाय का मांस पक रहा है और तुमने उसे पसंद किया ।

यह बात आग की तरह फैली और जब वह लड़का गाँव पंहुचा तब पंचायत हुई । और पंचायत ने उसे अलग कर दिया । क्योकि उसने गाय के मांस की तारीफ की । क्षमा याचना का भी असर नही हुआ पंडितो ने भी उसे धर्म से अलग किया । हर धर्म अधिकारी से गुहार यहाँ तक बनारस तक से उस युवक को निराशा मिली ।

वह युवक क्रोधित हुआ और उसने अपमान का बदला लेने के लिए हिंदू धर्म को छोड़ कर मुस्लिम धर्म अपनाया । और बदला लेने के लिए हिन्दुओं का संहार किया । किद्व्नती है उसने अस्सी किलो जनेऊ काटे । और वह काला पहाड़ के नाम से जाना गया ।

यह कहानी है या हकीकत पता नही लेकिन अंधविश्वास , धार्मिक सत्ता और तथाकथित धर्म रक्षको ने अपने देश का सबसे ज्यादा नुक्सान किया । संस्कृति के रक्षा के नाम पर वही गलतियां आज भी दोहराई जा रही है । न जाने कितने काला पहाड़ और बनवायेंगे यह लोग

सोमवार, सितंबर 07, 2009

लल्लू मियाँ ,चेतराम और अब राजनाथ भाजपा वाले

एक थे लल्लू मियाँ , हमारे पड़ोस में काम करते थे पूरी जवानी वहां ही काम किया । फर्नीचर की पोलिश में करने में माहिर थे । बहुत ही हुनरमंद कारीगरों में गिनती थी उनकी । लेकिन एक बात बहुत मजेदार थी उनके साथ अगर उनके सामने बालूशाही नाम की मिठाई का नाम ले दो तो वह आपा खो देते थे । उनकी चिढ थी बालू शाही । हम लोग उनसे जाकर कहते लल्लू मियाँ बालूशाही खाओगे । और लल्लू मियाँ झल्ला जाते थे और घर पर शिकायत करने की धमकी देने लगते थे ।

और दूसरे थे चेतराम जो चौकीदार थे उनकी भी थी एक चिढ थी चचीडा , जो एक प्रकार की सब्जी होती है तुरई से लम्बी । जब भी उन से मज़ा लेना होता था कहते थे आज हमारे यहाँ खाना खाना सब्जी बनी है चचीडा । और चेतराम भी बिदक जाते और हम लोग ताली बजा बजा कर हँसते ।

कम से कम २० साल से ज्यादा हो गए इन बुजर्गो को गए हुए लेकिन इनकी आत्माए आज भी महसूस होती है जब कोई आदमी चिढता है तो मुझे इन दोनों की याद आती है । ऐसे ही एक आदमी की खोज की है वह है राजनाथ

यह है राजनाथ जिन्हें समय से पहले और भाग्य से ज्यादा मिला । पहचाना नही अरे पहचानिये यह भाजपा के डूबते जहाज के भागने के लिए तैयार कप्तान है राजनाथ । राजनाथ की भी एक चिढ है उनकी ही क्यो उनकी पूरी पार्टी की एक चिढ है वह है जिन्ना । जिन्ना नाम सुनते ही बिदक जाते है जैसे लाल कपड़ा देख कर साड़ बिदक जाता है ।

पता नही जिन्ना कब उनके खेत काट ले गए । जिन्ना का जिक्र करते ही उन्होंने अडवानी की बुरी हालत कर दी और बेचारे जसवंत को दरवाज़ा दिखा दिया । और जिन्ना रूपी बाउंसर का सामना करते अपनी पूरी लाइन और लेंथ भुला कर पूरी पार्टी ही बोल्ड हो गई । अबतो भाजपा और राजनाथ के सामने सिर्फ़ जिन्ना जिन्ना जिन्ना और यह सब आउट । क्योकि राजनाथ ने आज कह दिया है जो जिन्ना कहेगा वह बख्शा नही जाएगा

