गुरुवार, अप्रैल 07, 2016

अब और नहीं - अब और नहीं

बहुत हुआ 
बहुत सहा 
अब और नहीं 
अब और नहीं 

समय आ गया 
बन दावानल 
प्रचण्ड आक्रमण 
अब यही सही 
अब यही सही 

रौद्र रूप से उठो 
ज्वालामुखी से तपो 
अस्मिता का प्रश्न है 
अब आगे बढ़ो 
अब आगे बढ़ो 

मंगलवार, दिसंबर 08, 2015

लौट के आना ही होगा

आसान राहे अपनों से अपने को दूर कर देती है  . यही हो रहा है ब्लॉग के साथ, फेसबुक के आसान व्यवहार से अपने द्वारा पालित पोषित ब्लॉग दूर हो गया।  लेकिन पहला प्यार भुलाया नहीं जाता इसलिए आज फिर से अपने ब्लॉग का हाल देखने आ गए जिसे हम भुला देने की स्थिति में आ गए थे।

 देख कर अच्छा लगा आज भी ब्लॉग की मशाल रोशन है। हम जैसे नालयक गैर हाज़िर है पर बहुत से ऐसे लायक लोग है जो नियमित है।  मै कोशिश करूंगा ब्लॉग पर नियमितता बनाये रखू।  जाते हुए साल पर इरादा है की सप्ताह में एक पोस्ट जरूर लिखू और रोज़ कम से कम ५ ब्लॉग का भर्मण करु।

तो अपनी बात पर खरा उतरने के लिए उतावला हूँ।  कल से नियमित रहूंगा यह वादा है।


शुक्रवार, जून 05, 2015

आज फिर तुम पर प्यार आया है .....

सबकुछ तो नहीं बहुत कुछ खो कर बैठा हूँ . विस्थापित हुआ लेकिन लौटा तो उसी जगह जहाँ से चला था . दुनिया गोल है साबित हुआ . इन कुछ सालो में जिंदगी ने बहुत सबक दिए ,सबक ऐसे जो सिखा गए कि आगे क्या करना है क्या नहीं . 
किस्मत पर मुझे भरोसा न था लेकिन किस्मत ने ओ मुझे नचाया अब यकीन कर लिया किस्मत होती है . और हम कठपुतलिया है जिनकी डोर किसी और के हाथ में है . कह कुछ भी ले लेकिन हम से करवाया जाता है हम कुछ करते है यह हमारा भ्रम है . 

आज यहाँ आये है और कोशिश करूंगा रोज यहाँ आऊ . वैसे भी ब्लागिंग  के लिए कभी कहा गया था यह ठलुओ का काम है और आज मुझ से ज्यादा ठलुआ कोई नहीं . इसलिए अपना ठलुआ धर्म निभाऊंगा . 

मंगलवार, दिसंबर 09, 2014

२०१४ तुम याद रहोगे हमेशा

सन २०१४ अब जाने को ही है।  इस  २०१४ का विश्लेषण करे तो  बहुत उथल पुथल का रहा मेरे लिए। कई बेआवाज़ लाठियों  की चोट सहनी  पडी।  सब कुछ लूट  गया लेकिन अपने परिवार का साथ और शुभचिंतको का आशीर्वाद फिर से एक नए आयाम पर पहुचायेगा ऐसा अटूट विश्वास है।  जब वह दिन नहीं रहे तो यह दिन भी नहीं रहेंगे।  

२०१४ ने बहुत कठिन परिक्षा ली मेरी। पीठ पर लगे खंजर चुपचाप सह गया क्योकि कातिल का नाम अगर लूंगा तो बदनाम भी तो मै  ही हूँगा।  खैर समय जो न कराये वह थोड़ा है।  अपना शहर छोड़ दूसरे शहर में बसे और उस शहर ने हमें स्वीकारा ही नहीं।  लौट के  बुद्धू  घर को आये वाली कहावत चरितार्थ हो रही है।  

लेकिन ऐसा भी नहीं २०१४ ने मुझे कुछ दिया नहीं।  ऐसा सबक सिखाया कि  दुनियादारी समझ आ गई।  २०१४ में ही एक आपरेशन ने मेरी जिंदगी आसान कर दी।  जिंदगी और मौत का फासला कम हो रहा था पर आपरेशन ने उस फैसले को बड़ा दिया ऐसा डाक्टरों का कहना है।  

खैर जाते हुए साल से कोई शिकवा नहीं और आते हुए साल से यह गुजारिश कि सब शुभ हो सबका भला हो और कैसे भी हो अच्छे दिन जरूर आये।  

शुक्रवार, अगस्त 29, 2014

क्या चिटठा जगत और ब्लोगवाणी की कमी खल रही है हिन्दी ब्लॉगिंग को ?

आज से फिर से ब्लॉग पर समय देना प्रारम्भ किया है। सौभाग्य से  गणेश चतुर्थी का दिन है आज।  आज कई पुराने ब्लागों पर गया।  फेसबुक और ट्विटर के दौर में पोस्ट पढ़ने के बाद like का बटन तलाशा।

एक साथ ब्लॉग ताप ठंडा क्यों पड़ गया यह शोध का विषय हो सकता है।  फेसबुक और ट्विटर ने ब्लॉग को मृतप्राय तो कर ही दिया।  मैंने बहुत सोचा तो हिंदी ब्लॉगिग को सबसे बड़ा नुक्सान चिटठा जगत और ब्लॉगवाणी के असमय बंद होने से सब से ज्यादा हुआ।  आपस की राजनीति ने सर्वश्रेष्ठ ब्लॉग एग्रीगेटर को बंद करा दिया।

वरिष्ठ ब्लागरो से अनुरोध है वह भी नियमित होकर ब्लॉग की मशाल जलाये रखे।  एक दिन ब्लॉग फिर वही पुराने वैभव में आएगा ऐसा मेरा मानना है।



शुक्रवार, जून 06, 2014

मेरा कृष्ण मुझ से रूठ गया

मै
अर्जुन
गांडीव की प्रत्यंचा
खीचना भूल गया
क्योकि
मेरा
कृष्ण
मुझसे से रूठ गया
कलयुग के आरम्भ में
अत्याचार के विरुद्ध
पांचजन्य का गर्जन
गीता का ज्ञान
कृष्ण का आदेश
सर्वोपरि था
वर्तमान में
परिवार का मोह
माया का मारीच
प्राथमिकता  हो गया
मैं
अर्जुन
अपने कृष्ण
को भूल गया
और मेरा कृष्ण
मुझसे रूठ गया