सोमवार, अक्तूबर 06, 2008

हर साल जलता है फिर भी रावण कभी नहीं मरता है

रावण फिर अट्टहास कर रहा है
दशहरे पर जलने के लिए मचल रहा है
क्योंकि
उस दिन वह फिर से नया जन्म लेता है
अपनी आसुरी शक्तियों को नई शक्ति देता है
त्रेता से आज तक
हम रावन को हर साल जलाते है
लेकिन उसे मार न पाते है
क्योंकि
वह हमारे भीतर पलता है
इसलिए
हर साल जलने वाला रावण
फिर भी नहीं मरता है

6 टिप्‍पणियां:

  1. क्योंकि
    वह हमारे भीतर पलता है
    इसलिए
    हर साल जलने वाला रावण
    फिर भी नहीं मरता है
    "very well said, a hidden truth'

    regards

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  2. भीतर बैठे रावण को जलाकर दिखाओ जाने .
    अन्यथा ऐसे ही हर साल रावण जलाते रहेंगे .
    और रावण है की दूसरे दिन फिर बाहर आ खड़ा होगा . अगली बार जलने के लिए .

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  3. पिछले साल भी किसी ने
    ऐसा ही लिखा था
    पर मैं तब भी नहीं जला था
    इसलिए इस साल भी सबके
    सामने हूं,
    कितनी और चाहे जैसी कवितायें
    लिख लों सब ब्‍लॉगरों
    मैं नहीं जलूंगा
    पहले हर साल जलता था
    पर अब साल दर साल
    ब्‍लॉग्‍स में पलूंगा
    हर बार करोगे जिक्र तुम मेरा
    और मैं बम बम करके हसूंगा
    पर मुझे तुम कितना ही जला लो
    मैं न मरूंगा, दिलों में तुम्‍हारे
    सदा राज मैं करूंगा
    अब मैं अपना एक ब्‍लॉग
    भी बनाने वाला हूं और
    एक वेबसाइट भी
    देखूं कौन रोकता है मुझे
    सब सारे तुम ब्‍लॉगर्स आओगे
    और मेरे ही ब्‍लॉग पर
    टिपिया कर मुझे जलाने जाओगे
    लेकिन इस बार भी पिछली
    बार की तरह बुरी तरह
    असफल हो जाओगे।

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आप बताये क्या मैने ठीक लिखा