एक तूफ़ान उठा और मडरा कर चला गया . मुम्बई बची गुजरात बचा . अच्छा हुआ बबाल टला . प्रक्रति की उठा पटक तो रुक गयी लेकिन यह आप्रक्रतिक बबंडर जो पुरे भारत में मडरा रहा है . कब थमेगा पता नहीं . खासकर हमारे ब्लोगजगत पर भी एक तूफ़ान सा उठता रहता है . विवाद तो हमारी पहचान बनते जा रहे है .
किस्से कहानियों , शायरी ,चुटकले ,पहेलियों के बाद बेकार के झगडो में हम लोग फस चुके है . अपनी ऊर्जा को हम जाया कर रहे है . हिन्दू और मुस्लिम धर्म का छिद्रान्वेष्ण जितना हम लोगो ने किया है शायद ही किसी ओर माध्यम में हुआ हो . दुनिया भर की कमिया घर बैठे निकाल देते है . नकारात्मकता का एक माहोल बना रखा है हमने . कौन से दिशा में भटक रहा है यह ब्लॉग जगत .
हम गडे मुर्दे उखाड़ लेते है , हम मुर्दों को गोबर सुंघा कर जिन्दा करने की कोशिश करते है . मुर्दा मतलब विवाद . मै भी कोई दूध का धुला नहीं मैने भी इस नाले में चाहे अनचाहे गोते खाये है .
मुझे नहीं लगता कोई सकरात्मक दिशा की ओर हम कदम उठाते है . महंगाई , गरीबी के बारे में हम नहीं सोचते शायद हम पर यह चीजे फर्क नहीं डालती है .लेकिन यही दो चीजे नक्सलवाद को बढावा दे रही है. एक अराजकता को क्रान्ति का नाम देकर गरीबो की भावनाओ से खिलवाड़ कर जो राष्ट्रविरोधी माहोल बन रहा है उसके दोषी भी हम ही है क्योकि इनके कारणों को हम अनदेखा कर रहे है .
हम ब्लोगरो की एक लम्बी चोडी फौज है . जो इतनी दम रखती है अपनी आवाज से दिल्ली को हिला सकती है . किसी चौराहे पर बैठे १०० लोग भी अपनी आवाज़ सरकार तक पंहुचा देते है ओर हम तो दस हज़ार है ओर सब सक्षम सब सामर्थ्य वान तो क्यों ना हम गरीब ,कमज़ोर ,दबे कुचले ,किसान ,झुग्गी झोपडे के इंसान की आवाज़ बने . उनके बारे में भी सोचे .
इस सब में हमारा भी हित है क्योकि अगर यह गरीब तबका थोडा भी संतुष्ट हुआ तो तथाकथित क्रांति के नाम पर जो अराजकता फैल रही है उसकी धार शायद थोडी कुंद हो . अगर ऐसा नहीं हुआ तो इस अराजकता के सबसे बड़े शिकार हम जैसे दिमागी खटपट करने वाले होंगे क्योकि हम है ही इस के जिम्मेदार ..
Thursday, November 12, 2009
क्या हम ब्लॉगरो का समाज के प्रति कोई कर्तव्य है या नहीं - क्यों हम महंगाई और गरीबी के खिलाफ खडे नहीं होते
Tuesday, November 10, 2009
सपा सफा हो गई ,भाजपा विदा हो गई और कम्युनिष्ट हरी झंडी लाइन सफा - सुहाग नगरी ने सुहाग की त्यागी सीट पर सुहागन को भी नही बैठने दिया
उप चुनाव ने तो कहर ढा दिया . सपा सफा हो गई ,भाजपा विदा हो गई और कम्युनिष्ट हरी झंडी लाइन सफा . सबसे खतरनाक यह हुआ महंगाई को साँसे मिल गई क्योकि कांग्रेस आई महंगाई लाई . और माया ममता छाई
लेकिन जनता तो चक्रव्यूह से निकल ही नहीं पाती उसकी तो नियति ही है चक्कर में पड़े रहना . जनता ने इस चुनाव में विधानसभाओ में तो उत्तर प्रदेश को छोड़ सब जगह सत्ता को करारा तमाचा रसीद किया . ३१ साल का लाल शासन के शासको का चेहरा लाल कर दिया . बंगाल और केरल तो हिल ही गया लग रहा है . हिमाचल में नेताओ की बीबियों को टिकिट नहीं दिया तो अपनी सीटे दूसरी पार्टियों को जितवा दी . धन्य हो
उत्तर प्रदेश में तो कमाल ही हो गया चुप मायावती ने बड़बोले लोगो की जुवान पर ताला लगा दिया . इसे कहते है हाथी की चाल .
