मंगलवार, दिसंबर 29, 2009

नक्कार खाने में तूती बजाते है ब्लागर है लिख कर भूल जाते है

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नक्कार खाने में तूती बजाते है 

ब्लागर  है लिख कर भूल जाते है 

दुनिया भर के दुःख जब देखते है 

तो उन्हें दर्द सहित हम लिखते है 

और लिख कर हम भूल जाते है 

क्योकि ब्लागर है हम  

 नक्कार खाने में तूती बजाते है 













11 टिप्‍पणियां:

  1. अजी तुतिया जोर से बजाओ, भुलने वाले ओर सोने वालो को जगा दो

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  2. वे मुतमईन हैं कि पत्थर पिघल नहीं सकता
    मैं बेक़रार हूँ आवाज़ में असर के लिये.. (दुष्यन्त)

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  3. सही कहा!!


    यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि आप हिंदी में सार्थक लेखन कर रहे हैं।

    हिन्दी के प्रसार एवं प्रचार में आपका योगदान सराहनीय है.

    मेरी शुभकामनाएँ आपके साथ हैं.

    नववर्ष में संकल्प लें कि आप नए लोगों को जोड़ेंगे एवं पुरानों को प्रोत्साहित करेंगे - यही हिंदी की सच्ची सेवा है।

    निवेदन है कि नए लोगों को जोड़ें एवं पुरानों को प्रोत्साहित करें - यही हिंदी की सच्ची सेवा है।

    वर्ष २०१० मे हर माह एक नया हिंदी चिट्ठा किसी नए व्यक्ति से भी शुरू करवाएँ और हिंदी चिट्ठों की संख्या बढ़ाने और विविधता प्रदान करने में योगदान करें।

    आपका साधुवाद!!

    नववर्ष की अनेक शुभकामनाएँ!

    समीर लाल
    उड़न तश्तरी

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  4. वाह ....... आज तो कड़वी बात लिख दी आपने ..... अच्छा लगा ये अंदाज़ आपका ......... नया साल बहुत बहुत मुबारक ........

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  5. kaun kehta hai ki aasmaan mein suraakh nahin ho sakta
    ek paththar to tabiyat se uchchalo yaaro

    prayaas jari rakhen safalta avashya milegi.

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  6. आप नकारखाने की तुती कहते है, उसे मैं असहमती में उठी एक आवाज कहता हूँ.

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  7. बहुत सुंदर लगी आप की यह रचना बहुत-बहुत धन्यवाद
    आपको नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

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आप बताये क्या मैने ठीक लिखा