रविवार, दिसंबर 13, 2009

हैलो मै बी .एस .पावला बोल रहा हूँ भिलाई से और धीरू भाई मैं महफूज

हैलो मै बी .एस . पावला बोल रहा हूँ भिलाई से . जैसे ही मोबाईल उठाया उधर से आवाज़ आई . एक क्षण अनजानी सी मधुर आवाज़ जानपहचान सी लगने लगी . अरे पावला जी नमस्कार नमस्कार , यह एक फोन काल थी मुझे बधाई देने को मेरी शादी की साल गिरह पर .कितना अपनापन  खूब बात हुई . ब्लोगिंग से एक नया रिश्तेदार मिला .

थोड़ी देर में फिर घंटी बजी अब उधर से आवाज आई धीरू भाई मैं महफूज  . एक अनजानी आवाज़ फिर से अपनी सी लगने लगी . और एक नया रिश्ता जुड़ गया .

दोनों लोगो को पहचानने में मुझे देर नहीं लगी और उनकी आवाज़ के साथ उनकी तस्वीर मेरे जेहन में तैरती रही जैसे कितने दिनों से पहचान है . यह बाकया जब मैने घर पर सुनाया तो मेरे पापा जी को बहुत ख़ुशी हुई .

ब्लोगिंग से रिश्ते भी बन रहे है ऐसा होता है मैने जिया है .

22 टिप्‍पणियां:

  1. धीरू जी ,
    चलिए आज एक और ब्लोग्गर ये मानने लगा कि ये दुनिया अब मात्र आभासी नहीं रही ...काफ़िला बढ रहा है

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  2. धीरु भाई, ऐसे ही नये रिश्तों का निर्माण हो रहा है, अजय जी ने सही कहा है कि ये दुनिया अब आभासी नही रही है।

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  3. धीरू भाई रिश्ते मे हम भी आपके भाई लगते हैं । बधाई ।

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  4. काफी सरप्राइज़ बटोर लिये आप, मुझे पाबला जी का तो नही हम महफ़ूज जी और गिरीश बिल्‍लोरे जी का फोन जरूर आया था। पाबला जी का हम वेट कर रहे है। :) अगर आपके पास हो तो तो हमें दे दो हम भी हैलो-हाय कर ले :)

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  5. मुझे भी बहुत अच्छा लगा था....आपसे बात कर के....

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  6. नये नये रिश्तों में प्रेम की धारा बहती रहे .......... और भी नये रिश्ते बनेंगे ऐसी आशा है ..... आमीन ...........

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  7. मान देने के लिए आभार धीरू जी

    यूँ ही स्नेह बनाए रखिएगा

    बी एस पाबला

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  8. ऐसे ही चलता रहे. पुनः बधाई.

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  9. देर आयद दुरुस्त आयद॥ परिणय दिवस की बधाई बंधुवर॥

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  10. ब्लोगिंग के सहारे जो रिश्ते बन रहे हैं वे वाकई बहुत ही अच्छे बन रहे हैं . मेरे साथ भी पंकज सुबीर और गौतम राजरिशी के साथ इसी तरह रिश्ते जुड़े ............दरअसल ये रिश्ते एक ऐसे मानसिक धरातल पर बनते हैं जो अपने खुद तैयार किया होता है इसलिए इनकी दीर्घजीवी होने की भी पूरी सम्भावना रहती है, परिणय दिवस की बधाई

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  11. बधाई हो भाई...हम दोनों एक ही दिन वाली नाव में सवार थे और हमें पता ही नहीं चला....पाबला जी तो देवदूत हैं..उनकी बदौलत कितने ही अपरिचित अपने बन गए...जवाब नहीं उनका...एक बार फिर आपको ढेरों शुभकामनाएं...
    नीरज

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आप बताये क्या मैने ठीक लिखा