और एक लोक सभा की सीट का हाल फिरोजाबाद सुहाग नगरी ने सुहाग की त्यागी सीट पर सुहागन को भी नही बैठने दिया . धरतीपुत्र की अपनी धरती ने ही अनदेखी की अनोखी सजा दी जो जीवन भर मुलायम सी चुभन दिल में होती रहेगी . आखिर कितने पारिवारिक लोग जनता की सेवा करेंगे तो उनकी सेवा कौन करेगा इसलिए जनता ने उनका आग्रह ठुकरा दिया और जनादेश दे दिया बहू घर पर रह परिवार की देख रेख करे हमारी सेवा के लिए आप इतने लोग तो हो ही .
फिरोजाबाद की जीत ना तो राहुल गाँधी की है ना राज बब्बर की . यह हार है मुलायम सिंह की ,उनकी पार्टी की ,उनके परिवार की , उनके घमंड की , और उनके सलाहकारों की .
लेबल:
कम्युनिष्ट,
भाजपा,
सपा
Monday, November 09, 2009
वन्देमातरम ,मराठी हिन्दी जैसे विवाद प्रायोजित है क्योकि महंगाई पर ध्यान ना जाए
वन्देमातरम , मराठी , हिन्दू मुस्लिम जैसे विवाद या कहे रोज़ एक नया विवाद और उस पर चर्चा में जो वक्त जाया करा जा रहा है या कहे कराया जा रहा है . कभी सोचा क्यों ? यह एक षड्यंत्र सा है जो हम आदमी को वह नहीं सोचने देता जिस पर चर्चा बहुत जरुरी है .
महंगाई सुरसा सा मुहं फाड़े खड़ी है . कोई उस और ध्यान ना दे इसलिए रोज़ एक नया विवाद . बेकार का विवाद - चीन के सैनिको ने घुसपैठ की , दलाई लामा की अरुणाचल यात्रा , देश की सीमा पर संकट , अल कायदा का अगला निशाना, कोडा के कारनामे और ना जाने क्या क्या . और अब १० -१५ दिनों के लिए राज ठाकरे .
सिर्फ एक मकसद है इन विवादों के पीछे की जनता या कहे आम आदमी महंगाई और मूलभूत समस्याओ को भूल जाए उसका ध्यान ही ना पड़ने दिया जाए इन ज्वलंत विषयों पर . सत्ता पक्ष अपनी चालो पर कामयाब हो रहा है और हमारा नाकारा विपक्ष जो विपक्ष कहलाने के लायक भी नहीं वह अपने रास रंग में मस्त है क्योकि महंगाई की तपिश उनके घर में महसूस नहीं होती .
इसी देश में जब विपक्ष की नेता इंदिरा गाँधी थी तो सिर्फ सोने और प्याज की महंगाई का रोना रो कर सत्ता में आ गई . उनके बाद उन्ही की पार्टी ने बीजेपी की राज्य सरकारे प्याज की महंगाई में धो डाली . और आज का विपक्ष महंगाई की समस्या को मुद्दा ही नहीं बना पा रहा है क्योकि विपक्ष के नेता भी तो सत्ता सुख तो भोग ही रहे है .
डर तो इस बात का लग रहा है अगर आम आदमी महंगाई की तपिश को ज्यादा महसूस नहीं कर पाया और उसके पेट की आग उसके हाथो में पहुच गई तो क्या क्या जलेगा कल्पना भी भयावह है . और यह आग फैलेगी जरुर क्योकि प्रधानमंत्री और कृषि मंत्री कहते है महंगाई अभी कम नहीं होगी .
महंगाई सुरसा सा मुहं फाड़े खड़ी है . कोई उस और ध्यान ना दे इसलिए रोज़ एक नया विवाद . बेकार का विवाद - चीन के सैनिको ने घुसपैठ की , दलाई लामा की अरुणाचल यात्रा , देश की सीमा पर संकट , अल कायदा का अगला निशाना, कोडा के कारनामे और ना जाने क्या क्या . और अब १० -१५ दिनों के लिए राज ठाकरे .
