मंगलवार, मई 18, 2010

नंगई शुरू हो गयी है तो नंगई पूरी होनी चाहिए

जनगणना शुरू हो गई जोर शोर से नए नए कालमो के साथ . पिछड़ी  सोच के नेताओ की मांग स्वीकार कर जातिवार गणना शुरू हो गई . एक तरह से अच्छा है पता चलेगा ओं बी सी कितने पिछड़े है . और एक बात जब जाति बताओ की नंगई शुरू हो गयी है तो नंगई पूरी होनी चाहिए . यानी आप कौन है आपकी जाति क्या है उपजाति क्या है गोत्र क्या है आदि आदि .

अपने यहाँ खासकर नेताओ की परम्परा है मीठा मीठा हप्प हप्प कडुआ कडुआ थू  . अब मांग मानी गई है ओ बी सी की अलग से गिनती . अरे क्यों क्या गारंटी है बाद में इन में आपस में जूता नहीं चलेगा कि इस ओ बी सी में मेरी जाति के लोग ज्यादा है इस लिए मेरी मांग है अलग अलग बिरादरी की गिनती हो जैसे

        यादव -  यादव में कौन से खमरिया या घोसी 
        कुरमी -  कुरमी में कौन से कन्नोजिया या गंगवार 
         मुराव -  मुराव में कौन से सक्सेने या खमरिया 

            या 
          ब्राह्मण -ब्राह्मण कौन से सनाढ्य या साढ़े सात घर या ...... या ............ 
          क्षत्रिय -क्षत्रिय कौन से सूर्यवंशी या चन्द्र वंशी या अग्नि वंशी फिर उसकी पचासों उपजाति 
          वैश्य-   वैश्य कौन से अगरवाल ,गुप्ता , बारहासैनी, या ....................... 

इस तरह से एक सही स्थिति सामने आयेगी . दूध का दूध  पानी का पानी हो जाएगा . सिर्फ एक कालम ही तो और बढेगा . इसी तरह मुस्लिमो को सिया ,सुन्नी में बाटो फिर सययद् शेख , पठान , अंसारी ,धुना ,सैफी जैसो में बाट दो . कितना अच्छा होगा . 

हिन्दुस्तान में ठाकुर, ब्रह्मण, वैश्य ,यादव, कुरमी ,जाट ,मुराव, लोधे, कश्यप, जाटव, बाल्मीकि ,कायस्थ ,खत्री ,सय्यद शेख ,पठान ,धुना ,जुलाहे ,कुरैशी ,सैफी ,कैथोलिक ,मेथोडिस्ट ना जाने कितने और होंगे लेकिन हिन्दुस्तानी ना होंगे . 

जय हिंद जय भारत  या जय ज़ात  

12 टिप्‍पणियां:

  1. काहे गुस्सा करते हो भाई.. गिन रहे हे गिनने दो... गर्व से कहना हम भारतीय है..

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  2. ab kya karein isi bahane ye pata chal jaayega kahan kis ummeedvar ko chunaav me khada karna hai...

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  3. अच्छा है,,, आगे चलकर विभाजन के लिये आधारशिला रखी जा रही है.. कुछ हिस्से तो अभी दिख रहे हैं, जैसे एक मुसलमानों के लिये, एक बाकी अल्पसंख्यकों के लिये, एक दलितों के लिये, एक पिछडों के लिये, एक अतिपिछड़ों के लिये, एक ब्राह्मणों के लिये, एक ठाकुरों के लिये, एक वैश्यों के लिये और भी अपनी सुविधा के हिसाब से किये जा सकते हैं...

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  4. यार हम आजाद ही क्यो हुये थे??? शायद फ़िर से गुलाम होने के लिये ना!! तभी तो हम अपने को धर्म के नाम से, जात पात के नाम से बांट रहे है, ओर एक दिन फ़िर से कोई सयाना आयेगा ओर दो थप्पर मार कर हमे अलग अलग को अपना गुलाम बनायेगा

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  5. हिन्दुस्तानी ढूंढ ही कौन रहा है भाई?

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  6. सहमत धीरूसिंह जी । नंगई हो तो पूरी, नहीं तो न हो । समाज को बाँटना है तो व्यक्ति तक जाकर बाँटे । समाज को जोड़ना है तो सबको जोड़ें । संकर मानसिकता भयंकर है देश के लिये ।

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  7. और हम आत्ममुग्ध होते रहेँ अनेकता मेँ एकता कह कह कर...........

    हुँह .......!!!

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  8. सहमत

    आपसे व प्रवीण पाण्डेय जी से !!

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  9. तब तो हमें अपने रूट्स का पूरी तरह पता करना होगा। पूर्वज सरयू पार से कहां से आये? या उससे भी पहले का!

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  10. I agrees with you, this census should be complete with caste/subclass/gotras etc etc.
    As when india was awarde freedom our forfathers thought of reservation /support to Backward classes of country. however it become a daunting task to identify the classes.
    To continue to help the weaker section and avoiding the delay in identifying the classes, the caste as per so chosen as a vechicle to implement the dreams of all those whou foughted for our freedom.

    If you look and analyse carefully reservation is present everwhere from centuries, son of a king will be son, son of carpentar will be carpentar i.e his profession and lively hood is secured no one else will do this job.

    In modern context if you happen to be son of reach persion or kin of politician one seat for you is reserved in Engg college/Medical/jobs by connections. if you happens to be of same caste as your boss your promotion is Pakka. these all are the example of cover resevation in our society.

    To stop this practise and make true free society now it is required to carry out a full caste based census.
    Believe me country will not break by this execrsice , it has not broken for centuries when we investigate caste while marriages friendhip and humilate others on name of caste.

    let this excerscise be continued in the intrest of nation

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  11. I agrees with you, this census should be complete with caste/subclass/gotras etc etc.
    As when india was awarde freedom our forfathers thought of reservation /support to Backward classes of country. however it become a daunting task to identify the classes.
    To continue to help the weaker section and avoiding the delay in identifying the classes, the caste as per so chosen as a vechicle to implement the dreams of all those whou foughted for our freedom.

    If you look and analyse carefully reservation is present everwhere from centuries, son of a king will be son, son of carpentar will be carpentar i.e his profession and lively hood is secured no one else will do this job.

    In modern context if you happen to be son of reach persion or kin of politician one seat for you is reserved in Engg college/Medical/jobs by connections. if you happens to be of same caste as your boss your promotion is Pakka. these all are the example of cover resevation in our society.

    To stop this practise and make true free society now it is required to carry out a full caste based census.
    Believe me country will not break by this execrsice , it has not broken for centuries when we investigate caste while marriages friendhip and humilate others on name of caste.

    let this excerscise be continued in the intrest of nation

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आप बताये क्या मैने ठीक लिखा