गुरुवार, अक्तूबर 02, 2008

बापू अलविदा ,अब अगले २ अक्तूबर को याद करेंगे


बापू इस साल की छुट्टी के लिए धन्यबाद । अब अगले साल इसी दिन का इंतजार रहेगा उसी दिन फिर से याद कर लेंगे । अबकी बार खास मज़ा नहीं आया क्योंकि ईद भी इस दिन पड़ गयी ,एक छुट्टी कम हो गई ।


वैसे बापू किसी भी बहाने हमने याद तो किया । बापू हमें माफ़ करो हम आपको भुला रह है । हम शर्मिंदा है अपने इस कुक्र्त्य पर , परन्तु हम क्या करे बापू हम चाहे तो भी कुछ नहीं कर सकते क्योंकि हम अहसान फरामोश हो गए है ।


बापू बप्पा मोरया - अगले वरस तू जल्दी आ


6 टिप्‍पणियां:

  1. पूर्वज,
    चौराहों पर लगे,
    कौओं और कबूतरों की
    बीट से लिथड़े
    तुम्हारे बुत।
    तुम्हारी विस्मृति के
    स्मृति-चिह्न ।

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  2. बापू से अलविदा ले लीजिए ... पर बापू के सिद्धांतों से अलविदा मत लीजिए ... जो कि हर युग में लोगों के व्यक्तित्व में चार चांद लगा सकते हैं।

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  3. aapki post se nirasha hui

    dekhe:

    http://ppaliwal.blogspot.com/2008/10/blog-post_02.html

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  4. एक ओर भी आदमी हे भाई उसे भी कबी याद कर लिया करो , ओर हो सके तो कभी उन के बारे पढना... वो हे लाल बहादुर शस्त्री जी ईमान दारी की एक सच्ची मिशाल...
    धन्यवाद

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  5. अच्छा लेख लिखा हे आप ने .
    धन्यवाद

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  6. गुस्ताखी माफ3 अक्तूबर 2008 को 7:22 pm

    न तो गांधी के विचार और न वे स्वयं किसी एक राष्ट्र की भौगोलिक सीमाओं के भीतर रखकर देखे जा सकते हैं। वे पूरे विश्व के महात्मा हैं।
    ....आज हमने बापू का हैप्पी बर्थडे मनाया। बापू ने कर्म को पूजा माना था, इसलिए बापू के हैप्पी बर्थडे पर देशभर में कामकाज बंद रखा गया। मुलाजिम खुश हैं क्योंकि उन्हें दफ्तर नहीं जाना पड़ा, बच्चे खुश हैं क्योंकि स्कूल बंद थे। इस देश को छुट्टियाँ आज सबसे ज्यादा खुशी देती हैं।

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आप बताये क्या मैने ठीक लिखा