सिर्फ एक मकसद है इन विवादों के पीछे की जनता या कहे आम आदमी महंगाई और मूलभूत समस्याओ को भूल जाए उसका ध्यान ही ना पड़ने दिया जाए इन ज्वलंत विषयों पर . सत्ता पक्ष अपनी चालो पर कामयाब हो रहा है और हमारा नाकारा विपक्ष जो विपक्ष कहलाने के लायक भी नहीं वह अपने रास रंग में मस्त है क्योकि महंगाई की तपिश उनके घर में महसूस नहीं होती .
इसी देश में जब विपक्ष की नेता इंदिरा गाँधी थी तो सिर्फ सोने और प्याज की महंगाई का रोना रो कर सत्ता में आ गई . उनके बाद उन्ही की पार्टी ने बीजेपी की राज्य सरकारे प्याज की महंगाई में धो डाली . और आज का विपक्ष महंगाई की समस्या को मुद्दा ही नहीं बना पा रहा है क्योकि विपक्ष के नेता भी तो सत्ता सुख तो भोग ही रहे है .
डर तो इस बात का लग रहा है अगर आम आदमी महंगाई की तपिश को ज्यादा महसूस नहीं कर पाया और उसके पेट की आग उसके हाथो में पहुच गई तो क्या क्या जलेगा कल्पना भी भयावह है . और यह आग फैलेगी जरुर क्योकि प्रधानमंत्री और कृषि मंत्री कहते है महंगाई अभी कम नहीं होगी .
Wednesday, November 04, 2009
चचा अंग्रेजो के शुक्रगुजार क्योकि अंग्रेजो ने मुसलमानों से हिन्दुस्तान की कमान ले कर हिन्दुओ को सौंप दी
हमारे ऊपर राज करने वालो में अंग्रेजो की मानसिक गुलामी आज भी हम कर रहे है . राष्ट्रकुल खेल इसी का तो प्रमाण है .राष्ट्रकुल यानी अंग्रेजो के गुलाम देशो का समूह . जो आज भी अपने को धन्य मानते है की अंग्रेजो ने हम पर उपकार किया हमें दुनिआवी तहजीव सिखाई . तरक्की के रस्ते दिखाए .
ऐसे ही एक हमारे चचा है इंग्लेंड रिटर्न . अगर आज अंग्रेज राज कर रहे होते तो निश्चित ही उनेह राय बहादुर या राय साहेब से नवाजते . उनकी आस्था आज भी अंग्रेजो के प्रति अगाध है . उनका यह पागल पन कभी कभी निरुत्तर कर देता है वकौल उनके हमें अंग्रेजो का शुक्रगुजार होना चाहिए . क्यों ? पूछने पर उनका रिकार्ड चालु हो जाता है .
चचा पूछते है और याद भी दिलाते है अंग्रेज जब भारत में आये तो किस्से उन्होंने राज छीना . कुछ बोलने से पहले ही बोल उठे बादशाह बहादुर शाह जफ़र से . यानी यानि क्या तुम तो ऐसे गाली देते हो जैसे अंग्रेजो ने प्रथ्वी राज चौहान से राज छीना . मतलब क्या मतलब यह की अंग्रेजो ने मुसलमानों से हिन्दुस्तान की कमान ले कर हिन्दुओ को सौंप दी .नहीं तो जजिया देते देते अब तक हिन्दुओ का नामोनिशान मिट जाता .
अब इस चचा का क्या करू एक नयी बहस को जन्म दे दिया चचा ने . चलिए इस बहस पर भी तलवार भाँज ले .
ऐसे ही एक हमारे चचा है इंग्लेंड रिटर्न . अगर आज अंग्रेज राज कर रहे होते तो निश्चित ही उनेह राय बहादुर या राय साहेब से नवाजते . उनकी आस्था आज भी अंग्रेजो के प्रति अगाध है . उनका यह पागल पन कभी कभी निरुत्तर कर देता है वकौल उनके हमें अंग्रेजो का शुक्रगुजार होना चाहिए . क्यों ? पूछने पर उनका रिकार्ड चालु हो जाता है .
चचा पूछते है और याद भी दिलाते है अंग्रेज जब भारत में आये तो किस्से उन्होंने राज छीना . कुछ बोलने से पहले ही बोल उठे बादशाह बहादुर शाह जफ़र से . यानी यानि क्या तुम तो ऐसे गाली देते हो जैसे अंग्रेजो ने प्रथ्वी राज चौहान से राज छीना . मतलब क्या मतलब यह की अंग्रेजो ने मुसलमानों से हिन्दुस्तान की कमान ले कर हिन्दुओ को सौंप दी .नहीं तो जजिया देते देते अब तक हिन्दुओ का नामोनिशान मिट जाता .
