गुरुवार, मई 12, 2022
शनिवार, मई 07, 2022
शुक्रवार, मई 06, 2022
बुधवार, जून 02, 2021
क्या योगी बड़े होकर मोदी बनेंगे ?
रविवार, मई 30, 2021
पत्रकारिता दिवस
शुक्रवार, मई 28, 2021
वीर सावरकर
गुरुवार, मई 27, 2021
योग और आयुर्वेद
बुधवार, मई 26, 2021
अप्पो दीपो भव
मंगलवार, मई 25, 2021
आयुर्वेद और रामदेव
सोमवार, सितंबर 14, 2020
हिंदी दिवस
व्यौहार राजेन्द्र सिंह को जानते है आप ?
इन्ही के अथक प्रयासों से हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिला। और इन्ही के जन्मदिवस के दिन हिंदी दिवस मनाया जाता है।
हिंदी दिवस पर एक फैशन चल गया है हिंदी को कमतर मान कर उसकी खिल्ली उड़ाई जाए। जबकि अन्तराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी अपने सशक्त दौर में पहुँच गई है। हिंदी को सम्मान देने की जरूरत है हिंदी पर अभिमान करने की जरूरत है। आज हिंदी के लेखक उदय प्रकाश Uday Prakash जी के लिखे साहित्य का दुनिया भर की भाषाओं में अनुवाद हुआ है।
हिंदी ऐतिहासिक साहित्यिक रूप से आत्मनिर्भर है।
हिंदी की महत्ता को उसकी शक्ति को देख आज माइक्रोसॉफ्ट गूगल फेसबुक जैसे संस्थान हिंदी को स्वीकार कर रहे है। उस पर शोध कर रहे है। हिंदी जीवकोपार्जन का भी सशक्त माध्यम है। एक भ्रांति है हिंदी से रोजगार नही मिलता लेकिन आज हिंदी देवनागरी विश्व के कई विश्वविद्यालयों में एक विषय के रूप में स्थापित है।
हिंदी को कमतर न समझिये हिंदी विश्व मे सबसे ज्यादा बोली और समझने वाली भाषाओं में एक है।
हिंदी दिवस पर हिंदी के प्रति अपना दृष्टिकोण बदलिये। भविष्य हिंदी का ही है अभी से स्वीकार करें।
हिंदी का सम्मान कीजिये हिंदी पर अभिमान कीजिये क्योकि हिंदी है हम वतन है हिन्दोस्तान हमारा
शनिवार, अप्रैल 25, 2020
कोरोना से मुलाकात
शनिवार, जनवरी 04, 2020
डर
शुक्रवार, जनवरी 03, 2020
अन अल हक्क
गुरुवार, जनवरी 02, 2020
ताज उछाले जाएंगे
बुधवार, जनवरी 01, 2020
शुक्रवार, नवंबर 15, 2019
गुदड़ी के लाल
गाँव गरीब में पले बढ़े कुछ होनहार अपने परिश्रम संघर्ष और योग्यता से वह सब हासिल कर लेते है जो चांदी का चम्मच मुँह में पैदा लिए लोग के लिए एक सपना है।
लेकिन बड़े लोगो की गिद्ध दृष्टि इन होनहारों पर होती है वह येन केन प्रकरेण उन होनहारों को अपने में शामिल करना चाहते है किसी भी कीमत पर।
एक गरीब परिवार का बेटा अपने हुनर से विश्वपटल पर छा जाता है। सफल व्यक्ति के साथ रिश्ता जोड़ने की चाहत बड़े बाबू साहब लोग अपनी बेटी के स्टेटस के लिए उन्हें अपना जवाई बनाने के लिए जाल फेंकते है और बड़े घर की बेटी गरीब घर की बहू बन जाती है कौन सा उस परिवार से सम्बन्ध रखना है। बेचारा वह होनहार इस चक्रव्यूह में फंस कर अपनी सुद्धबुद्ध खो बैठता है। और वह उस अंत को प्राप्त होता है जिसका वह हकदार कतई नही था।
यह वशिष्ठ नारायण सिंह के साथ हुआ जो अपना मानसिक संतुलन खोने के बाद खत्म हो गए और कुछ दिन पहले एक IPS सुरेंद्र नाथ दास ने जहर खा कर आत्महत्या कर ली ।
मृगतृष्णा में सब दौड़ रहे है दोषी सब है।
शनिवार, अगस्त 31, 2019
सोमवार, जुलाई 22, 2019
मै लौट कर आऊंगा
रविवार, जुलाई 30, 2017
दिल्ली दरबार
इंग्लैंड का किंग जार्ज पंचम ने जब १९११में दिल्ली में अपना दरबार लगाया उस समय के तमाम राज्यों के राजाओं नबाबो ने सिर झुका कर स्वागत किया और किंग जार्ज को भरोसा हुआ अगली कई शताब्दियों तक ब्रितानी हुकूमत चलती रहेगी।
लेकिन जनता ख़िलाफ़ थी और तीस सालो के अंदर ही आम जनता ने अंग्रेजो को भारत से भगा दिया।
इतिहास बहुत कठोर होता है और भविष्य बहुत निर्दयी। राज्यों के राजा नवाब की चरण वंदना से यह नही लगना चाहिए प्रजा ख़ुश है।
अति आत्मविश्वास की पराकाष्ठा और अहंकार में बहुत महीन अंतर होता है। और अहंकार तो रावण का भी नही बचा।
शेष शुभ
