मंगलवार, मार्च 23, 2010

हे ईश्वर मुझे तेरा यह कर्म मुझे अच्छा नहीं लगा

कुछ ही साल हुए थे वह दुल्हन बन कर आई थी . सुन्दर और मृदुभाषी थी वह . एक बेटी की माँ . कुछ दिनों से बीमार थी एक दिन ही अस्पताल में भर्ती रही शाम को डाक्टर ने कहा वह सही है उसे आप घर ले जा सकते है . सब खुश थे क्योकि आज ही उस का जन्मदिन था . और घर पर एक उत्सव सा तो ही सकता था . ख़ुशी ख़ुशी वह घर आई . घर में घुसते ही वह कुछ असहज हुयी जब तक कुछ होता वह जन्मदिन वाले दिन मृत्यु की गोद में समां गई . 


वह पत्नी थी मेरे बचपन के साथी मेरे दोस्त शोभित की . आज ही शमशान से  उसके  अंतिम संस्कार में शामिल होकर  लौटा हूँ .


 कुछ सवाल मेरे मन को उद्धेलित करते है .विश्वास को डिगाते है , ईश्वर पर प्रश्नचिन्ह लगाते है जबकि मैं पूरे नवरात्र व्रत रखा हूँ 


 क्या वह इस तरह मृत्यु के योग्य थी उस बेचारी ने तो कोई पाप भी नहीं किया होगा . उसकी मासूम सी बेटी का क्या गुनाह था जो छोटी सी आयु में ही वह माँ से दूर कर दी गई . प्रभु इच्छा कह कर कब तक हम अपने दिल को तसल्ली दे . एक माँ की अर्थी पर विलखती मासूम बेटी को देखा है मैंने . एक बाप को ,एक माँ को ,एक पति को , एक भाई को , एक सास को ,एक ससुर के क्रदन को सुना है मैंने . 


हे ईश्वर यही तेरे कर्म मुझे समझ नहीं आते . आखिर क्या बताना चाहता है तू क्या समझाना चाहता है तू . आज तूने जब यह द्रश्य देखा होगा तो तेरी आँखे भी तो नम हुयी होंगी . क्या होगा उस मासूम बेटी का ................



3 टिप्‍पणियां:

  1. पाप-पुण्य के बारे में तो नहीं कह सकता, इतना जरूर कहूंगा कि यदि धर्म के नाम पर लोगों का शोषण किया गया तो धर्म के आधार पर मनुष्य को दुष्कार्य करने से रोकने का भी काम लिया गया. ईश्वर मृत आत्मा को शांति दे.

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  2. इस का जबाब तो सिर्फ़ उस भगवान के ही पास है, लेकिन आप का यह लेख पढ कर मन बेचेन हो गया कि उस छोटी बच्ची का क्या कसूर है, क्या होगा उस बच्ची का,भगवान मृत आत्मा को शांति दे.

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  3. हां, बहुत कुछ ऐसा घटित होता है जो समझ नहीं आता। इस लिये पुनर्जन्म और कर्मफल सिद्धान्त पर मन पुख्ता होता जाता है।
    आखिर ईश्वर इर्रेशनल तो नहीं हो सकता।

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आप बताये क्या मैने ठीक लिखा