अब इस चचा का क्या करू एक नयी बहस को जन्म दे दिया चचा ने . चलिए इस बहस पर भी तलवार भाँज ले .
Monday, October 26, 2009
खर्चा उठाने को तैयार हो तो विजेता घोषित किया जायेगा ब्लॉग श्री , ब्लॉग भूषण ,ब्लॉग विभूषण और ब्लॉग रत्न
ब्लागर बनते हो इलाहाबाद से बुलावा आया नहीं और हमें कह रहे हो ब्लॉग लिखता हूँ . भाड़ में जाओ तुम और तुम्हारा ब्लॉग . पता चल गई अपनी औकात खाली टाइम खोटी करते हो . ऐसी कुछ आवाज़ कई लोगो के अंदर से निकल रही होगी शायद .
अब ब्लोगरो में दो खेमे है एक जो इलाहाबाद से बुलावा पाए और दूसरे वह जो ठुकराए . वैसे सब को बुलावा आ भी जाता तो उतने ही जाते जितने वहां पहुचे . बाकी तो सिर्फ मुँह गलत ही फुलाए बैठे है .
मैने तो ऐसी अंतर राष्ट्रीय समारोह सुने है जिसमे आयोजको के आलावा लोग ही नहीं पहुचते . लोग घर बैठे ही राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय जर्नल छाप देते है . यह विद्या सरकारी विश्वविध्यालय के लोगो को बहुत अच्छी तरह से आती है .
कोई बात नहीं अब हम लोग एक पुरस्कार समारोह रखेंगे जिसमे ब्लॉग श्री , ब्लॉग भूषण ,ब्लॉग विभूषण और ब्लॉग रत्न बाटे जायंगे . पुरस्कार विजेताओ को खर्च उठाना पड़ेगा और पुरस्कार वितरण के लिए एक नामी हस्ती जैसे पूर्व राज्यपाल , लेखक या आलोचक कि व्यवस्था भी विजेताओ को खुद ही करनी पड़ेगी .
यदि मेरा विचार सही लगे तो अपने सुझाव आपस में बाटे .
अब ब्लोगरो में दो खेमे है एक जो इलाहाबाद से बुलावा पाए और दूसरे वह जो ठुकराए . वैसे सब को बुलावा आ भी जाता तो उतने ही जाते जितने वहां पहुचे . बाकी तो सिर्फ मुँह गलत ही फुलाए बैठे है .
मैने तो ऐसी अंतर राष्ट्रीय समारोह सुने है जिसमे आयोजको के आलावा लोग ही नहीं पहुचते . लोग घर बैठे ही राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय जर्नल छाप देते है . यह विद्या सरकारी विश्वविध्यालय के लोगो को बहुत अच्छी तरह से आती है .
कोई बात नहीं अब हम लोग एक पुरस्कार समारोह रखेंगे जिसमे ब्लॉग श्री , ब्लॉग भूषण ,ब्लॉग विभूषण और ब्लॉग रत्न बाटे जायंगे . पुरस्कार विजेताओ को खर्च उठाना पड़ेगा और पुरस्कार वितरण के लिए एक नामी हस्ती जैसे पूर्व राज्यपाल , लेखक या आलोचक कि व्यवस्था भी विजेताओ को खुद ही करनी पड़ेगी .
यदि मेरा विचार सही लगे तो अपने सुझाव आपस में बाटे .
Friday, October 16, 2009
हिन्दू खोजन मैं गया हिन्दू ना मिलाया कोय जब हिन्दू ना मिला तो हिंदुत्व कहाँ से होय
हिन्दू ! हिन्दू ! हिन्दू !. हिन्दू कमजोर है ! हिंदुत्व खतरे में !. लेकिन अब हिन्दू कहाँ है . हिन्दू थोड़े दिनों में अजायबघर कि किसी अलमारी में धूल खाता दिखेगा . मैने हिन्दू को खोजने कि कोशिश की मुझे तो नहीं मिला शायद आपको कहीं हिन्दू मिले तो सूचना दे .