शनिवार, सितंबर 05, 2009

गुरु हो तो ऐसा जय शिक्षक दिवस

हे गुरु जी आज मौका मिला है आपको याद करने का आख़िर शिक्षक दिवस पर भी नही याद करेंगे तो कब करेंगेआख़िर आपने हमें पढ़ा लिखा कर इस लायक किया कि हम इतने लायक बन सके आप के कारणयह मुकाम हासिल किया लेकिन इसके बदले गुरु दक्षिणा हमने हर महीने ट्यूशन फीस के रूप में दी । आपका धेय्य वाक्य आज तक हम अपना रहे है कि बिना धनोबल के मनोबल नही बढ़ता है । यह ब्रह्म वाक्य आज तो सत्य ही प्रतीत होता है ।

हे गुरु जी आप धन्य हो आपने हमें प्रेक्टिकल मेन बना दिया । अगर आप हमारे ज्ञान चक्षु नही खोलते तो हम तमाम किताबी आदर्शो को जीवन में अपना कर किसी कोने में निखद चाकरी भीख निदान जैसा कुछ कर रहे होते ।

हे गुरु जी आप जहाँ भी हो सुखी ही होगे । और मै प्रभु से कामना करता हूँ जब जब जन्म लू आप ही मेरे गुरु बने । जिससे मै इस मतलबी दुनिया में जीने के सभी पैतरे सीख सकू । अगले शिक्षक दिवस तक के लिए आप भी मस्त रहो और मै भी ।

ठीक ही कहा है

गुरु ब्रह्म गुरु विष्णु गुरु देवो महेशरा :
गुरु साक्षात् परमब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः

मंगलवार, सितंबर 01, 2009

वह होनहार था

वह होनहार था . गरीबी में जैसे तैसे पढ़ रहा था उसकी मेहनत रंग लायी अच्छे नम्बरों से इंटर पास किया । आगे की पढाई की इच्छा इतनी प्रबल थी कि लगन देख मजदूर बाप एक जून खा कर भी अपने होनहार को कलक्टर बनाने को तैय्यार हो गया । बड़ी पढ़ाई के लिए शहर भेज दिया गया । एक सपना लिए वह शहर पहुँचा और कालेज में पढ़ाई शुरू की । नया माहौल कुछ रास नही आ रहा था शहरी आबोहवा माफिक भी नही थी ।

तभी एक मुलाक़ात ने उसमे विश्वास भर दिया । यह था रघु भाई एक छात्र नेता जो कमजोर छात्रों का मसीहा से कम नही । होनहार को उसने अपना छोटे भाई सा प्यार दिया और सहायता भी , अच्छे रहने खाने पहनने के लिए मिलने लगा । शिक्षको से भी स्नेह मिला अब पढ़ाई भी अच्छी होने लगी सब को लगता था लड़का नाम रोशन करेगा माँ बाप का ,कालेज का और रघु भैय्या का भी ।

पहले साल कालेज में सबसे ज्यादा नम्बरों से पास हुआ । एक उत्सव सा मना जहाँ होनहार अपने साथियों के साथ रहता था । लेकिन रघु भैय्या उदास थे न जाने क्योँ । सब उन से पूछने लगे तब भी भैय्या कुछ न बोले । होनहार दुखी हुआ उसने रघु से बात की तो उसने कहा की मैं अब ज्यादा दिन जिन्दा नही रह पाऊंगा क्योकि मेरे कुछ दुश्मन मुझे मारना चाहते है । अब तो मेरा मरना निश्चित है लेकिन तुम चिंता न करो अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो ।

बड़े भाई पर परेशानी और छोटा पढाई करे यह कैसे हो सकता था । होनहार ने अपने भाई के लिए कुछ भी करने की कसम खायी और भाई से बचने का तरीका पूछा । भाई ने उसे मना किया लेकिन जिद के आगे हार गया और बताया अगर दुश्मन को कोई मार दे तो वह बच जाएगा । होनहार अपने रघु भैय्या को बचाने के लिए तैयार हुआ एक रिवाल्वर का इंतजाम हुआ और दुश्मन खत्म हो गया और भैय्या की जान बच गई ।

