शुक्रवार, अक्तूबर 01, 2010

क्या अयोध्या को वेटिकन या मक्का जैसा दर्जा मिले ?



मेरे एक दोस्त है एहतराम सद्दीकी उनका कल शाम मेरे पास फोन आया और कहा यह फैसला तो हम बैठ कर पहले ही कर सकते थे क्यों साठ साल खराब किये . उनकी यह बात मुझे अन्दर तक झकजोर गई . कितना सही कहा एहतराम भाई ने . लेकिन कल के फैसले पर बहुत से राजनितिक दल खुल कर नहीं बोल रहे है . क्या कारण है वह बनावटी ब्यान से सिर्फ खानापूर्ति कर रहे है . और फैसले का स्वागत भी खुले दिल से नहीं कर पा रहे है . शायद फैसले की तरफ दारी उन्हें सेकुलर ना रहने दे . इसलिए कहा जा रहा है आगे की राह खुली है असंतुष्ट पक्ष अपील कर सकता है .

अयोध्या  का फैसला जैसा भी है हमें मंजूर है . संतुष्ट तो नहीं फिर भी संतुष्टि है चलो मान जाओ . और हम तो जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये को मानने वाले है . १/३ ,१/३ ,१/३ भी हमें मंजूर है लेकिन फैसले का क्रियान्वन होना बहुत जरुरी है . कैसे होगा कब होगा इसका फैसला जल्द होना चाहिए . और उसके लिए एक योजना हमारे दिमाग में है जो आपके सामने है . 


मुस्लिम इस फैसले से इसलिए भयभीत किया जा रहा उसे याद कराया जा रहा है अयोध्या तो झांकी है मथुरा ,काशी बाकी  है . लेकिन इन बातों पर रोक लगानी पड़ेगी . अयोध्या अयोध्या है इसे औरो से जोड़ना ठीक नहीं . यह भारत के भविष्य के लिए भी सेहतमंद नहीं . इसलिए जो एक क़ानून बना था कि १९५० के बाद जो पूजा स्थलों का स्टेट्स था वह बरकरार रखा जाए उसे सखती से लागू किया जाए और कही अदालतों में इस तरह के मामले है उन्हें तुरंत निपटाया जाए . अगर समझदार मुसलमानों को समझाया जाए तो उन्हें आपति नहीं होगी यह मुझे विशवास है . 


राष्ट्रीय अस्मिता के प्रतीक के तौर पर अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो . यह देश के लिए एक सौहार्द का एक तीर्थ हो .निश्चित मानिए अयोध्या का राम मन्दिर जिस दिन बन गया उसी दिन से भारत झूम कर प्रगति की तरफ बढता जाएगा और एक बार फिर से विश्व गुरु का दर्जा प्राप्त कर लेगा .

मैं यह भी नहीं कहता अयोध्या को वेटिकन और मक्का  जैसा  दर्जा दिया  जाए लेकिन अयोध्या को अयोध्या रहने देना चाहिए . अदालत का फैसला आम लोगो ने तो तहे दिल से स्वीकार कर लिया है लेकिन जिनकी रोटी इस मुद्दे से चल रही थी वह कैसे अपने पेट पर पड़ी लात को सह ले . वह खुराफाती लोग मिल कर इस फैसले का दबी जबान से विरोध कर रहे है . और परेशान है अभी तक सड़क पर धुँआ क्यों नहीं दिख रहा . लेकिन समझदार जनता समझ चुकी है इन बाज़ीगरो और सौदागरों को इसलिए इनकी दुकाने बंद हो जाए तो अच्छा है .

13 टिप्‍पणियां:

  1. इंशाअल्लाह! सब ठीक होगा,धीरु भाई!

    राम! राम!