मेरी एक खोज हिन्दू के लिए शुरू हुई मुझे ब्राह्मण .क्षत्रिय ,वैश्य ,जाट, यादव ,गुजर्र ,जाटव ,बाल्मीकि ,धोबी ,नाई, आदि आदि तो मिले लेकिन हिन्दू ना मिले . जब हिन्दू को और खोजा तो इन के भी टुकड़े मिले कोई साढ़े सात घर का कोई बारह घर का . ,कोई सूर्यवंशी ,चन्द्र वंशी , कोई खमरिया कोई घोसी लेकिन हिन्दू नहीं मिला .
एक किस्सा बहुत याद आ रहा है एक ब्राह्मण और पठान में दोस्ती थी पठान बोला यार पंडित तुम तो रोज़ दावत छकते हो कभी हमें भी ले चलो . पंडित जी बोले मौका लगने दो . एक कथा कि दावत में ब्रह्म भोज का न्योता आया . पंडित जी ने पठान को धोती पहनाई ,तिलक लगाया ,जनेऊ पहनाया और समझाया कोई पुछे कौन बामन हो तो कहना गौर . दोनों खुश होकर चल दिए . पंगत में बैठ गए तभी पड़ोस के दूसरे ब्राह्मण पठान से बोले पंडित जी कौन से गाँव से आये है उसने तुंरत बता दिया .फिर पूछा कौन ब्राह्मण है पठान बोला गौर . दूसरे ब्राह्मण ने फिर सवाल किया कौन से गौर . पठान एक साथ बोल उठा या खुदा गौर में भी कोई और
यह किस्सा हिन्दुओ और हिंदुत्व को आइना दिखाने को काफी लगता है .
हिंदुत्व एक वट वृक्ष है और जातियाँ उसकी शाखाएँ और उपजातियां शाखाओ के पत्ते . आज हम वृक्ष को पानी ना लगा कर उसके पत्तो को पानी दे रहे है और थोडा बहुत शाखाओ को लेकिन पेड़ कि जड़ को कोई पानी नहीं दे रहा इसलिए पेड़ कमजोर हो रहा है . और कमजोर पेड़ पर दीमक लग रही है .
अगर हम अभी भी ना चेते तो अपनी अपनी शाखाएँ[टहनियां ] लिए घूमेंगे . और हिंदुत्व रूपी पेड़ की लकडी चिता जलाने के काम तो आएगी . ............
सोचे ...............विचारे ...............फिर मुझे जो घोषित करना हो करे .
हिन्दू खोजन मैं गया हिन्दू ना मिलाया कोय
जब हिन्दू ना मिला तो हिंदुत्व कहाँ से होय
मेरी एक खोज हिन्दू के लिए शुरू हुई मुझे ब्राह्मण .क्षत्रिय ,वैश्य ,जाट, यादव ,गुजर्र ,जाटव ,बाल्मीकि ,धोबी ,नाई, आदि आदि तो मिले लेकिन हिन्दू ना मिले . जब हिन्दू को और खोजा तो इन के भी टुकड़े मिले कोई साढ़े सात घर का कोई बारह घर का . ,कोई सूर्यवंशी ,चन्द्र वंशी , कोई खमरिया कोई घोसी लेकिन हिन्दू नहीं मिला .
एक किस्सा बहुत याद आ रहा है एक ब्राह्मण और पठान में दोस्ती थी पठान बोला यार पंडित तुम तो रोज़ दावत छकते हो कभी हमें भी ले चलो . पंडित जी बोले मौका लगने दो . एक कथा कि दावत में ब्रह्म भोज का न्योता आया . पंडित जी ने पठान को धोती पहनाई ,तिलक लगाया ,जनेऊ पहनाया और समझाया कोई पुछे कौन बामन हो तो कहना गौर . दोनों खुश होकर चल दिए . पंगत में बैठ गए तभी पड़ोस के दूसरे ब्राह्मण पठान से बोले पंडित जी कौन से गाँव से आये है उसने तुंरत बता दिया .फिर पूछा कौन ब्राह्मण है पठान बोला गौर . दूसरे ब्राह्मण ने फिर सवाल किया कौन से गौर . पठान एक साथ बोल उठा या खुदा गौर में भी कोई और
यह किस्सा हिन्दुओ और हिंदुत्व को आइना दिखाने को काफी लगता है .
