बुधवार, मार्च 25, 2009

कश्मीर मे हो रहे शहीद सैनिको को भी तो याद कर लो मेरे साथियों

एक युद्ध जो आज कल कश्मीर मे चल रहा है उस पर हमारी नज़र तो पड़ रही है लेकिन चर्चा लायक नही समझ रहे है हम लोग , क्यूंकि वह तो कश्मीर मे रोज़ की बात है । मुंबई का हमला तो हम को हिला देता है लेकिन कश्मीर पर अघोषित युद्ध हमें आंदोलित नही कर रहा है न जाने क्यों ? कितने जावांज सैनिक शहीदहो गए उनके बारे मे कोई मोमबत्ती नही जल रही

जाने कितने कसाब कश्मीर मे घुस रहे है आज ही खबर है लश्कर के ४०० आतंकवादी घुसपैठ के लिए तैय्यार हैऔर हम लोग बेखबर आराम से दो कौडी के नेताओं के बयानों पर मज़े ले रहे है , दुःख प्रकट कर रहे हैऔर एकखतरा जो देश पर मडरा रहा है उसके बारे मे सोचने की भी फुर्सत नही है हमें

सोचे इस ओर भी सोचे हो सके तो देश के शहीदों के प्रति जो कश्मीर मे देश के किए जान कुर्बान कर रहे है रोज़

12 टिप्‍पणियां:

  1. आपने बिलकुल सही मुद्दा उठाया है कश्मीर की घटनाओ को तो हम रोज मर्रा की घटनाये समझ अनदेखी कर देते है |

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  2. मुम्बई हमले में मारे गये लोग मीडिया के लाडले थे । कश्मीर में तो आये दिन इस तरह की घटनाएँ होती रहती हैं । इन पर मीडिया ध्यान देने लगा तो नाच - गाने ,हँसी - ठिठोली का क्या होगा ? टीआरपी का क्या होगा ? मुफ़्त में समाचार देखने के बाद इतने नखरे , नहीं चलेगा यह सब । दुख केवल अमीरों का ही होता है । गरीबों का क्या है ,वो तो पैदा होते ही हर रोज़ मरते हैं ।

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  3. ४०० आतंकवादी घुसपैठ अरे बाबा इन्हे घुस पैठिया ना कहे यह तो हमारे नेताओ के वोट बेंक है, देश जाये जनता जाये भाड मै...
    बहुत अच्छा लिखा आप ने अगर किसी भी सरकार को काशमीर का फ़िकर होत तो सब से पहले धारा ३७० को हटाते.
    धन्यवाद एक सच्ची बात कहने के लिये

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  4. धारा ३७० के बारे में बचपन से सुन रहा हूँ.पता नहीं ये हटा क्यों नहीं. नेतायों के लिए गाली लिखना चाहता हूँ. दुःख होता ये इन नेतायों को देखकर जो देश को पता नहीं कहाँ लेकर जा रहे है.

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  5. ये सब तब तक झेलना पड़ेगा जबतक भारत की राजनीतिक व्यवस्था में "कांग्रेसीपन" रहेगा। नयी राजनीतिक व्यवस्था लाओ, धारा ३७० हटाओ, काश्मीर को हिन्दू बहुसंख्यक बनाओ; तभी भारत का भविष्य निष्कंटक होगा| नहीं तो भारत गुलाम था; अभी भी विदेशी का ही "रिमोट शासन" है; कल और भी खराब हो सकता है यदि हम नहीं चेते !

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  6. भई मीडि्या तो व्यस्त है वरुण गाँधी में, उसे कहाँ समय है इसकी पड़ताल करने के लिये? और पड़ताल करके भी क्या कर लोगे… सेना कह रही है "हम तैयार हैं…" एंटोनी कह रहे हैं "सेना तैयार हैं…", लेकिन सोनिया कह रही हैं "ठहरो अभी चुनाव तैयार है…"

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  7. गाजियाबाद में देश ने एक होनहार सिपाही खोया है .... एक मुठभेड़ ख़त्म हुई अब दूसरी शुरू होगी .ऐसा लगता है हिन्दुस्तान का एक बड़ा तबका भी अब कश्मीर को अपना हिस्सा नहीं मानता है .कभी कभी सोचता हूँ की कश्मीर अगर मिल भी जाये तो फिर क्या करेगा पाकिस्तान ????

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  8. पहले अपने पालतू सेक्युलर संस्थाओं द्वारा सेना पर मानवाधिकार के आरोप लगा कर सरकार पर सेना के हाथ बाँध देने का काम होता है, फिर घुसपेठ होती है...हमारे सिपाही मारे जाते है....अत्यंत दूर्भाग्य की बात है. देश के दुश्मन बाहर से ज्यादा अन्दर है.

    आपने सही लिखा है...

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  9. कश्मीर में यह दैनिक युद्ध में सेना को सतत झोंके रखना शायद सेना के साथ ज्यादती है।
    विकट परिस्थितियों में सैनिक वहुत अच्छा काम कर रहे हैं - छद्म ह्यूमेन राइट्स के लम्पटों की हांव हांव के बावजूद।

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  10. सब कहने-सुनने-लिखने वाली बड़ी-बड़ी बातें हैं बस...

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आप बताये क्या मैने ठीक लिखा