गुरुवार, सितंबर 04, 2008

1857

ठंडी रोटियों ने क्रांती की जवाला को जला दिया

डरे हुए हमारे दिलो में जवालामुखी बरपा दिया

अपनी आज़ादी को लड़ते रहने का जज्बा सिखा दिया

९० साल लगे आजाद होने में फिर भी आजाद तो करा दिया

आज

१५० साल बाद भी जश्न सिर्फ सरकार मानती है

हमें अपनी रोटी की चिंता है देश तो सिर्फ माटी है

आज़ादी मिली पर हमने महसूस नहीं की

क्योंकि हमें सिर्फ गुलामी ही भाती है ।

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आप बताये क्या मैने ठीक लिखा