शनिवार, मई 09, 2009

नफरत से नेता बनने का आसान तरीका -समाज को कहाँ ले जाएगा

नसबंदी वह भी जबरदस्ती कई कदम आगे का एजेंडा दिल मे या कहे खून मे समाया हुआ है इस गाँधी केउसके ब्यान या कहे उसकी आग उगलती जबान क्या साबित करना चाहती है

क्या नफरत से नेता बननेका यह आसान तरीका जब फैशन बन जाएगा तो समाज को काटना पीटना आग मे झोकने के अलावा बचेगा क्या । राजनीति का यह घिनोना रूप समाज को कहाँ ले जाएगा । इन लोगो का सामाजिक बहिष्कार जरुरी हो गया है । वरना यह सत्ता के भूखे भेडिये जनता के अमन चैन को भाई चारे को रोंध देंगे ।

उन राजनेतिक दलो का भी बहिष्कार हो जो इन सापो को दूध पिला रहे है क्योकि अगर भारत को अखंड और खुशाल रखना है तो यह छोटा सा कदम उठाना ही होगा ।



12 टिप्‍पणियां:

  1. bilkul sahi kaha aapne aap shuru karen ham aapke saath hain

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  2. भाई धीरू सिंह जी,

    मैं नहीं जानता की आप ऐ़सा किस मकसद से कह रहे हैं, शायद समाचार पत्रों में या टीवी चैनल पर वरुण जी का कोई बयान पढ़ा होगा.

    मेरे हिसाब से गलत बयानबाजी यदि दोषी है तो उसका प्रचार-प्रसार करने वाले एवं प्रतिक्रिया जाहिर करने वाले भी उससे कही अधिक दोषी हैं.

    मसलन अपने दैनिक जीवन में हम आप ही नहीं अनेक बुद्धिजीवी भी तरह तरह के बयान देते रहते हैं, यहाँ वहां लिख कर या अपने ही ब्लॉग पर लिख कर अपनी अपनी मानसिकता जाहिर करते हैं पर आज के टीवी चैनल या समाचार पात्र उनको हेअद्लिने बना कर प्रचारित प्रसारित तो नहीं करते, न ही तिल का ताड़ बनाते हैं, फिर वरुण के बयान को इतनी अहमियत क्यों?

    किसी को भी अहमियत देना अच्छी या बुरी द्रिस्ती से सब मुझे स्वार्थ का चक्कर लगता है, अपना या किसी वर्ग विशेष का हित संवर्धन के अलावा और कुछ नहीं. कारन की कोई भी समाचार पत्र प्रकाशित समाचारों की जिम्मेदारी नहीं लेते., बयान देने वाले भी अपने बयान से मुह मोड़ लेते हैं, अंततः बचता क्या है सिवाय हम आप में दहसत या बुरा भाव बैठने के.

    आशा है आप मेरे कमेन्ट को अन्यथा न लेते हुए जनहित में समझेगें. ऐसी ही बातों पर कभी मैंने लिखा था कि...

    न दे महत्त्व हो भयभीत उन्हें
    हिंसा फैलाने को जो अकुलाते
    हो महत्त्वहीन ये अतिवादीगण
    किस भांति रहेंगें तब इठलाते

    चन्द्र मोहन गुप्त

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  3. aap ka kahna सच है............पर ऐसे तो saree raajnitik paartiyon का safaaya हो jaayega...........
    सब एक से badh ker एक हैं

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  4. क्या नफरत से नेता बननेका यह आसान तरीका जब फैशन बन जाएगा तो समाज को काटना पीटना आग मे झोकने के अलावा बचेगा क्या । राजनीति का यह घिनोना रूप समाज को कहाँ ले जाएगा । इन लोगो का सामाजिक बहिष्कार जरुरी हो गया है । वरना यह सत्ता के भूखे भेडिये जनता के अमन चैन को भाई चारे को रोंध देंगे ।

    सही कहा आपने.....!!

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  5. विवादास्पद बयान देकर प्रसिद्धी पाना राजनीती में सोर्ट कट बन गया है इस तरह के बयान इसी मानसिकता की उपज है |

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  6. तुष्तिकरण की राजनीति बन्द हो तो ये नफरतवादी स्वत: हाशिये पर होंगे!

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आप बताये क्या मैने ठीक लिखा