बुधवार, मई 12, 2010

हिन्दी मर रही है

         
 ब्लॉग के माध्यम से हिन्दी सेवा कौन कर रहा है मैं ढूंढ़ने का प्रयत्न कर रहा हूँ . लेकिन मैं कोई हिन्दी सेवा के लिए ब्लॉग नहीं लिखता . मैं हिन्दी में इसलिए लिखता हूँ कि मुझे हिन्दी के अलावा कोई दूसरी भाषा  आती नहीं और हिन्दी में ही सोचता हूँ अपने भाव व्यक्त करने के लिए हिन्दी ही एकमात्र माध्यम है .  


हिन्दी की  सेवा कैसे की जाती है ? 


किसने की हिन्दी सेवा ? 


और हिन्दी सेवा करना जरुरी है क्या ? 


कितने ब्लोगर है जिन्हें हिन्दी वर्णमाला याद है ?


उपरोक्त प्रश्नों के उत्तर की प्रतीक्षा में हूँ 


हिन्दी वह एक भाषा जो कई भाषाओ को हरा कर अस्तित्व में आई . सिर्फ देवनागरी लिपि के अलावा हिन्दी कहीं  की ईट कहीं का रोड़ा ही तो है . तमाम भाषाओ को मिला कर संस्कृत की लाश पर हिन्दी अवतरित हुई . उर्दू ,फ़ारसी ,अरबी और संस्कृत जैसी भाषाओ का बिगड़ा रूप छावनियो की बोली कब हमने आत्मसात कर ली पता ही नहीं चला . फिर भी हिन्दी आज हमारी मातृ भाषा है मातृ भाषा इसलिए क्योकि मेरी माँ बोलती थी हिन्दी . 
मेरे विचार से हिन्दी का बच पाना अब मुश्किल है . हिंगलिश ने हिन्दी की जगह लेनी शुरू कर दी है . वह दिन दूर नहीं जब हिन्दी संस्कृत के साथ बैठ आसूं बहाएगी . 


वैसे गीता में कहा गया है जो पैदा हुआ है वह मरेगा जरुर

16 टिप्‍पणियां:

  1. Hindi maregi nahi ... ho sakta hai apna roop badal le .. kyonki geeta anusaar ... parivartan sansaar ka niyam hai ...

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  2. धीरू जी, हिन्दी नहीं मरेगी. यदि हमारे और आप जैसे लोग लगे रहेंगे तो नहीं मरेगी. संस्कृत भी नहीं मरती यदि हम लोगों ने दिलचस्पी ली होती. अब संस्कृत भी सीखूंगा..

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  3. aapna adhikansh karya hindi me karein
    mere khayal se yahi hindi ki seva hai
    hinid tab tak zinda hai jab tak log ise bolenge
    bas bolte rahiye :)

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  4. इतनी भी नरज़गी क्यों?
    हिन्दी की हम सब सेवा ही तो कर रहे हैं, अपने-अपने ढ़ंग से।
    और जब तक ये हम है हिन्दी क्यों मरेगी? फूलेगी-फलेगी।

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  5. हिन्दी सेवा कोई करे ना करे
    लेकिन
    इस काम के लिए किसी के प्रयासों को, अपने तरीके से, नीचा दिखाना
    निश्चित ही निंदनीय है

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  6. जब तक जान में जान है, भरसक सेवा करना तो धर्म है. कब कौन इसलिए सेवा करना बंद करता है कि अब बचेगा नहीं. उम्मीद का दामन थामे रहिये. बेहतरी की तरफ बढ़ रहे हैं.


    एक विनम्र अपील:

    कृपया किसी के प्रति कोई गलत धारणा न बनायें.

    विवादकर्ता की कुछ मजबूरियाँ होंगी, उन्हें क्षमा करते हुए अपने आसपास उठ रहे विवादों को नजर अंदाज कर निस्वार्थ हिन्दी की सेवा करते रहें, यही समय की मांग है.

    हिन्दी के प्रचार एवं प्रसार में आपका योगदान अनुकरणीय है, साधुवाद एवं अनेक शुभकामनाएँ.

    -समीर लाल ’समीर’

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  7. bhaiya hindi seva ki baat to unse puchhiye jo udhghosh karte firte hai har dusre blog par, baki log do aam jan hai ve kya batayenge. bade log hai jo hindi ke bahane aatmseva jarur kar lete hain apane aham ko banaye rakhne ke liye......kabhi google buzz par bhi aa kar dekhiye...
    ;)

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  8. एक अपील ;)

    हिंदी सेवा(राजनीति) करते रहें????????

    ;)

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  9. ज्ञानदत्त जी से जलने वालों! जलो मत, बराबरी करो वाली पोस्ट पर Sanjeet Tripathi देवनागरी में लम्बी टीप कर आ रहे है 11मिनट पहले।यहा आते ही वे रोमन में लिखने लग गए यह कौन सी राजनीति या सेवा हैअन्ग्रेजी की

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  10. वह दिन दूर नहीं जब हिन्दी संस्कृत के साथ बैठ आसूं बहाएगी...
    अच्छा जी!

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  11. ’नर हो न निराश करो मन को’

    भाई जी, मुझे तो लगता है कि कम से कम ब्लाग से जुड़ने पर फ़िर से हिन्दी का शौक बढ़ रहा है। नई पीढ़ी के बहुत से ब्लागर्स है, जो बहुत अच्छा लिख रहे हैं।

    इस मामले में हम तो आशावादी हैं।

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  12. धीरू जी हिंदी की दशा अच्छी नहीं है ... भविष्य तो और अंधकारमय लगती है पर रात के अँधेरे के बाद ही सुबह का उजाला आता है | देखिये पश्चमी प्रभाव ने हिंदी का खूब नुक्सान किया है ... एक ना एक दिन पश्चिमी प्रभाव घटेंगे जरुर | पश्चिम के विद्यालयों में तो अभी से ही अन्य भाषाओं के महत्व को समझाया जाता है .... शायद अपने देश में इसे समझने में थोड़ी देर लगेगी |

    हिम्मत बनाये रखिये ... | बाकी आदरणीय समीर लाल जी से सहमत हूँ |

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  13. आप हैं, हम हैं ।
    हिन्दी में अब भी दम है ।

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  14. aadrniy hindi hmaari raasht bhaashaa he lekin raashtr en kai sthaanon pr ise nfrt ki nigaah se dekhi jaati he jese mhaaraashtr,mdraas,krnaatk,kerl vgeraa to fir jhaan hindi raashtrbhaasaa se nfrt he vhaan to raashtrvirodhiyon kaaa jmaavdaa hi khaa jaayegaa. akhtar khan akela kota rajasthan

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  15. सही है.. हम तो मजबूरी में हिंदी लिखते है..

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आप बताये क्या मैने ठीक लिखा