शनिवार, अप्रैल 25, 2020

कोरोना से मुलाकात

कोरोना से मुलाकात

सोशल डिस्टेंस मैंटेन रखते हुए आज  कोरोना से मुलाकात की और दरखास्त की महाराज अब तो पीछा छोड़ो। 

कोरोना बोला अबे तुझे बहुत परेशानी है मुझसे। मुझे तो लोग एक उत्सव की तरह एंजॉय कर रहे है घर घर पकवान बन रहे है मैं भी सोशल मीडिया फॉलो करता हूँ। 

मैने कहा हूजूर आप भरे पेट वालो को देख रहे हो उन भूखे लाचार लोगो की भी सोचो

कोरोना हँसा और बोला अबे तूने कहीं भूख देखी मैं भी न्यूज चैनल देखता हूँ वहाँ सिर्फ मेरी बातें है या हिन्दू मुसलमान है या मरी हुई चुहिया को गोबर सूंघा कर जिंदा कर फिर मारने की कोशिश चल रही है। कोरिया चीन की बात हो रही है। तुझे कहीं भूख की खबर दिखी। अबे बेबकूफ मत बना मेरी आड़ में तुम लोग अपनी अपनी कमियां छुपा रहे हो। 

मैने कहा हुजूर बड़े लोगो की नाराजगी हम जैसे लोगो पर क्यो उतार रहे हो। 

कोरोना एक बार जोर से हँसा फिर एक बार और जोर से हँसा और बोला बड़े लोगो से नाराज होकर मरना है क्या मुझे।

शनिवार, जनवरी 04, 2020

डर

प्रधानमंत्री आवास योजना से मिले घर मे सौभाग्य योजना के बल्ब के उजाले में उज्ज्वला योजना की गैस पर बनी चाय पीते हुए आदमी अगर CAA से डरा हुआ है तो समझिये नासूर बहुत गहरा है। अफवाह अपना काम कर गई है। और उस अफवाह को हवा देने का काम किया है उन लोगो ने जिन्होंने कहा था CAB हिन्दू राष्ट्र के लिए पहला कदम है। 
सूत न कपास जुलाहों में लठमलट्ठा

शुक्रवार, जनवरी 03, 2020

अन अल हक्क

अन अल हक्क की बात कहने पर मंसूर अल हल्लाज जो एक  तसव्वुफ( सूफी)थे को सन 922 में खलीफा अल मुक्तदर ने सूली चढ़वा दिया था। क्योकि अन अल हक्क की बात इस्लाम विरोधी है। 
आज मोदी का विरोध के लिए इस्लाम का विरोध हो रहा है। और कोई कुछ नही कह रहा है। 
हिन्दू तो ऐसी कौम है जिसे कोई सर्दी गर्मी नही लेकिन इस्लाम भी अगर सेक्युलर हो गया तो क्या होगा वैसे भी चौहदवीं सदी चल रही है। 
नास्तिक लोग मुसलमानों के बीच में घुस कर मोदी की आड़ में इस्लाम का नुकसान कर रहे है। 
और इस्लाम के मानने वाले कौआ कान ले गया के शोर पर कौवा के पीछे दौड़ रहे है कान नही टटोल रहे। खैर उन्हें अक्ल आएगी लेकिन तब तक इस्लाम को जो नुकसान होने है वह हो चुका होगा।

गुरुवार, जनवरी 02, 2020

ताज उछाले जाएंगे

असहिष्णु 
वंदेमातरम को राष्ट्रीय गीत बनाते समय कुछ पंक्तियों को एक धर्म के हिसाब से उचित नही मान कर उस गीत की शुरू की नौ पंक्तियां ही शामिल की गई थी। आपत्ति इस बात पर थी उसकी एक पंक्ति में प्रतिमा स्थापना की बात थी।  
सहिष्णु
आजकल एक फैज के एक गीत पर जिसमें बुत उखाड़े जाएंगे और एक धर्म का शासन होगा पर आपत्ति है तो उस पर चर्चाएं हो रही है। ताज उछालो किसी को आपत्ति नही लेकिन धर्म निरपेक्ष राज्य में एक धर्म का राज हो यह आपत्ति जनक है। 
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इन बेकार की बहस से बहुत कुछ पर्देदारी है। एक नूरा कुश्ती सी है। कोई तो है जो रोज एक नया नैरेटिव सैट कर रहा है और कोई उसे हवा दे रहा है।

शुक्रवार, नवंबर 15, 2019

गुदड़ी के लाल

गुदड़ी के लाल
गाँव गरीब में पले बढ़े कुछ होनहार अपने परिश्रम संघर्ष और योग्यता से वह सब हासिल कर लेते है जो चांदी का चम्मच मुँह में पैदा लिए लोग के लिए एक सपना है।
लेकिन बड़े लोगो की गिद्ध दृष्टि इन होनहारों पर होती है वह येन केन प्रकरेण उन होनहारों को अपने में शामिल करना चाहते है किसी भी कीमत पर।
एक गरीब परिवार का बेटा अपने हुनर से विश्वपटल पर छा जाता है। सफल व्यक्ति के साथ रिश्ता जोड़ने की चाहत बड़े बाबू साहब लोग अपनी बेटी के स्टेटस के लिए उन्हें अपना जवाई बनाने के लिए जाल फेंकते है और बड़े घर की बेटी गरीब घर की बहू बन जाती है कौन सा उस परिवार से सम्बन्ध रखना है। बेचारा वह होनहार इस चक्रव्यूह में फंस कर अपनी सुद्धबुद्ध खो बैठता है। और वह उस अंत को प्राप्त होता है जिसका वह हकदार कतई नही था।
यह वशिष्ठ नारायण सिंह के साथ हुआ जो अपना मानसिक संतुलन खोने के बाद खत्म हो गए और कुछ दिन पहले एक IPS सुरेंद्र नाथ दास ने जहर खा कर आत्महत्या कर ली ।
मृगतृष्णा में सब दौड़ रहे है दोषी सब है।

शनिवार, अगस्त 31, 2019

लो हम आ गए

तुमने बुलाया हम चले आये
भाई अजय झा जी #झा जी कहिन के कहने पर . समय के साथ साथ बहुत कुछ भूल गए ब्लाग के बारे में . समय फिर सिखा देगा