शनिवार, सितंबर 05, 2009

गुरु हो तो ऐसा जय शिक्षक दिवस

हे गुरु जी आज मौका मिला है आपको याद करने का आख़िर शिक्षक दिवस पर भी नही याद करेंगे तो कब करेंगेआख़िर आपने हमें पढ़ा लिखा कर इस लायक किया कि हम इतने लायक बन सके आप के कारणयह मुकाम हासिल किया लेकिन इसके बदले गुरु दक्षिणा हमने हर महीने ट्यूशन फीस के रूप में दी । आपका धेय्य वाक्य आज तक हम अपना रहे है कि बिना धनोबल के मनोबल नही बढ़ता है । यह ब्रह्म वाक्य आज तो सत्य ही प्रतीत होता है ।

हे गुरु जी आप धन्य हो आपने हमें प्रेक्टिकल मेन बना दिया । अगर आप हमारे ज्ञान चक्षु नही खोलते तो हम तमाम किताबी आदर्शो को जीवन में अपना कर किसी कोने में निखद चाकरी भीख निदान जैसा कुछ कर रहे होते ।

हे गुरु जी आप जहाँ भी हो सुखी ही होगे । और मै प्रभु से कामना करता हूँ जब जब जन्म लू आप ही मेरे गुरु बने । जिससे मै इस मतलबी दुनिया में जीने के सभी पैतरे सीख सकू । अगले शिक्षक दिवस तक के लिए आप भी मस्त रहो और मै भी ।

ठीक ही कहा है

गुरु ब्रह्म गुरु विष्णु गुरु देवो महेशरा :
गुरु साक्षात् परमब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः

11 टिप्‍पणियां:

  1. धीरू भाई इस मतलबी दुनिया मै जीने के लिये पेंतरे तो यह दुनिया खुद ही ठॊकरे मार मार कर सिखा देती है, हर कदम पर एक नया रुप इस दुनिया का मिलता है,
    वेसे आप ने गुरु जी को बहुत सुंदर ढंग से याद किया, बहुत अच्छा लगा

    उत्तर देंहटाएं
  2. आज गुरु को इससे behtar तरह नहीं याद किया जा सकता ........ प्रैक्टिकल तरीके से याद रखना जिसने ऐसे जीना सिखाया ....... kamaal है dheeru जी lajawaab post है आपकी ........

    उत्तर देंहटाएं
  3. याद करने का यह ढंग भी निराला है ।-शरदकोकास दुर्ग.छ्.ग.

    उत्तर देंहटाएं
  4. गुरुवरों को शत शत नमन
    और सादर वंदन .

    उत्तर देंहटाएं
  5. बिना धनोबल के मनोबल नही बढ़ता है
    यह तो हमारे प्रिय डी पी जोहरी का कथन लगता है.

    उत्तर देंहटाएं
  6. आपको जन्म दिन की हार्दिक बधाई
    आपकी मनोकामना पूर्ण हो

    शुभकामनाएं

    उत्तर देंहटाएं
  7. ये वाले गुरु हमें मिले नहीं। शिक्षा अधूरी रही! :-(

    उत्तर देंहटाएं

आप बताये क्या मैने ठीक लिखा