असहिष्णु
वंदेमातरम को राष्ट्रीय गीत बनाते समय कुछ पंक्तियों को एक धर्म के हिसाब से उचित नही मान कर उस गीत की शुरू की नौ पंक्तियां ही शामिल की गई थी। आपत्ति इस बात पर थी उसकी एक पंक्ति में प्रतिमा स्थापना की बात थी।
सहिष्णु
आजकल एक फैज के एक गीत पर जिसमें बुत उखाड़े जाएंगे और एक धर्म का शासन होगा पर आपत्ति है तो उस पर चर्चाएं हो रही है। ताज उछालो किसी को आपत्ति नही लेकिन धर्म निरपेक्ष राज्य में एक धर्म का राज हो यह आपत्ति जनक है।
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इन बेकार की बहस से बहुत कुछ पर्देदारी है। एक नूरा कुश्ती सी है। कोई तो है जो रोज एक नया नैरेटिव सैट कर रहा है और कोई उसे हवा दे रहा है।
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आप बताये क्या मैने ठीक लिखा