मंगलवार, नवंबर 17, 2009

आओ चीन से भी कुछ सीखे

कभी अफीमचियों का देश चीन अपने अदम्य इच्छा शक्ति से एक शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में परिवर्तित हो गया . आज चीन की ताकत के  आगे अमरीका भी नतमस्तक हो गया . तिब्बत को चीन का अंदरूनी मसला कह बराक ओबामा ने चीन की वन चाइना पोलिसी का समर्थन कर दिया . 

कभी चीन की सुरक्षा दीवार बनने के तुरंत बाद चंगेज खान ने चीन को लूट कर चीन की कमजोरी को जग जाहिर किया था आज वही चीन इतना समर्थ हो गया की हर देश उसके सही गलत फैसलों को सिर्फ और सिर्फ सही बता रहे है . 

चीन हमारा शत्रु देश है उसको मजबूत करने में हमारा भी बहुत बड़ा योगदान है उसकी अर्थव्यवस्था को सुद्र्ण बनाने में हम ही आगे है . हम उसके उत्पादन के सबसे बड़े उपभोक्ता है . हम अपने पैसे से उसे ताकत दे रहे है और वह हमें आँखे दिखा रहा है . 

दूसरी ओर हम वैभव शाली इतिहास को साजो कर रखने वाले ,सपनो में जीने वाले ,अपने को श्रेष्ट समझने वाले गौरवशाली  भारतीय चीन के आगे कहीं टिक ही नहीं पा रहे है . हम आज तक दुनिया से नहीं कहलवा पाए कश्मीर हमारा अंदरूनी मामला है . हमें चीन से कुछ सीखना ही चाहिए . कैसे अपने जीवट से दुनिया को झुका पाए . और यह गलत भी नहीं राम ने रावण को मारने के समय भी उसके ज्ञान का लाभ उठाया . लक्ष्मण को रावण से शिक्षा ग्रहण करवाई . 

आइये चीन से कुछ सीखे क्योकि आज की तारीख में वह हमसे ज्यादा शक्तिशाली है हर  क्षेत्र में चाहे वह अर्थ व्यवस्था  हो , देश प्रेम हो या अपनी मातृ भाषा के प्रति उसका प्रेम हो या कुछ और 


5 टिप्‍पणियां:

  1. हम उससे भी अधिक शक्तिशाली बन सकते हैं बशर्ते कि हम फिर से गुलामी की ज़जीरों को हाथों, पैरों और गले में पहनने के लिए तैयार हों! क्या हम इसके लिए राज़ी है कि भेड-बकरी की तरह हांके जांय?

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  2. सही कहा आपने...हमें अपनी छोटी छोटी समस्याओं पर समय ख़राब न कर देश और इसकी प्रगति के बारे में सोचना चाहिए...चीन से ही क्यूँ हर उस देश से जिसमें अच्छाईयाँ हैं सीखना चाहिए हमें...
    नीरज

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  3. आज के माहौल में शायद ये मुमकिन नही ........... हम जिस तरह से बटे हुवे हैं .... जिस तरह से हमारा व्यक्तिगत स्वार्थ सबसे आगे रहता है ...... वो इस दिशा में आगे बढ़ने ही नही देगा ..... हमारे देश का नेतृत्व ऐसा होने नही देगा .....

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आप बताये क्या मैने ठीक लिखा