सोमवार, मार्च 30, 2009

एक सवाल यह वरुण गाँधी हिंदू कब से हो गए ?

एक सवाल यह वरुण गाँधी हिंदू कब से हो गए ? स्वर्गीय फिरोज गाँधी के वंशज हिंदू कैसे हो सकते है , स्व फिरोजगाँधी ने तो कभी हिंदू धर्म स्वीकार ही नही किया इसका कोई प्रमाण भी नही

एक बेतुका प्रश्न खाली बैठे दिमाग मे गयाभारत मे पुरूष का धर्म ही स्त्री का धर्म माना जाता हैऔर स्व फिरोज पारसी समुदाय से थे इसलिए उनके पुत्र और पौत्र भी पारसी ही होंगे की हिंदूयह तो रही दिमागी हलचलइसका उत्तर आप ही लोग सुझायेंगे

या भाजपा का सदस्य होना ही हिंदू होना मान लिया जाता है ? विश्व हिंदू परिषद , बजरंग दल का प्रमाण पत्र ही हिंदूहोने का एकमात्र साधन है या मुसलमानों को गाली देना या मार काट की बात करना ही हिंदू होना मान लिया जाए

गुरुवार, मार्च 26, 2009

लालू ,मुलायम ,पासवान और परदे के पीछे कल्याण - कुछ समझ आया

लालू ,मुलायम ,पासवान और परदे के पीछे कल्याण - कुछ समझ आया आपको नही तो दिमाग पर जोर डाले यह ही राजनीति है और उसका भावार्थ आपको कुछ समय बाद चल ही जायेगा । यह गठजोड़ एक नई ज़मीन तैयार कर रहा है ।

अपने प्रदेश के यह धुरन्दर समय के आगे मजबूर है इनका तिलिस्म विधानसभा चुनाव से टूट रहा है लालू पैदल ,पासवान भी और मुलायम अपने लोगो की वजह से सत्ता से पैदल , कारण एक इनका मुस्लिम वोट दरक रहा है । और मुस्लिम वोटो के सौदागरों की नाजायज मांगो ने इन्हे मजबूर किया कुछ नया करने को। पूरे ग्रहकार्य के साथ यह कदम उठाया गया है जिससे तथाकथित मुस्लिम सौदागरों का प्रेशर कम किया जाए ।

और यही एक कारण यह विपरीत ध्रुव एक हो रहे है । इस धुर्विकरण का एक ही मकसद है पिछडे वोटो को वटने से रोकना और गैर मायावती दलित वोटो का पासवान के द्वारा इकठ्ठा रखना । अगर यह प्रयोग सफल रहा तो एक नया प्लेटफोर्म बनेगा भारत की राजनीति मे ।

इसीलिए मुलायम कल्याण को माफ़ करवाने के लिए मस्जिद मस्जिद मदरसे मदरसे घूम रहे है और उनके पवन दूत अमर जाने अनजाने मौलानाओ की रोज़ परेड करा रहे है । आम मुस्लिम मतदाता अब कल्याण से कम नाराज़ नज़र आ रहा है । ६ दिसम्बर ९२ से कल्याण के ख़िलाफ़ आग उगलने वाले लालू ,पासवान आज बिल्कुल खामोश है ।

लालू , मुलायम ,पासवान आज कल्याण के साथ इसलिए खड़े हो रहे कि वह एक संदेश देना चाह रहे है मुस्लिम सौदागरों को तुम्हारे बिना भी हम चल सकते है और एक बात आम मुसलमान आज भी लालू ,मुलायम मे अपनी खुशहाली देखता है । और आम मुस्लिम अभी मायावती और कांग्रेस से अपने को जुडा महसूस नही कर रहा है ।