हिंदुत्व एक वट वृक्ष है और जातियाँ उसकी शाखाएँ और उपजातियां शाखाओ के पत्ते . आज हम वृक्ष को पानी ना लगा कर उसके पत्तो को पानी दे रहे है और थोडा बहुत शाखाओ को लेकिन पेड़ कि जड़ को कोई पानी नहीं दे रहा इसलिए पेड़ कमजोर हो रहा है . और कमजोर पेड़ पर दीमक लग रही है .
अगर हम अभी भी ना चेते तो अपनी अपनी शाखाएँ[टहनियां ] लिए घूमेंगे . और हिंदुत्व रूपी पेड़ की लकडी चिता जलाने के काम तो आएगी . ............
सोचे ...............विचारे ...............फिर मुझे जो घोषित करना हो करे .
हिन्दू खोजन मैं गया हिन्दू ना मिलाया कोय
जब हिन्दू ना मिला तो हिंदुत्व कहाँ से होय
Wednesday, October 14, 2009
चिपलूनकर जी सिर्फ एक बात कि हिंदुत्व का ठेका संघ , भाजपा या शिवसेना का नहीं है
चिपलूनकर जी जब मैं चल नहीं पाता था तब पिता की गोद में संघ की शाखा जाता था . जब बोलना सिखा तो पहले कुछ स्पष्ट शब्दों में नमस्ते सदा वत्सले मातृ भूमे था . जब दूसरी कक्षा में था तब पहला शिविर में गया . सायं शाखा का मुख्य शिक्षक था . आई टी सी ,ओ टी सी किया . सरस्वती शिशु मंदिर और विद्या मन्दिर में पढाई की .
आपको व पढने वालो को लग रहा होगा मैं यह सब लिख कर क्या कहना चाहता हूँ . सिर्फ एक बात कि हिंदुत्व का ठेका संघ , भाजपा या शिवसेना का नहीं है . और हिंदुत्व पर कोई विपदा भी नहीं है . आज आपका लेख राज ठाकरे कि चर्चा में हिंदुत्व को घसीटा जाना कुछ अच्छा नहीं लगा .
जब तक हिंदुत्व इन तथाकथित पालनहारों से दूर नहीं हटेगा तब तक साम्प्रदायिक ही कहलायेगा . आज तक किसी हिंदुत्व के पुरोधा को यह कहते नहीं सुना जब तक राम लला का मन्दिर नहीं बनेगा तब तक वह भी टेंट में रहेगा . राम लला को बेघर कर सिर्फ इलेक्शन में ही उनकी कुटिया का ध्यान आता है .
चिपलूनकर जी अगर हिन्दू और मुस्लिम पर आधारित राजनीती चलती होती तो हिन्दू महासभा और मुस्लिम लीग के आलावा कोई नहीं होता सत्ता में .
हिंदुत्व कि उलटी माला जपते जपते भाजपा कहाँ पहुच गई है यह किसी से नहीं छुपा है . शायद २२ तारीख को आसूं पुछे लेकिन आपका लेख घोषित कर रहा है कि मुंबई का सपना सपना ही रह जाएगा .
आपको व पढने वालो को लग रहा होगा मैं यह सब लिख कर क्या कहना चाहता हूँ . सिर्फ एक बात कि हिंदुत्व का ठेका संघ , भाजपा या शिवसेना का नहीं है . और हिंदुत्व पर कोई विपदा भी नहीं है . आज आपका लेख राज ठाकरे कि चर्चा में हिंदुत्व को घसीटा जाना कुछ अच्छा नहीं लगा .
जब तक हिंदुत्व इन तथाकथित पालनहारों से दूर नहीं हटेगा तब तक साम्प्रदायिक ही कहलायेगा . आज तक किसी हिंदुत्व के पुरोधा को यह कहते नहीं सुना जब तक राम लला का मन्दिर नहीं बनेगा तब तक वह भी टेंट में रहेगा . राम लला को बेघर कर सिर्फ इलेक्शन में ही उनकी कुटिया का ध्यान आता है .
चिपलूनकर जी अगर हिन्दू और मुस्लिम पर आधारित राजनीती चलती होती तो हिन्दू महासभा और मुस्लिम लीग के आलावा कोई नहीं होता सत्ता में .
हिंदुत्व कि उलटी माला जपते जपते भाजपा कहाँ पहुच गई है यह किसी से नहीं छुपा है . शायद २२ तारीख को आसूं पुछे लेकिन आपका लेख घोषित कर रहा है कि मुंबई का सपना सपना ही रह जाएगा .
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