शुक्रवार, अक्तूबर 29, 2010

काश आज भारत में तीसरी श्रेणी का रेलवे कोच होता तो राहुल गांधी अब तक महात्मा गांधी बन चुके होते

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काश आज भारत में तीसरी श्रेणी का रेलवे कोच होता तो राहुल गांधी अब तक महात्मा गांधी बन चुके होते . सामान्य श्रेणी में राहुल की मुंबई यात्रा धन्य कर गई . आज़ादी के साठ साल के बाद अब कांग्रेस का नाहर यह खोजने  निकला है गरीब रोटी के लिए परदेस क्यों जाता है . क्या कारण है ? 


कारण साफ़ है हमको पता है सबको पता है .क्या  कोई ऐसा नहीं  जो राज कुमार को बता दे कि वह नंगा है ............. 



15 टिप्‍पणियां:

  1. नहीं जी, वे दूसरी श्रेणी के गांधी जो ठहरे :)

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  2. मित्र, एक हल्की सी परात में दो मुट्ठी मिट्टी उठाने पर मीडिया दिखा देता है कि इतना श्रम दान दिया. हमारे गांव का मुलुआ रोज श्रमदान करता है और कभी कभी तो उसे श्रमदान का मौका भी नहीं मिल पाता और उसे भूखा सोना पड़ता है. पेड न्यूज जैसा ही है रिपोर्टिंग का यह तरीका.
    युवराज है आखिर...

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  3. यह केवल नौटंकी के अतिरिक्त कुछ नहीं ,जनता सब समझती है,लेकिन राहुल जनता को बेवकूफ समझते है.

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  4. कुछ दिन पहले शताब्दी में बैठकर दिल्ली जाते हुये इन पर जानलेवा हमला हो चुका है। ये अलग बात है कि कुछ लोग कहते हैं कि किसी शरारती लड़के ने गाड़ी पर पत्थर मारा था(जो आमतौर पर करते ही रहते हैं लड़्के, हमने खुद कई बार लोगों के सर फ़टते देखे हैं ऐसे हादसों में)। अब आप सोचिये कि यदि तृतीय श्रेणी होती और राहुल बाबा उसमें जाते तो कितना खतरा रहता? क्या होता फ़िर देश का?

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  5. 00/10

    व्यर्थ लेखन
    कुछ साथक लेखन करें

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  6. कारण हमें पता है.. पर अगर वो बिना हो हल्ला मचाये ट्रेन में सफर कर रहे है तो क्या बुरा है.. कोई तो ईमानदार कोशिश कर रहा है..

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  7. लगता है उस्ताद जी! भी उसी डिब्बे में थे जिसमें 40 साल का यह बबुआ!

    आपकी पोस्ट बहुत सार्थक है,क्या सिर्फ कविता/कहानी बाजी ही सार्थक ब्लोग लेखन है?

    नहीं। बिल्कुल नहीं। राजनैतिक चर्चाओं से बचना सामाजिक रूप से घातक है।

    इन युवराज के कार्य-कलापों पर देश का बहुत कुछ दाव पर लगा है।
    यह सब प्रचार तंत्र का खेल है, मीडिया में इस तरह की खबरे बेचना भी इसी खेल का हिस्सा है। इस देश में 25 वर्ष से कम आयु के लोग अब 50% होने को हैं। और यह 40 साल का नौजवान अभी देश को ही समझ रहा है, इतनी उम्र क्या दूध पीने में लगा दी इन्होनें?

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  8. अब हैं तो आखिर गांधी ही ना...!

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  9. राहुल बाबा है अभी, दुनिया को समझने निकले हैं। गाँधीजी ने इनके नाना को अपना उपनाम दे दिया था तो अब ये उसकी सार्थकता खोज रहे हैं। आपका शीर्षक बेहद पसन्‍द आया।

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  10. धीरूसिंह जी. आप बधाई के पात्र हैं - एक दम नया और मौलिक बात कही आपने.......

    बढिया....

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  11. आपकी पोस्ट में बाकि जो कमी रह गयी थी..... टिप के रूप में चेतन्य जी ने पूरी कर दी ...


    @सम्वेदना के स्वर ने कहा…

    इस देश में 25 वर्ष से कम आयु के लोग अब 50% होने को हैं। और यह 40 साल का नौजवान अभी देश को ही समझ रहा है, इतनी उम्र क्या दूध पीने में लगा दी इन्होनें

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  12. ये ड्रामे वाज चार्टर प्लेन का उपयोग किस हैसियत से करता है ..कोई इससे यह पूछे...? दूसरी बात इस चार्टर प्लेन का खर्चा इस देश के इमानदार लोगों के खून चूसकर,नकली सामान,कालाबाजारी का लाइसेंस,भ्रष्टाचार के जरिये सरकारी खजाने के बन्दर बाँट से पार्टी फंड में आये चंदे से पूरा होता है ...और बेशर्मी की हद यह की SPG की सुरक्षा के तहत रेल यात्रा और नाम देश और समाज को देखने का ...अरे राहुल बाबा जरा बिना SPG की सुरक्षा के यात्रा करके देखों कुत्ते की तरह नोच खायेंगे वो लोग जिन लोगों को तुम्हारे कांग्रेस पार्टी के भ्रष्टाचार और कुव्यवस्था की वजह से अपने इंसान होने पर भी अब शर्म महसूस हो रहा है ..हराम के पैसों से तो कोई भी राहुल गाँधी की तरह सांसद बन सकता है और चार्टर प्लेन का उपयोग कर सकता है जरा ईमानदारी से एक साल अपने पार्टी को चलाकर देखो तब पता चलेगा असल समाज और देश सेवा क्या होता है और अगर ऐसा कर लिये तो SPG की सुरक्षा की जरूरत ही नहीं परेगी ...?

    सिर्फ गाँधी का नाम जबरदस्ती चेंप लेने और रेल में यात्रा करने से गाँधी की तरह सम्मान नहीं पाओगे ..तुम्हारे ऊपर जो ये देश का पैसा खर्च होता है उसे सबसे पहले रोको ..अपनी मां को भ्रष्टाचारियों के खिलाप सख्त कार्यवाही के लिए प्रेरित करो..उसे समझाओ की UPA अध्यक्ष के पद से ज्यादा बड़ा है इंसानियत,देश और समाज के लिए अपने आप को मिटटी में मिला लेना ...अगर तुम इतना ही कर दो तो ये देश तुम्हारा एहसान कभी नहीं भूलेगा ...

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  13. राहुल बाबा गरीब की रोटी छीन कर ही तुम ऎश कर रहे हो, ओर गरीब भटक रहा हे

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  14. भारत-दर्शन देश को समझने के लिये आवश्यक है। राहुलजी जितना समझ सकें, देश के लिये लाभप्रद होगा।

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  15. vipaksh kamjor hota hai to, satta wale maje lete hai.

    Hum chahe kitna bhi unke baare mei bura bhala likh le, dum to unmei hai aur shayad anushashan bhi unki party mei jyada hai.

    Baki partiyo mei to kheechtaan hai.

    Jab tak vipaksh mei dum nahi hoga tab tak inhe satta mei rehne se koi nahi rok sakta.

    Ye to aap bhul jaiye kee aam aadmi jaisi feeling politics mei aa jaye. AAM AADMI kee FEELINGS kisi bhi party mei nahi hai.

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आप बताये क्या मैने ठीक लिखा