शुक्रवार, अक्तूबर 16, 2009

हिन्दू खोजन मैं गया हिन्दू ना मिलाया कोय जब हिन्दू ना मिला तो हिंदुत्व कहाँ से होय

हिन्दू ! हिन्दू ! हिन्दू !. हिन्दू कमजोर है ! हिंदुत्व खतरे में !. लेकिन अब हिन्दू कहाँ है . हिन्दू थोड़े दिनों में अजायबघर कि किसी अलमारी में धूल खाता दिखेगा . मैने हिन्दू को खोजने कि कोशिश की मुझे तो नहीं मिला शायद आपको कहीं हिन्दू मिले तो सूचना दे .

मेरी एक खोज हिन्दू के लिए शुरू हुई मुझे ब्राह्मण .क्षत्रिय ,वैश्य ,जाट, यादव ,गुजर्र ,जाटव ,बाल्मीकि ,धोबी ,नाई, आदि आदि तो मिले लेकिन हिन्दू ना मिले . जब हिन्दू को और खोजा तो इन के भी टुकड़े मिले कोई साढ़े सात घर का कोई बारह घर का . ,कोई सूर्यवंशी ,चन्द्र वंशी , कोई खमरिया कोई घोसी लेकिन हिन्दू नहीं मिला .

 एक किस्सा बहुत याद आ रहा है एक ब्राह्मण और पठान में दोस्ती थी पठान बोला यार पंडित तुम तो रोज़ दावत छकते हो कभी हमें भी ले चलो . पंडित जी बोले मौका लगने दो . एक कथा कि दावत में ब्रह्म भोज का न्योता आया . पंडित जी ने पठान को धोती पहनाई ,तिलक लगाया ,जनेऊ पहनाया और समझाया कोई पुछे कौन बामन हो तो कहना गौर . दोनों खुश  होकर चल दिए . पंगत में बैठ गए तभी पड़ोस के दूसरे ब्राह्मण पठान से बोले पंडित जी कौन से गाँव से आये है उसने तुंरत बता दिया .फिर पूछा कौन ब्राह्मण है पठान बोला गौर . दूसरे ब्राह्मण ने फिर सवाल किया कौन से गौर . पठान एक साथ बोल उठा या खुदा गौर में भी कोई और

यह किस्सा हिन्दुओ और हिंदुत्व को आइना दिखाने को काफी लगता है .

हिंदुत्व एक वट वृक्ष है और जातियाँ उसकी शाखाएँ और उपजातियां शाखाओ के पत्ते . आज हम वृक्ष को पानी ना लगा कर उसके पत्तो को पानी दे रहे है और थोडा बहुत शाखाओ को लेकिन पेड़ कि जड़ को कोई पानी नहीं दे रहा इसलिए पेड़ कमजोर हो रहा है . और कमजोर पेड़ पर दीमक लग रही है . 


अगर हम अभी भी ना चेते तो अपनी अपनी शाखाएँ[टहनियां ] लिए घूमेंगे . और हिंदुत्व रूपी पेड़ की लकडी चिता जलाने के काम तो आएगी . ............

 सोचे ...............विचारे ...............फिर मुझे  जो घोषित करना हो करे .

हिन्दू खोजन मैं गया हिन्दू ना मिलाया कोय
जब हिन्दू ना मिला तो हिंदुत्व कहाँ से  होय



21 टिप्‍पणियां:

  1. यह प्रसंग बहुत पहले सुना था, फिर सुना।

    आपकी चर्चा का विषय जायज है, आज सभी के बीच में हिन्‍दू कहीं खोज गया है, इसमें काफी हद तक हिन्‍दूओं की कमजोरी तो बहुत ज्‍यादा हद तक राजनैतिक वोटों की बंदरबाट कारण है।

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  2. सही है। दीपावली की शुभकामनायें

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  3. सही है.मेरे ब्लॉग rajsinhasan.blogspot.com पर जाएँ और पढें . ' मैं हिन्दू हूँ.

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  4. "हिंदुत्व एक वट वृक्ष है और जातियाँ उसकी शाखाएँ और उपजातियां शाखाओ के पत्ते . आज हम वृक्ष को पानी ना लगा कर उसके पत्तो को पानी दे रहे है और थोडा बहुत शाखाओ को लेकिन पेड़ कि जड़ को कोई पानी नहीं दे रहा इसलिए पेड़ कमजोर हो रहा है . और कमजोर पेड़ पर दीमक लग रही है ."

    बिल्कुल सही!

