गुरुवार, अप्रैल 16, 2009

शपथ पत्र दो - पेरोल लो . सुप्रीम कोर्ट की jay हो

वरुण मामले मे सुप्रीम कोर्ट ने एक नई मिसाल कायम कर दी है शायद , एक शपथ पत्र देने से ही रासुका जैसे कानून से तुंरत मुक्ति मिल जाया करेगी । कश्मीर के आतंकवादी हो या नक्सलवादी अब अच्छे चाल चलन का आश्वाशन देकर पेरोल पर छूट जायेंगे ।

यह फैसला ज्यादा विचलित कर देने वाला है यदि वरुण को गलत बंद किया था तो सुप्रीम कोर्ट को उसे रासुका से मुक्त कर देना चाहिए था । यह कदम एक नजीर तो बन ही जाएगा । ऐसे कई लोग अब सुप्रीम कोर्ट पहुचेंगे ।

और आखरी बात ज़मानत अभी हुई वरुण की और अखवार मे सुबह ही छप गया वरुण आज छूट जायेंगे और उनका जगह जगह स्वागत होगा . पूरा मिनिट २ मिनिट karykrm भी बन चुका hae । कह सकते hae jay हो

11 टिप्‍पणियां:

  1. सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के गंभीर आयाम की ओर आपने उचित ध्यान खींचा है ।

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  2. धीरू भाई ये शुरूआत आज से नहीं हमेशा से है लेकिन संसद और सर्वोच्च न्यायालय में माफ़िया राज होने की बात कहने का किसी में साहस है क्या? पकड़ कर सीधे अंदर डाल कर सारी चर्बी उतार दी जाती है अंग्रेजी राज की तर्ज पर इस लिये चुप रहने में ही भलाई है। आप यकीन मानिये कुछ न होगा वरूण गांधी चुनाव लड़ेगा,अजमल कसाब दामाद बन कर देश की छाती पर १७६ लोगों का खून बहा कर भी मूंग दलेगा और देश ऐसे ही घुटनों के बल घिसटता रहेगा..

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  3. वरुण के ऊपर रासुका गलत ही थी
    राज ठाकरे जैसे लोग कांग्रेस की शह पर जो मन में आया कहते रहे और उनके ऊपर कांग्रेस की सरकार रासुका तो दूर मामूली झारखंड सरकार का वारंट भी तामील नहीं कराया गया,

    एक एसी सीडी की बिना पर जिसे किसने शूट किया उसका अता पता नहीं है, जिसमें विवादित शब्द जब कहे जाते हैं तब वरुण का क्लोजअप तक नहीं है, जिसे घटना के काफी दिनों बाद पेश किया जाता है

    साफ पता चलता है कि घपलेबाजी है और जो घपलेबाजी नहीं मानते वह पूर्वाग्रहों के मरीज हैं

    और कैसा एफिडेविट दिया वरुण ने ?
    अदालत जैसा एफिडेबिट चाहती थी, वरुण ने वैसा नहीं लिखा, यूपी सरकर की ओर से हरीश साल्वे अदालत में जो कुछ बोल रहे थे उस पर खुद अदालत ने आपत्ति की, मायवती चाहती थी कि वरुण अन्दर रहें इससे मायावती को फायदा था और कांग्रेस को नुकसान

    फिर भी वरुण को पेरोल पर रिहा क्यों हो गये?

    इससे कांग्रेस का कम नुकसान हुआ, वरुण ने जिस तरह का एफिडेबिट दिया वह कांग्रेस को और अधिक परेशान करने वाला था

    क्या न्यायव्यवस्था पर सरकारी दबाब होता है?
    मैं आरोप नहीं लगा रहा हूं, सिर्फ पूछ रहा हूं

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  4. सच कह रहे हैं आप...और यहाँ तो फिर चलन ही बन जाता है सब कुछ का और जैसा कि आप कह रहे हैं कल को ये तमाम आतंकवादी अपने अच्छे चाल-चलन को पेश कर.....ओहोहो

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आप बताये क्या मैने ठीक लिखा