गुरुवार, जनवरी 01, 2009

नए साल का जश्न -थोड़ा सा कम हुआ कुछ देर के लिए गम

नया साल ही गयाबहुत शोरशराबा ,हल्लागुल्ला हुआ नया साल आया नया साल आया जब नया साल गयातो मैं यह सोच रहा हूँ नया क्या है ? नया सिर्फ़ कलेंडर है साल २००८ की जगह २००९ लिखा हैउसके आलावा आजतो मुझे कुछ भी नया नही दिखावही कल तक जो था आज भी वही महसूस हुआ लेकिन आज एक बात दिखी जोकल नही दिखी वह थी अधिकांश चेहरों पर खुशी सिर्फ़ नए साल के आगमन की

यह खुशी नए साल की है मैंने तो यही देखा नया साल अपने आप मे तो कुछ नही लेकिन आम आदमी इसमे एक नईउम्मीद देखता है उसे लगता है इस साल तो उसके सपने पूरे हो ही जायेंगेइस सा उसके कष्ट कुछ हद तक तो खत्महोंगेइस साल वह सुखी हो जायेगायही दो चार बातें खुशी का संचार कर देती है और हम जैसे आम आदमी नए साल मे नयी खुशीं की उम्मीद पर हल्ला गुल्ला करके नए साल का स्वागत करते है ।

हम हिन्दुस्तानी थोडी सी उम्मीद की रौशनी मिलते ही जश्न मनाने
लगते है । क्यों हो भी ना क्योंकि ऐसे कुछ ही पल तो मिलते हमें दर्द ,दुःख को भुला कर प्रसन्न होने को । फिर थोडी देर बाद वही जीने का संघर्ष ,रोटी की तलाश चालू

9 टिप्‍पणियां:

  1. सहमत हूँ कि आज २008 की जगह २००९ बदल गया आज कुछ नही दिखा तो कल मेरे भाई कैलेंडर के हर दिन कुछ न कुछ नई कहानी देखने को मिलेगी जो हर साल की तरह हटकर अजूबा जरुर लगेगी . भविष्य तो कोई नही जानता है . बस २००९ अच्छा आये रहे यही शुभकामना दे सकते है .

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  2. सहमत हूँ आपसे !
    बस उम्मीद पर ही तो दुनिया टिकी है ! उम्मीद है ये साल सभी के मंगलमय होगा !

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  3. हम हिन्दुस्तानी थोडी सी उम्मीद की रौशनी मिलते ही जश्न मनाने लगते है । क्यों हो भी ना क्योंकि ऐसे कुछ ही पल तो मिलते हमें दर्द ,दुःख को भुला कर प्रसन्न होने को । फिर थोडी देर बाद वही जीने का संघर्ष ,रोटी की तलाश चालू ।

    सच में ये पंक्तियाँ वाकई भारत को प्रर्दशित करती है बहोत ही सही कहा है आपने ....

    अर्श

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  4. आपको एवं आपके परिवार को नववर्ष की हार्दिक मंगलकामनाऐं.

    नियमित लेखन हेतु शुभकामनाऐं.

    समीर लाल

    उड़न तश्तरी

    http://udantashtari.blogspot.com/

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  5. नव वर्ष के जश्न में गुम होकर गम कम करने की बजाय नए संकल्पों से उन्नति की राह तलाशी जाए । नव - नूतन वर्ष की शुभकामनाएं ।

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  6. नव वर्ष की आप और आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं !!!नया साल आप सब के जीवन मै खुब खुशियां ले कर आये,ओर पुरे विश्चव मै शातिं ले कर आये.
    धन्यवाद

    bahut सुंदर लेख लिखा आप ने

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  7. नये साल का जश्न हिन्दुस्तानी ही नही सभी मनाते हैं शायद हिन्दुस्तानियों से कहीं बढ़कर,

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  8. हम हिन्दुस्तानी थोडी सी उम्मीद की रौशनी मिलते ही जश्न मनाने लगते है । क्यों हो भी ना क्योंकि ऐसे कुछ ही पल तो मिलते हमें दर्द ,दुःख को भुला कर प्रसन्न होने को । फिर थोडी देर बाद वही जीने का संघर्ष ,रोटी की तलाश चालू ।
    यही तो जीवन का एक सच है.... कुछ पल की खुशी , फ़िर उदासी, फ़िर संघर्ष , और जीवन का चक्र यूँही चलता रहता है.
    नववर्ष की हार्दिक मंगलकामनाऐं.
    regards

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  9. भारत को इसीलिए त्योहारों का देश कहा गया है . यहाँ त्यौहार मनाने का बहाना चाहिए बस .

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आप बताये क्या मैने ठीक लिखा