    दीपोत्सव का यह पावन पर्व आपके जीवन में भी धन-धान्य-सुख-समृद्धि ले कर आए!

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  5. हिंदु कोई व्यक्तिवाचक संज्ञा नही है, ये समुह वाचक संस्कृति है और ये सनातन काल से चली आ रही है,इसे खत्म करने वाले काल का ग्रास बन गये पर ये खत्म नही हुई ये अजश्र धारा है जो निरतर बहती रही है,और बह्ती रहेगी।

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  6. दीपपर्व की अशेष शुभकामनाएँ।
    आपकी लेखनी से साहित्य जगत जगमगाए।
    लक्ष्मी जी आपका बैलेंस, मंहगाई की तरह रोड बढ़ाएँ।

    -------------------------
    पर्यावरण और ब्लॉगिंग को भी सुरक्षित बनाएं।

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  7. सहमत,सौ प्रतिशत,

    आपके और आपके परिवार को दीवाली की बधाई और शुभकामनाएँ

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  8. इन्सानियत को जब हम किसी भी तरह विभाजित करने लगते हैं तो वह इकाई तक विभाजित होती जाती है, वर्गमूल की तरह।

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  9. बहुत सही बात कही .. डालियों को बचाने के लिए जड को सींचना आवश्‍यक होता है !!

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  10. kshama chahta hoon lekin koi ye kahe ya na kahe wo alag baat hai par hindusthan me rahne wala har shakhs hindoo hai chahe wo kisi bhi dharm ya mazhab se wasta rakhta ho.... jahan tak RSS ka nara 'garv se kaho ham hindoo hain' bhi usi hindoo ki or sanket karta hai jise main hindoo samajh raha hoon. aashcharya ki aapko hindoo nahin dikhte lekin mujhe hinduon ke alawa bharat me kuchh aur nahin dikhta. koi ped khud nahin kahta ki wo neem hai ya bargad, ye to dunia tay karti hai...

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  11. हिंदुत्व एक वट वृक्ष है और जातियाँ उसकी शाखाएँ और उपजातियां शाखाओ के पत्ते . आज हम वृक्ष को पानी ना लगा कर उसके पत्तो को पानी दे रहे है और थोडा बहुत शाखाओ को लेकिन पेड़ कि जड़ को कोई पानी नहीं दे रहा इसलिए पेड़ कमजोर हो रहा है . और कमजोर पेड़ पर दीमक लग रही है .

    सहमत,सौ प्रतिशत,पर करें क्या? कोई उपाय बताएँ.

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  12. रौशनियों के इस मायाजाल में
    अनजान ड़रों के
    खौ़फ़नाक इस जंजाल में

    यह कौन अंधेरा छान रहा है

    नीरवता के इस महाकाल में
    कौन सुरों को तान रहा है
    .....
    ........
    आओ अंधेरा छाने
    आओ सुरों को तानें

    आओ जुगनू बीनें
    आओ कुछ तो जीलें

    दो कश आंच के ले लें....

    ०००००
    रवि कुमार

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  13. जब हिन्दू मिला तो हिंदुत्व कहाँ से होय.nice

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  14. इस दीपावली में प्यार के ऐसे दीए जलाए

    जिसमें सारे बैर-पूर्वाग्रह मिट जाए

    हिन्दी ब्लाग जगत इतना ऊपर जाए

    सारी दुनिया उसके लिए छोटी पड़ जाए

    चलो आज प्यार से जीने की कसम खाए

    और सारे गिले-शिकवे भूल जाए

    सभी को दीप पर्व की मीठी-मीठी बधाई

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  15. आपके विचार से १००%सहमत | आपने सही व भावपूर्ण बात कही है |

    दीवाली की शुभकामनाएँ |

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  16. जब हिंदुस्तान ही नहीं है तो हिंदू कहां से मिलेगा जी:)

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  17. विचारणीय है आपकी पोस्ट ......... सत्य लिखा है .......... में आपको इस लेख के लिए राष्ट्रवादी कहूँगा .........

    ये दीपावली आपके जीवन में नयी नयी खुशियाँ ले कर आये .........
    बहुत बहुत मंगल कामनाएं .........

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  18. अगर कहीं से मिले तो रजनीकांत शास्त्री की पुस्तक " हिन्दू जाति का उत्थान और पतन :" पढ़ें ।

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  19. आपने बहुत गम्भीर और सार्थक बात कही है।
    ( Treasurer-S. T. )

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आप बताये क्या मैने ठीक लिखा