मंगलवार, फ़रवरी 10, 2009

अरे भाई इलेक्शन जो आ रहे है

कब्र मे गडे मुद्दे निकाले जा रहे है

अरे भाई इलेक्शन जो आ रहे है

राम को झाड़ पोछकर चमका रहे है

गाँधी ,नेहरू, इन्द्रा पर जमी धूल छुटारहे है

नए वादे निभाने की कसम खा रहे है

दुश्मन को दोस्त और भाई बता रहे है

सत्ता पाने के लिए समझोते करा रहे है

जनता को बेबकूफ बनाने की जुगत भिड़ा रहे है

अब तो समझो भाई इलेक्शन जो आ रहे है

13 टिप्‍पणियां:

  1. आने वाले दिनों में बहुत कुछ दिखेगा.. ज्ञान दत्त जी बिल्कुल सही बोल रहे है.

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  2. अशोक चक्रधर की एक कविता है.. कुछ ऐसॊ ही... शेर और बकरी एक ही जगह पानी पी रहे.. लगता है जंगल में चुनाव आ रहे.. कुछ कुछ ऐसी ही है.. याद नहीं..

    आपने भी अच्छा लिखा.. सा्रे रिश्ते नये सिरे से गढ़ रहे.. लगता है चुनाव आ रहे..

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  3. बहुत ही सटीक लेख. बहुत अच्छा लिखा है आपने . ये भी सत्य है.

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  4. बहुत अच्छा और सटीक लिखा है ! सारे दल जुगत भिड़ाने में लगे है ! जातिवाद,सम्प्रदायवाद,गुंडागर्दी सभी को खूब खाद पानी मिलेगा !

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  5. देखते जाइए.. और क्या क्या गुल खिलते है..

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  6. बहुत सुंदर ...........
    खूब कहा है, सच कहा है....चुनाव के वक़्त सब पुरानी चीजें बहार निकलती हैं

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  7. ये तो हर पांच साल बाद येसा होता आया.
    साँप नेबला भाई-भाई ......

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  8. अब नहीं रंग बदलेंगे तो फ़िर कब बदलेंगे .अच्छा लिखा आपने

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  9. समझ गये,मगर जनता क्या करे,समझ कर भी उन्ही से काम चलाना पडता है।

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  10. Bahut hi badiya likha hai aapne.Sahi kah rahe ho satta pane ke liye samghote kara rahe ho,dusman ko dost aur dost ko dusman bana rahe ho aur sansad mein purn bahumat paane ke liye hitech prachar apana rahe ho.Badhai ho.

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  11. ha ha ha ha ha ha ha ha ha.............hi hi hi hi hi ......hu hu hu hu hu .......

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आप बताये क्या मैने ठीक लिखा