मंगलवार, जुलाई 11, 2017

एक कहानी जो न होगी पुरानी

किसी समय किसी शहर में एक बनिया दुकान चलाता था उसकी दुकान पर एक गाँव वाला आता था जो अपने पास तलवार रखता था। बनिए ने पूछा इस तलवार से क्या होता है 
जवाब मिला अगर कोई लूटने आए तो उसे काट देगी यह तलवार 
वाह बढ़िया चीज़ है कितने में बेचोगे। सौदा हुआ और बनिए ने वह तलवार ख़रीद ली और घर पर ले जाकर टाँग दी। 
कुछ दिनो के बाद बनिये के घर डकैत आए और लूटने लगे बनिया एक कोने से तलवार से कहने  लगा उतर निकल काट दे मार दे। लेकिन कुछ नही हुआ लूटा पिटा बनिया ग़ुस्से में आया और तलवार पर लात मारी। लात मारते ही उसका पैर कट गया उसे देख कर बोला जिस काम को लाए तब तो कुछ नही किया अब हम पर ही चोट पहुँचा रही हो   

लब्बोलुआब यह है हथियार ख़रीदने से कुछ नही होता उसे चलाने का जिगर भी होना चाहिए 


डिस्क्लेमर :- यह एक कहानी है इसका किसी ज़िंदा या मुर्दा से कोई सम्बंध नही है। अगर आप इसे किसी से जोड़ते हो तो यह आपकी कल्पना की उड़ान है। 

गुरुवार, जुलाई 06, 2017

हम नक्कारख़ाने में तूति बजाते है लिखते है और लिखकर भूल जाते है

जो हो रहा है वह सही नही हो रहा है । विरोध एक व्यक्ति का लेकिन विरोध के समय हर मर्यादा का हनन हो रहा है । एक राष्ट्र प्रमुख देश के लिए देश के हित के लिए रात दिन अपने कर्तव्यों का पालन कर रहा है और हम कुछ लोग अपने स्वार्थ के लिए उसकी निंदा करते समय देश के बारे में भी अनर्गल बातें करते है ।

यह हमारी संस्कृति नही लेकिन दोषी एक पक्ष ही नही । अनर्गल प्रलाप दोनों पक्षों के तरफ़ से हुआ है मर्यादाए दोनों तरफ़ से टूटी है लेकिन आपसी द्वन्द से देश को नुक़सान हो रहा है देश के मनोबल पर असर पड़ रहा है । हम वर्तमान में नही भविष्य के लिए लड़ रहे है । हम से तात्पर्य हमारे उन लोगों से है जो देश को चलाना चाहते है ।

आपसी लड़ाईं में देश न हार जाए इसका ध्यान रखे । 

हम नक्कारख़ाने में तूति बजाते है लिखते है और लिखकर भूल जाते है