शुक्रवार, अगस्त 21, 2009

भाजपा पर तानाशाही हावी है

जसवंत सिंह की पुस्तक पर उठा विवाद या कहे उठाया गया विवाद बिलकुल ऐसा है जैसे कौआ कान ले गया और हम उसके पीछे दौड़ रहे है पहले कान टटोले बिना . ऐसा क्या लिख दिया जसवंत सिंह ने जिससे सिर्फ भाजपा के पौरुष पर प्रश्न चिन्ह लग गया . बिना पढ़े समझे बेतुके आरोप संघ परिवार की पुराणी खसलत है . जसवंत सिंह ने वही लिखा जो संघ पिछले ६० साल से चीख चीख कर कहता रहा है कि भारत विभाजन का सबसे बड़ा कारण पंडित नेहरू रहे है . और उस समय के सभी नेता जिन्होंने विभाजन का प्रस्ताव पास करा था वह भी कम अपराधी नहीं है चाहे उसमे गांधीजी हो या सरदार पटेल .

बेचारे जसवंत सिंह की किताब क्या अडवानी जी के ब्यान जो जिन्ना की मजार पर दिया था से ज्यादा घातक है . अगर जिन्ना की हकीकत ब्यान करना अपराध है तो जसवंत सिंह को सजा और अडवानी जी को प्रधानमंत्री वेटिंग और नेता प्रतिपक्ष बनाना इन्साफ के साथ दोगलापन नहीं . लगता है भाजपा के बारे में कहागया सत्य है कि वहां पर तानाशाही हावी है

जसवंत सिंह जो भाजपा के संस्थापक सदस्य है को अपमानित करके अलोकतांत्रिक तरीके से भाजपा से निकालना इस बात का प्रमाण है भाजपा में लोकतंत्र नहीं और इस समय के नेताओ में इतनी छमता नहीं वह अपने को साबित करे इसलिए पुराने स्थापित व्यक्तित्व को बेईज्ज़त कर उनेह हटा रहे है या यह कहे बड़ी लाइन तो खीच नहीं सकते लेकिन बड़ी लाइन को मिटा कर अपने को बड़ा साबित करने पर लगे है . और राजनाथ सिंह जैसे बिना धरातल के राष्ट्रीय नेता भाजपा को मिटाने का संकल्प कर चुके है .

5 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी बात से १००% सहमत ! लगता है भाजपा अपना सूपड़ा साफ़ करवा कर ही रहेगी |

    उत्तर देंहटाएं
  2. भैया, कौन से तानाशाह की बात कर रहे हो, अगर बीजेपी में कोई ताना शाह होता तो ये सारे के सारे जोकर इस तरह की हरकते करते फिरते ?

    उत्तर देंहटाएं
  3. अभी चलेगी यह जूतमपैजार। सारी ऊर्जा जब थक कर निकल जायेगी, तब मामला सलटेगा।

    उत्तर देंहटाएं
  4. जहां पर नेताओं का तिरस्कार हो, वह पार्टी देश का क्या उद्धार करेगी:(

    उत्तर देंहटाएं
  5. सब neta एक doosre को kaatne पर लगे हैं ..... bhaajpa का patan ऐसे ही hona है

    उत्तर देंहटाएं

आप बताये क्या मैने ठीक लिखा