यही एक कारण है मेरी नज़र मे आगे आप सोचे मैं कहाँ तक सही हूँ ।

बुधवार, मार्च 25, 2009

कश्मीर मे हो रहे शहीद सैनिको को भी तो याद कर लो मेरे साथियों

एक युद्ध जो आज कल कश्मीर मे चल रहा है उस पर हमारी नज़र तो पड़ रही है लेकिन चर्चा लायक नही समझ रहे है हम लोग , क्यूंकि वह तो कश्मीर मे रोज़ की बात है । मुंबई का हमला तो हम को हिला देता है लेकिन कश्मीर पर अघोषित युद्ध हमें आंदोलित नही कर रहा है न जाने क्यों ? कितने जावांज सैनिक शहीदहो गए उनके बारे मे कोई मोमबत्ती नही जल रही

जाने कितने कसाब कश्मीर मे घुस रहे है आज ही खबर है लश्कर के ४०० आतंकवादी घुसपैठ के लिए तैय्यार हैऔर हम लोग बेखबर आराम से दो कौडी के नेताओं के बयानों पर मज़े ले रहे है , दुःख प्रकट कर रहे हैऔर एकखतरा जो देश पर मडरा रहा है उसके बारे मे सोचने की भी फुर्सत नही है हमें

सोचे इस ओर भी सोचे हो सके तो देश के शहीदों के प्रति जो कश्मीर मे देश के किए जान कुर्बान कर रहे है रोज़

सोमवार, मार्च 23, 2009

भगत सिंह की बात सुनो -संघर्षो की राह चुनो

सुबह अखवार देखा तो तीसरे चौथे पन्ने पर शहीद भगत सिंह , राजगुरु , सुखदेव के बारे मे पता चला आज उनका शहीदी दिवस है । पहले पन्ने पर तो जेड गूडी की मौत की खबर थी । और सच मे हम उसकी मौत का अफ़सोस कर रहे थे और हमारे शहीदों के बारे मे सोचने की तो फुर्सत ही नही थी । यह है हमारे अहसान फरोशी की इन्ताह ।

आज़ादी बिना खडग और ढाल के नही मिली थी उस आज़ादी मे लाखो लोगो का बलिदान भी शामिल था और सबसे ज्यादा युवाओं का । क्या उम्र थी भगत सिंह की सिर्फ़ २२,२३ साल . यह उम्र होती है कहीं बड़ी बड़ी बातें करने की । लेकिन इतिहास गवाह है क्रांतियाँ इसी उम्र के लोग करते है । रानी लक्ष्मीबाई , खुदी राम बोस ,उधम सिंह और न जाने उन जैसे कितने ज्ञात अज्ञात युवाओं का बलिदान ही इस देश को आजाद करा पाया था ।

आज भी युवाओं की जरूरत है लेकिन वेटिंग मे अभी भी ८० , ८५ साल के युवा ही लाइन मे है । जागने का वक्त है उठने का वक्त है याद करने की जरूरत है . संघर्ष की राह चुननी ही पड़ेगी भगत सिंह की बात सुननी ही पड़ेगी । लेकिन यह भी सच है बिना धमाको के यह बात लोग सुनते नही है । और यह जो लोग चाहते है कि लोग बात न सुने भगत सिंह को बिना बात के फाँसी पर चडा देते है । आज भी वही प्रस्थिति बनी हुई है शासको की चमडी का रंग बदला है और कुछ नही ।

ख़ैर समय ऐसा ही चलता रहेगा । शायद आज के ही दिन हम शहीदों को याद कर ले वही काफी है ।

इन्कलाब जिंदाबाद

शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर वरस मेले ?
वतन पर मरने वालो का यही आख़िर निशां होगा ?????????????????????????????????

