शनिवार, सितंबर 18, 2010

मै भी दर्शन कर आया रामलला और अयोध्या के .

अयोध्या राम की अयोध्या खामोश है ,चिंतित है . कल ही मैं अयोध्या में रामलला के दर्शन को गया था . जिन्दगी में पहली बार मैं अयोध्या गया .मेरे बरेली से अयोध्या ४०० कि .मी . दूर है . सुबह ४ बजे चल कर दोपहर तक मैं अयोध्या पहुच गया . रास्ते में भयंकर बारिश थी जो  सिर्फ लखनऊ को छोड़ कर बाकी सब जगह मिली . फैजाबाद से जैसे ही अयोध्या के लिए बढ़ा तो मन में श्रद्धा और साथ में भय भी था .

 २४ के फैसले को लेकर जो मीडिया में हाहाकार मच रहा है वह मुझे अयोध्या में नहीं दिखा . अयोध्या मैं घुसते ही अयोध्यावासियो से ज्यादा तरह तरह के सुरक्षा कर्मी देखकर भय और पुख्ता हुआ . पूरी मुस्तैदी से बारिश में भीगते हुए यह जवान अयोध्या के वातावरण में इस बात के संकेत दे रहे थे तूफ़ान आने को है .

और अयोध्यावासी भी चिंतित थे आगे आने वाले समय को लेकर . 


इसके आगे हमने अपना कैमरा   और सभी  समान  कार  में  रख  कर  जन्मभूमी  की  और  बढ़  गए   . कई  बैरियर  पार  करके  सुरक्षाकर्मियों  और  अयोध्या वासियों की घूरती आँखों से होते हुए कोप भवन के सामने जन्मभूमि के अन्दर जाने वाले गेट से बहुत सी जांच कराकर अन्दर घुस गए . इस प्रक्रिया में हमें लगभग एक घंटा लगा . एक लोहे का बाड़ा सा बना है जिसमे श्रद्धालू चलते  है . वह घुमाव दार रास्ता जहा कई जगह चेक पोस्ट बनी थी से होता हुआ   एक टीले के पास पहुंचा जहाँ टेन्ट में इस समय राम लला विराजमान है .अनुपम सुन्दर रामलला के दर्शन करते ही सब कष्ट विदा हो गए . हमारे साथ लाइन में कई तीर्थयात्री जो तमिलनाडू के थे मंत्रमुग्ध से दर्शन लाभ ले रहे थे लेकिन सुरक्षा कर्मियों की सखती के कारण कुछ ही पलो का श्री राम से साक्षात्कार  हुआ . उस परिसर में श्री राम के अलावा सिर्फ तरह तरह के सुरक्षाकर्मी और शैतान बंदरो का ही जमावाडा था .

मुझे गर्व था कि मैंने जिन्दगी में पहली बार अपने आराध्य की जन्मभूमि के दर्शन किये थे . सूनी अयोध्या और जन्मभूमि के आस पास सिर्फ बूटो की आवाज़े ही सुनाई दे रही थी . लौटते समय हनुमान गढ़ी पर हनुमान जी के दर्शन करके उनसे यही माँगा कि अयोध्या को सिर्फ अयोध्या ही रहने दो .

अयोध्या में घुमते समय वहां के स्थानीय निवासियों से २४ तारीख के बारे में बात हुई . किसी ने भी इस विषय में रूचि नहीं दिखाई . पटरी पर लौटी अयोध्या अब पटरी से उतरने को तैयार नहीं दिखती . चलते चलते एक महलनुमा मन्दिर की यह तस्वीर मुझे बहुत पसंद आई जो शायद कह रही थी अब अयोध्या में तोपों से सिर्फ परनाले ही चलेंगे गोले नहीं . कोई आग नहीं सब शीतल शीतल .



14 टिप्‍पणियां:

  1. आप अयोध्या आये... तो थोडा सा और आगे बढ़ जाते तो सीधा लखनऊ आ जाता... और फिर मेरा घर...

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  2. चलिये, आप तो दर्शन कर आये, बधाई हो। हमें कब मिलता है मौका, देखेंगे।

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  3. मुझे तो लगता है २४ को कुछ नहीं होगा... फैसला आयेगा... बयानबाजी होगी.. छुट पुट वारदातें भी हो.. फिर मामला अगले ३० साल तक सुप्रीम कोर्ट में...

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  4. आपको बधाई हो. वैसे वातावरण गरमा तो रहा है.

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  5. अच्छा हुआ कि आप ने दर्शन कर लिये. थोड़े दिनों बाद राम का नाम लेना भी गुनाह हो जायेगा, कोई दफा बना दी जायेगी राम-नाम लेने वालों के खिलाफ....

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  6. ‘ कोई आग नहीं सब शीतल शीतल .’
    शुभ शुभ बोले भैया :)

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  7. अयोध्या यात्रा पर बधाई हो जी :)

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  8. बचपन में एक बार गये थे .....इतने बंदर देखे थे कि अब तक याद है ....क्या अब भी हैं वहां इतने ही बंदर ???

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  9. नमस्कार,
    जन्मदिन की शुभकामनायें हम तक प्रेम, स्नेह में लिपट पर पहुँचीं.
    मित्रों की शुभकामनायें हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा देतीं हैं.
    आभार

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  10. बधाई हो ....देखें हमें कब मिलता है मौका ...

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  11. रंजन जी से सहमत हूँ ! वैसे, अयोध्या यात्रा की बहुत बहुत बधाइयाँ !

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आप बताये क्या मैने ठीक लिखा