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  2. ईस्ट इज़ ईस्ट एण्ड वेस्ट इज़ वेस्ट, नेवर द ट्वेन शल मीट :)

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  3. सच कह रहे हैं, बहुत पहले ही निर्णय हो जाना चाहिये था।

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  4. सच कह रहे हैं, बहुत पहले ही निर्णय हो जाना चाहिये था।

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  5. आपकी गणित बहुत खराब है धीरू सिंह जी.......1/3, 1/3 1/3 नही है बल्कि ये 2/3 और 1/3 है...।

    चलिये अब बाबरी मस्ज़िद तो आपकी हो गयी अब आप एक काम और करे....

    "ताजमहल को भी तेजोमहल हाईकोर्ट से घोषित करा ले क्यौंकि जब बगैर सबुत के मस्ज़िद को सिर्फ़ आस्था के नाम पर मंदिर घोषित करा जा सकता है तो एक मकबरे को भी मंदिर बनाया जा सकता है।"
    ==========
    "हमारा हिन्दुस्तान"

    "इस्लाम और कुरआन"

    Simply Codes

    Attitude | A Way To Success

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  6. "ताजमहल को भी तेजोमहल हाईकोर्ट से घोषित करा ले क्यौंकि जब बगैर सबुत के मस्ज़िद को सिर्फ़ आस्था के नाम पर मंदिर घोषित करा जा सकता है तो एक मकबरे को भी मंदिर बनाया जा सकता है।"

    मन्दिर और मूर्तियाँ तोडकर सैकडों मस्जिदें भी बनी हैं, मकबरे भी और मदरसे भी। जन्मभूमि सिर्फ इसलिये अधिकार नहीं हो सकती कि वहाँ एक मस्जिद बना दी गयी थी। असहिष्णुता का यह तो कई सदी पुराना है, बमियान के बुद्ध को तो इस्लाम के नाम पर हाल ही में तोडा गया है, उसके पुनर्निर्माण के बारे में क्या ख्याल है? अभी, 40 साल बाद या 400 साल बाद?

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  7. ॒ जनाब काशिफ़ आरिफ़
    व्यर्थ की बाते ना हो तो अच्छा है जो है उसी से काम चला लेंगे . अगर पहले की खोजे हो तो आरिफ़ साहब आप भी ४ , ५ या उससे पहले की पीढियो में हम जैसे ही होगे अगर अरब से ना आये हो

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  8. भैया किस भले मानुस ने कहा कि हम मुस्लमान है शरियत गयी माँ चु.... .

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  9. आगे आगे देखिये होता है क्या ?

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  10. बहुत बढ़िया ........
    काम कि चीज है जरुर पढ़े .... और हाँ एक टिपण्णी अवश्य कर दे ...
    http://chorikablog.blogspot.com/2010/10/94.html

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  11. होई हो वही जो राम रची राखा ...

    राम जी ने फ़ैसला दिलवाया है ... मंदिर भी बनवा लेंगे .... भव्य मंदिर ...

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  12. kashif jee,

    bhedbhaav nahi hua hai aapke saath, kiya aap jante hain Afganistaan mei babaar kee kabra pey waha ke afgaan log kabhi joote maara karte the kyonki islam ke mutabik babar ne koi nek kaam nahi kia hai.

    Aap faizabad ke nahi hai, isliye aapko malum nahi hai ki faizabad ke bande azaadi se pehle babri masjid me namaaz nahi padte the kyonki woh namaz karne layak pak jagah nahi thi.

    Is mulk mei musalman kee utni hee value hai jitni hindu, sikh yaa isai kee.
    Pakistan mei to musalman kitni behtreen jindagi jee rahe hai yeh sab jaante hain.

    Pakistan mei hinduo ke kiya haal hai pata hai aapko.
    hindustan mei musalmano ko jitni azaadi aur samman milta hain, pakistan mei to uska 1% bhi nahi milta hai.

    Bekar kee soch mat paaliye, rahi baat Tajmahal kee, kuch log hai jo shanti se rehne nahi chahte woh is tarah kee baat karte hain.

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आप बताये क्या मैने ठीक लिखा