गुरुवार, दिसंबर 25, 2008

एक मुलाक़ात -अटल जी के साथ [यादो के झरोखे से ]

अटल जी से जो एक बार मिल लेता है वह उस मुलाक़ात को आजन्म याद रखता है । एक मुलाक़ात अटलजी के साथ जो मेरी यादो मे आज भी ताज़ा है । बहुत सालो पहले जब अटलजी सिर्फ़ एक सांसद थे और ६ रायसीना रोड पर रहते थे मैं अपने पिताजी के साथ अटलजी से मिलने गया था ।

शायद इतवार का दिन था उस समय उनके घर पर हमारे आलावा कोई नही था उनके सहयोगी शिवकुमार जी द्वारा हमें सीधे उनके पास भिजवा दिया वहां अटल जी अपने प्यारे पामेरियन के बाल अपने हाथो से सेट कर रहे थे उनकी चिरपरचित मुस्कान लिए उनका चेहरा आज भी ताज़ा है मेरे जेहन मे । बातचीत का सिलसिला चल पड़ा घर परिवार की बातें ,इधर उधर की बातो का लंबा सिलसिला चलता रहा ।

उनके पड़ोसी कांग्रेसी नेता के कुत्ते ने एक बार अटलजी पर हमला किया था उस समय वह विदेशमंत्री बने थे और हमारी मुलाक़ात से कुछ दिन पहले उन्ही नेताजी के कुत्ते ने अटलजी को काट लिया था और चर्चा होने लगी की अब अटलजी प्रधानमंत्री बनेगे इसी बात पर भी मजाक हुई । चाय नाश्ता के बाद हम लोग चलने के लिए बाहर आए। अटलजी भी हमारे साथ साथ आए। उसी समय हमने नई मारुती कर खरीदी थी उसे देख कर बोले क्या कार ली है मैंने भी खरीदी थी भैस के टकराने से उलट गई । उसके बाद उन्होंने एन .इ ११८ खरीदी थी ।

अटलजी जैसा सौम्य ,सरल ,सहज ,अपना सा,सदा प्रसन्न चित व्यक्तित्व बहुत ही कम मिलेगा । ईश्वर से प्रार्थना है मानवता के इस राही को लम्बी आयु .उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करे ।

6 टिप्‍पणियां:

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  2. अटलजी जैसा सौम्य ,सरल ,सहज ,अपना सा,सदा प्रसन्न चित व्यक्तित्व बहुत ही कम मिलेगा । सही लिखा आपने मैंने भी उनका यह व्यक्तित्व १९८५ में तब देखा जब राजघाट पर विद्यार्थी परिषद् के अधिवेशन में अटल जी ने हमारे साथ जमीन पर बिना दरी के बैठ कर खाना खाया !

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  3. अटल जी को मैंने तब देखा था जब वो प्रचार के लिए हमारे शहर में आए थे उनकी भाषा शैली के क्या कहने मैं तो हतप्रभ रह गया था उनका भाषण सुनके .....


    अर्श

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  4. अटल जी की भाषण शैली के भक्त तो हम भी हैं .

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  5. मेने उन्हे केवल टी वी पर देखा है, उन के बारे कया कहूं , कभी मिला ही नही, ओर दुसरो से सुनी बातो पर मै ध्यान नही देता.
    धन्यवाद

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  6. हाँ कभी उनका ओज था ...उनके एक भाषण के बड़े चर्चे सुने है.....तब हम बेहद छोटे थे

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आप बताये क्या मैने ठीक लिखा