शुक्रवार, अप्रैल 10, 2009

क्या सज्जन कुमार और जगदीश टाइटलर का टिकट काट कर कांग्रेस हजारो सिखों की हत्या के आरोप से बरी हो गई ?

क्या सज्जन कुमार और जगदीश टाइटलर का टिकट काट कर कांग्रेस हजारो सिखों की हत्या के आरोप से बरी हो गई ?

क्या यही दोनों दोषी थे पूरे भारत मे सिखों के कत्ले आम के ?

क्या वह दोषी नही जिनका ब्यान था कि जब बड़ा पेड़ जब गिरता है तो धरती हिलती है ?

सन ८४ के बाद अचानक बोतल मे से निकला यह जिन्न इलेक्शन बाद फिर वापिस बोतल मे बंद कर दिया जायेगा । और हम लोग फ़िर अपनी रोज़ी रोटी कि चिंता मे सब भूल जायेंगे । कृपया उन परिवारों के घाव और न कुरेदिए जो अपना सब कुछ खो चुके है उन दंगो मे ।

वैसे एक जूते कि दरकार हम आम आदमियों को भी शायद अब जूता ही हमारी बुद्धि को दुरुस्त कर सके क्योकि हम वोट देने से पहले तो बहुत सोचते है लेकिन वोट देते समय हमारी सोच धर्म ,जाति,सम्प्रदाय से ऊपर नही हो पाती ।

12 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सही लिखा है आपने। सबसे बड़ा दोषी राजीव गंधी था लेकिन म‍ीडिया का यह परिवार तो लाडला परिवार है तभी तो कागज बांच-बांचकर ही सोनिया नेता बन गयी है। यदि इसकी जगह और कोई होता तो यही मीडिया उसकी इतना मजाक उड़ाता कि वह बेचारा अपनी चौकड़ी ही भूल जाता।

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  2. क्य जूत फेन्कने वाले ने कभी उन लोगों के खिलाफ एक भि लफ्ज़ बोला है जिन्होंने बसों से निकाल निकाल कर निर्दोश लोगों को मारा जो आज प्रदर्शन कर रहे हैं वो तब कहां थे जब पंजाब मे हिन्दुयों को मारा जा रहा था? ये सब सियासत के खेल हैं जो चुनाव से पहले खेले जाते हैं ज बेशक टाटलर और सज्जन कुमार दोशी हैं तो उन्हे फाँसी पर लटका देना चाहिये था कांग्रेस ही तो नही रही इतने साल सत्ता मे दुख तब होत है जब लोग केवल अपनी जात बिरादरी को ले कर ही हल्ला गुल्ला करते है जब अपना कोई अन्याय करता है तो उसे सम्मानित किया जाता हैआज की जूता राज्नीति का ये एक रूप है

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  3. दरअसल राहुल, सोनिया, मनमोहन इत्यादि को डर था कि कहीं उन्हें भी जूते का पुरस्कार न मिल जाये। इसीलिये जरनैली-जनता के डर के मारे उन्होंने इन दोनों का टिकट काट डाला!

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  4. आतंकवादी/अतिवादी - चाहे वे किसी धर्म-सम्प्रदाय-विचार के हों - उनपर कोई जूता फैंक कर देखे।

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  5. कांग्रेस जब तक यह वादा न करे कि भविष्य में सीबीआई या किसी अन्य सरकारी संस्था का दुरुपयोग नहीं करेगी तब तक यह जूतेबाजी जारी रखना ठीक रहेगा। यह एक प्रजातांत्रिक आन्दोलन है। यह कलम से की गयी हत्या के विरुद्ध आन्दोलन है। यह जनता को मूर्ख बनाने की नीति के विरुद्ध आन्दोलन है।

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  6. बिल्कुल सही लिखा है। दंड तो सभी दोषीयों को मिलना चाहिए।वर्ना कांग्रेस द्वारा की गई यह कार्यवाही भी मात्र एक चुनावी स्टंट मात्र ही माना जाएगा।

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  7. जू्ता एक अत्यन्त सटीक हथियार साबित हो रहा है, अनुनाद जी से सहमत हूँ कि यह जूतेबाजी जारी रहे (आज ही नवीन जिन्दल पर भी फ़ेंका गया)… ज्यादातर पत्रकार /चैनल कांग्रेस के चमचे हैं और बाकी पत्रकारों की कलम में तो वो धार बची नहीं, सो जूता ही सही… लगे रहो…
    सादर प्रस्तुति - एक जूता समर्थक

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  8. बरी ? ये तो वोट गंवाने से बचने की जुगत है.

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  9. टिकट देना गलत है....ऐसे लोगों का जीतना भी गलत है.............जूता पुराण भी गलत है ...............सही सोच के साथ सही काम हो , यही आज की मांग है

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  10. ये सब तो मामले को ठंडा करने के लिए ठंडे छींटे मारने जैसा है |

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आप बताये क्या मैने ठीक लिखा