लेकिन होनहार पकड़ा गया और अब वह अपने सपनो के साथ जेल में है और उसके माँ बाप गरीबी के आलावा एक और गम झेल रहे है । और रघु भैय्या एक और होनहार की तलाश में है क्योकि सुपारी लेकर काम भी तो करवाना है ।

रविवार, अगस्त 30, 2009

या खुदा इन नासमझो को कौन समझाए

एक नए मौलाना तकरीर के लिए एक जलसे में गए और धुँआधार तकरीर झाडी । और बाद में पूछा हजरात जलसा आपको समझ आया । लोग हां कर बैठे लेकिन समझ कुछ नही आया । लोगो ने विचार किया अगली बार आधे हां कहेंगे आधे ना ।

मौलाना अगली बार आए और बाद में पूछा हजरात ऐ जलसा आपको समझ आया आधो ने हां कहा और आधो ने न । मौलाना बोले जिन हजरात को समझ आया है वह न समझो को समझा दे । लोग परेशान मौलाना फिर बेब्कुफ़ बना गया । अगली बार तय हुआ सब मना करेंगे ।

मौलाना आए फिर तकरीर की जो लोगो के ऊपर से निकल गई । मौलाना ने फिर पूछा हजरात ऐ जलसा आपको समझ आया । सब ने कहा नही , मौलाना सर पकड कर बोले या खुदा इन नासमझो को कौन समझाए ।

शुक्रवार, अगस्त 21, 2009

भाजपा पर तानाशाही हावी है

जसवंत सिंह की पुस्तक पर उठा विवाद या कहे उठाया गया विवाद बिलकुल ऐसा है जैसे कौआ कान ले गया और हम उसके पीछे दौड़ रहे है पहले कान टटोले बिना . ऐसा क्या लिख दिया जसवंत सिंह ने जिससे सिर्फ भाजपा के पौरुष पर प्रश्न चिन्ह लग गया . बिना पढ़े समझे बेतुके आरोप संघ परिवार की पुराणी खसलत है . जसवंत सिंह ने वही लिखा जो संघ पिछले ६० साल से चीख चीख कर कहता रहा है कि भारत विभाजन का सबसे बड़ा कारण पंडित नेहरू रहे है . और उस समय के सभी नेता जिन्होंने विभाजन का प्रस्ताव पास करा था वह भी कम अपराधी नहीं है चाहे उसमे गांधीजी हो या सरदार पटेल .

बेचारे जसवंत सिंह की किताब क्या अडवानी जी के ब्यान जो जिन्ना की मजार पर दिया था से ज्यादा घातक है . अगर जिन्ना की हकीकत ब्यान करना अपराध है तो जसवंत सिंह को सजा और अडवानी जी को प्रधानमंत्री वेटिंग और नेता प्रतिपक्ष बनाना इन्साफ के साथ दोगलापन नहीं . लगता है भाजपा के बारे में कहागया सत्य है कि वहां पर तानाशाही हावी है

जसवंत सिंह जो भाजपा के संस्थापक सदस्य है को अपमानित करके अलोकतांत्रिक तरीके से भाजपा से निकालना इस बात का प्रमाण है भाजपा में लोकतंत्र नहीं और इस समय के नेताओ में इतनी छमता नहीं वह अपने को साबित करे इसलिए पुराने स्थापित व्यक्तित्व को बेईज्ज़त कर उनेह हटा रहे है या यह कहे बड़ी लाइन तो खीच नहीं सकते लेकिन बड़ी लाइन को मिटा कर अपने को बड़ा साबित करने पर लगे है . और राजनाथ सिंह जैसे बिना धरातल के राष्ट्रीय नेता भाजपा को मिटाने का संकल्प कर चुके है .