गुरुवार, मार्च 04, 2010

बरेली के दंगे और कर्फ्यू का तीसरा दिन

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आज भी हम कर्फ्यू के कारण घरो में घुसे  बैठे है . थोड़ी देर की मोहलत मिली लेकिन सख्ती बरकरार रही अगर १० % सख्ती उस दिन होती तो दंगा नहीं फैलता . कितना अजीब है हमारे शहर की आग की तपिश सिर्फ हमें ही झुलसा रही है . इतनी आगजनी के बाद भी किसी  राष्ट्रीय समाचार पत्रों ,समाचार चैनलों ने हमें भुला दिया . यदि यह दंगा गुजरात में होता तो अभी तक तो हजारो लीटर आसूं सडको को गीला कर देते . खैर बहुसंख्यक लूटे है पिटे है कोई बात नहीं लेकिन अल्पसंख्यको को कोई तकलीफ नहीं हुई . हमारी धर्म निरपेक्ष छवि पर कोई आंच नहीं आयी अगर आ जाती तो हम मूंह कहाँ दिखाते .

दंगा एक ऐसा शब्द है जो मानवता को नंगा करने के सन्दर्भ में कहा जाता है . हम सहिष्णु बहुसंख्यक शायद पिटने के लिए  ही है मन खिन्न है . इसके सिवा कुछ कर भी नहीं सकते .

 यदि कानून अपना काम करे सख्ती से करे तो दंगो का नामो निशान मिट जाए लेकिन राजनीति का पैर कानून को लडखडा देता है और दंगाईयो को सहारा देता है . राजनितिक हस्तक्षेप ने कानून के प्रभाव को कम किया है . प्रशासन को पंगु किया है .पुलिस का मनोबल तोडा है . अगर इन संस्थाओ के साथ राजनीति का मज़ाक नहीं रुका अगर यह ह्तौत्साहित हो गई तो हम जन गण मन तो नहीं ही रहेंगे लेकिन यह भाग्यविधाता भी नहीं रहेंगे . और वह दिन दूर नहीं जो यह सब होने को है .

सुनियोजित दंगे एक प्रकार का आतंकवाद ही है . इस पर कठोरता से ही रोक लगानी चाहिए . दंगाई चाहे बहुसंख्यक हो या अल्पसंख्यक हो सबको सजा   एक ही लाठी से मिले .

बरेली के दंगे और कर्फ्यू का तीसरा दिन

12 टिप्‍पणियां:

  1. सुनियोजित दंगे एक प्रकार का आतंकवाद ही है . इस पर कठोरता से ही रोक लगानी चाहिए . दंगाई चाहे बहुसंख्यक हो या अल्पसंख्यक हो सबको एक ही लाठी से मिले .


    बिलकुल सही कहा आपने.... सहमत....

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  2. आप सभी की सलामती की कामना करता हूँ !

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  3. जल्‍द सबकुछ ठीक हो जाए .. यही कामना करती हूं !!

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  4. "यदि यह दंगा गुजरात में होता तो अभी तक तो हजारो लीटर आसूं सडको को गीला कर देते . खैर बहुसंख्यक लूटे है पिटे है कोई बात नहीं लेकिन अल्पसंख्यको को कोई तकलीफ नहीं हु"

    nICE

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  5. danga kisi khas barg ko nuksan nahi pahuchata..
    isse manawta ki hatya hoti hay..jo bilkul thik nahi. hame iska biradh karna chaahiye.

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  6. धीरू भाई,
    शान्ति -सद्भावना की कामना ।
    सप्रेम,
    अफ़लातून

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  7. Sharmnaak hai ye desh ke liye, manavta ke liye, media ke liye secularism ke liye aur politics ke liye

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  8. यदि यह दंगा गुजरात में होता तो अभी तक तो हजारो लीटर आसूं सडको को गीला कर देते

    सही व सटीक कहा आपने !!

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  9. सवाल ये नही है कि क्या हुआ है सवाल ये है कि "भविष्य में इस की पुंरावर्ती को कैसे रोका जाये?" जो दंगाई हैं, एक छोटी सी रेहर्सल कर गये अगर सरकार व प्रशासन ने दोषीयों के विरुध कड़ी कार्यवाही नहीं की तो भविष्य में यह दंगा पूरे मन्ड्ल में फैलेगा और इस्बार बहुसंख्यक भी पूरी त्यारि से होगा। क्योंकी अभी तॅक ऐसे धोखे की उसे उम्मीद नहीं थी।

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आप बताये क्या मैने ठीक लिखा