गुरुवार, मार्च 19, 2009

आश्चर्य- राजनीति मे किया वादा निभाया

राजनीति मे एक वादा किया और निभा भी दिया । पिछले २५ सालो से चुनावी राजनीति मे सक्रिय मेरे पिता ने वादा किया था वह चुनाव नही लडेंगे और उन्होंने निभाया भी । तीन बार सांसद और वह भी निष्कलंक कोई आरोप नही ,न भ्रष्टाचार न परिवार वाद आप लोग तहकीकात कर सकते है ।

एक खुली किताब सा जीवन , हर क्षेत्र मे सक्रिय कृषि ,किसान और आम आदमी के लिए समर्पित व्यक्तित्व ,विरोधी भी जिनकी इज्ज़त करते है ऐसे पिता है मेरे । उनके बारे मे लिखने बैठू तो कई दिन लग जायेंगे अभी दो बात सिर्फ़

१- आज तक अपने पैसे से चुनाब नही लड़ा जनता ने चंदा दिया आम आदमी ने आप शायद विश्वास नही करेंगे लेकिन यह सच है । अगर चंदा बच गया तो वह स्कूलों को दे दिया साक्ष्य उपलब्ध है ।

२- ग्रामीण क्षेत्र होते हुए भी आज तक बन्दूक ,रायफल के साए मे कभी नही चले । आज भी अकेले चलते है बिना भय के क्यूंकि स्वच्छ राजनीति की , दुश्मनी को दोस्ती मे ही बदलवाया ।

संघर्ष सतत संघर्ष की भावना लेकिन शायद आज की राजनीति के हिसाब से आउट ऑफ़ डेट ऐसा मानते है वह क्योंकि मूल्य आधारित राजनीति को कही काला पानी की आजीवन कारावास की सज़ा हो चुकी है । आज राजनीति का मूल मन्त्र है सत्ता सिर्फ़ सत्ता किसी भी कीमत पर

सोमवार, मार्च 16, 2009

सोमवार, मार्च 09, 2009

होली .....अपनी तो बिना रंग मनेगी होली

होली का हुडदंग ,उल्लास मुझे लुभा नही रहा । इस त्यौहार जिसमे गम भी खत्म मान लिए जाते है एक गम मुझे सता रहा है विछोह का । पहली बार मेरी बेटी इस होली पर हमारे साथ नही है , वह हास्टल मे है सिर्फ़ क्लास सेवेन मे ।

पिछले साल तक होली पर हमारे यहाँ एक भूचाल सा मचा रहता था। कैसे रोकते थे एकादशी से उसे रंग खेलने से बड़ी मुश्किल होती थी । बड़ी सी पिचकारी ,रंग गुलाल ,पानी उसके हथियार हुआ करते थे होली खेलने के । उस समय उसके चहरे पर आई हसीं आज भी मेरे सामने तैर रही है । और वह हसीं आज मुझे ............ रही है ।

मेरे पापा जी इस होली पर खामोश से है कह रहे है तुम लोग नैनीताल चले ही जाओ लेकिन स्कूल वाले मिलने की इजाजत नही दे रहे । यह एक परीक्षा है हमारे सब्र की । खैर ...........

फिर भी होली की आपको बहुत बहुत बधाई । यह रंग बिरंगा त्यौहार आपके जीवन को रंग विरंगा करे और मेरे को भी ।

शुक्रवार, मार्च 06, 2009

आईये प्रकृति के संग फागुन मनाये ।

फागुन का रंग अगर देखना है तो पत्थर के जंगलो से निकल कर प्रकृति की ओर चलेदेखे वहां किस तरह प्रकृति अपने आप श्रंगार कर रही है पेड़ पोधो का ,पुराने पत्ते पतझड़ मे गिर गए

नए नए हल्के हरे रंग की कपोले , इतना सुंदर द्रश्य नयनाभिराम ................ खेतो मे लहराते हरे गेहूं की वालिया हवा का झोका जब इनको को लहराता है तो अल्ल्हड़ बाला की मतवाली चाल याद जायेगी

पीली सरसों पक चुकी
प्रकृति की तुलिका जब अपने पूरे शबाब पर है तो फागुन को भी महसूस करेरास ,फागका माहोलआईये प्रकृति के संग फागुन मनाये