गुरुवार, मार्च 19, 2009

आश्चर्य- राजनीति मे किया वादा निभाया

राजनीति मे एक वादा किया और निभा भी दिया । पिछले २५ सालो से चुनावी राजनीति मे सक्रिय मेरे पिता ने वादा किया था वह चुनाव नही लडेंगे और उन्होंने निभाया भी । तीन बार सांसद और वह भी निष्कलंक कोई आरोप नही ,न भ्रष्टाचार न परिवार वाद आप लोग तहकीकात कर सकते है ।

एक खुली किताब सा जीवन , हर क्षेत्र मे सक्रिय कृषि ,किसान और आम आदमी के लिए समर्पित व्यक्तित्व ,विरोधी भी जिनकी इज्ज़त करते है ऐसे पिता है मेरे । उनके बारे मे लिखने बैठू तो कई दिन लग जायेंगे अभी दो बात सिर्फ़

१- आज तक अपने पैसे से चुनाब नही लड़ा जनता ने चंदा दिया आम आदमी ने आप शायद विश्वास नही करेंगे लेकिन यह सच है । अगर चंदा बच गया तो वह स्कूलों को दे दिया साक्ष्य उपलब्ध है ।

२- ग्रामीण क्षेत्र होते हुए भी आज तक बन्दूक ,रायफल के साए मे कभी नही चले । आज भी अकेले चलते है बिना भय के क्यूंकि स्वच्छ राजनीति की , दुश्मनी को दोस्ती मे ही बदलवाया ।

संघर्ष सतत संघर्ष की भावना लेकिन शायद आज की राजनीति के हिसाब से आउट ऑफ़ डेट ऐसा मानते है वह क्योंकि मूल्य आधारित राजनीति को कही काला पानी की आजीवन कारावास की सज़ा हो चुकी है । आज राजनीति का मूल मन्त्र है सत्ता सिर्फ़ सत्ता किसी भी कीमत पर

13 टिप्‍पणियां:

  1. कहां गए ऐसे नेता।!! काश! कि ऐसे दस नेता भी देश की राजनीति में हों तो देश की हालत दसगुना अधिक सुधर जाती।

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  2. satya vachan... aaj aise hi rajnitigya chahiye is desh ko ...


    arsh

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  3. ब्लोगिंग जगत में स्वागत है
    लगातार लिखते रहने के लि‌ए शुभकामना‌एं
    भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
    लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
    कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
    http://www.rachanabharti.blogspot.com
    कहानी,लघुकथा एंव लेखों के लि‌ए मेरे दूसरे ब्लोग् पर स्वागत है
    http://www.swapnil98.blogspot.com
    रेखा चित्र एंव आर्ट के लि‌ए देखें
    http://chitrasansar.blogspot.com

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  4. bhai dheeru singh ji ,aapne jo kuchh apne pitashree ji ke baare me jo likhaa wo poorntya saty hai rahi waayde ki baat wo to rajput biradri ke liye aavashyak hai ,kyonki raghukul reeti sada chali aayi praan jaaye par bachan naa jaai or rhi chunaaw ladne naa ladne ki baat wo to chande ke besh par ho nahi saktaa ,ab to mooly aadhaarit rajniti rah gayi hai yadi satta me achchhe logo ko aanaa hai to chunaaw ladnaa padegaa ab jantaa bhi chandaa denaa nahi chahti kyonki unko netaaon par bharosaa hi nahi rahaa ,doosre ab to ticket bhi good will se nahi paise se hi milte hain pahle paarty kjo motaa chandaa do or fir ticket maango varnaa raasta naapo ,kewal 20 ya 25 netaaon ko chod kar bade se bade netaa ko bhi ticket kaa muly to chukaana hi padegaa ab saaf suthre or hamaare jaise yaa aap jaise logon ki jarurat nahi hai ,ab to khoob paise kamaao or khoob paisaa chunaav me lutaao or fir khoob paisaa banaao ,aap shaayad bhali bhaanti jaante honge ki vidhaayak bante hi kshetr ke bade bade vyaapaari udyogpati .bhoomafia,or naa jaane koun -koun najraana lekar khade ho jaate hai so karod 2 karod fooko or 25,50 karod banaao isi kaa naam rah gyaa hai rajniti ---dhanyvaad sahit

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  5. जिन्हें राजनीति में होना चाहिए वे राजनीति से सन्यास ले लेंगे तो कैसे चलेगा?
    घुघूती बासूती

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  6. बहुत ही सुंदर लगा यह पढ कर, काश ऎसे कुछ ओर नेता हो हमारी राजनीति मै.... भाई हमारा नमन हमारा प्राणाम आप के पिता श्री को.
    धन्यवाद

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  7. धीरू सिंहजी
    आज राजनिति मे ऐसे ही महापुरुषो कि जरुरत है। आपकि इस बात से मै भी भावात्मक हो गया अपने देश के प्रति व देश के ऐसे महान सपुत के बारे मे पढकर। आपकी भावनाको मै बडी ही करीब से महसुस कर सकता हु। क्यो कि मेरे पापा भी स्वतन्त्रता आन्दोलन कि लडाई लडने के बाद अपना २५वर्ष से मृत्यु शैया तक सर्वस राजनिती मे झोक दिया था। वो हमेशा ही कहॉ करते थे इमानदार व्यक्ति का राजनिति मे काम नही। उनके राजनिती जिवन के अन्तिम अनुभव यह थे-" मुझे कहा करते कि -"बेटा कही चपरासी कि नोकरी कर लेना पर राजनिती कि तरफ मुह भी मत करना क्यो कि वहॉ बईमानी/ झूट/ और चोरी करने वाला व्यक्ती ही काबिल गिना जाता है। अतः आपके पिताजी के मुल्य कदापी खत्म नही होगे। ऐसे महान व्यक्ति ससार मे हमेशा ही पुजे जाते है। बहुत अच्छी बात कि आज आपने ब्लोग पर काश: राजनितिज्ञ इसे पढे और सबक ले।
    व्यक्ति जन्म से नही अपने कर्म से महान बनता है।
    त्रृटी के लिये क्षमा।
    ( हे प्रभु यह तेरापन्थ कि इकाई ब्लोग "मुम्बई टाईगर" )

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  8. धीरू जी!
    बहुत अच्छा लगा जो आपने लिखा. आपके पिता श्री का नाम कृपया बताने का कष्ट करें .
    www.mifindia.org

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  9. नेताओं में अच्छाई तो अब विलुप्त प्रजाति की तरह हो गई है.. इसके संरक्षण के प्रयास किए जाने चाहिए.. :)

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  10. इस समाज में ऐसे लोग भी है ...वाकई !

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  11. धीरू जी
    अच्छा लगा जान कर की कोई तो है जो आज भी अपने वादों पर टिकता है. नहीं तो कोन आज के दौर में अपनी सोच और किये में विशवास करता है. हमारा प्रणाम है ऐसे कर्मवीरों को

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  12. ऐसे? उन्हें चुनाव जरूर लड़ना चाहिये था।

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आप बताये क्या मैने ठीक लिखा