बुधवार, नवंबर 17, 2010

अफ़सोस बेहद अफ़सोस कुछ लाख करोड़ रुपल्ली के लिए एक नेता से इस्तीफा ले लिया

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अफ़सोस बेहद अफ़सोस कुछ  लाख करोड़ रुपल्ली के लिए एक  नेता से इस्तीफा ले लिया गया . क्या होता अगर वह करोडो रूपए मिल भी जाते सरकार को . उससे से क्या कोई भ्रष्ट्राचार  ख़तम हो जाता या कोई कमी आ जाती .देश की जनता को गुमराह कर रहा विपक्ष सरकार को काम नहीं करने दे रहा है . अगर एक करोड़ सत्तासी लाख रुपए 2 जी स्पेक्ट्रम से मिल ही जाते तो सबसे ज्यादा जनता का ही होता . जो आज इतने सस्ते में बात हो रही मोबाइल से वह क्या हो पाती ? कभी नहीं . बिलकुल नहीं ........... विपक्ष नहीं चाहता कि आम जनता सस्ते में बात करे अपनों से और दुःख दर्द दूर करे . 

रुपए पैसे के मामले में सब एक हो जाते है संसद में . जो एक दूसरे को गाली देते है वह भी . मांग है जेपीसी की . क्या होगा जांच होके और क्या हो गया आज तक रिपोर्ट आकर . जितना समय ,पैसा ,कागज़ इन रिपोर्टो को बनाने में खर्च होता है उससे कई लाख बच्चो की कापी किताब आ सकती है . 

लेकिन संसद में विपक्ष कभी इकठ्ठा होकर कश्मीर में हो रहे आतंकवाद के खिलाफ आवाज़ नहीं उठाता . कभी नक्सलवाद के प्रश्न पर एक नहीं होता . भूख और महंगाई पर कमेटी नहीं बनाता . क्यों ................ शायद इसमे वोट पर फर्क नहीं पड़ता और नोट ना ही मिलता .

और भारत का सत्ता पक्ष उसे तो ब्रह्मा से वरदान मिला है शायद ........ कुछ भी करो  तुम्हारे विरोधी कभी तुम्हे घेर नही पायेंगे और तुम अजेय रहोगे .

और ब्रह्मा के वरदान को सही साबित करने के लिए जनता जनार्दन हमेशा (एक दो बार अपवाद स्वरूप ) वचन निभा रही है 

15 टिप्‍पणियां:

  1. इस इस्तीफे से कई होनहार हतोत्साहित होगें. अफसोस है.

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  2. jnaab hm bhi aapke is afsos men shaamil he achcha andaaz he mubark ho. akhtar khan akela kota rajsthan

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  3. जेपीसी की मांग सहारे विपक्षी भी तो अपना हिस्सा पाएंगे !!

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  4. भारत का सत्ता पक्ष उसे तो ब्रह्मा से वरदान मिला है शायद ........ कुछ भी करो तुम्हारे विरोधी कभी तुम्हे घेर नही पायेंगे और तुम अजेय रहोगे .
    bahut sunder kataksh.

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  5. हां जी, ई तो जुलुम भया... अरे राजा भी जनता की तरह कानून के ताबे आता है क्या !!!!!!!! :)

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  6. घोर नाईंसाफ़ी हुई है जी, हमारी सहानुभूति नेताजी के साथ है। सिद्धांतों पर चलने की कीमत चुकानी पड़ी बेचारों को।

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  7. ध्यान रहे कि घोटालेबाज कम्पनियों और राजा बाबू से पैसा वापस लेने की बात कोई नहीं कर रहा है…

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  8. ..भारत का सत्ता पक्ष, उसे तो ब्रह्मा से वरदान मिला है कुछ भी करो तुम्हारे विरोधी कभी तुम्हे घेर नही पायेंगे और तुम अजेय रहोगे .
    और ब्रह्मा के वरदान को सही साबित करने के लिए जनता जनार्दन हमेशा (एक दो बार अपवाद स्वरूप ) वचन निभा रही है
    purnt: sahmat hun aapse,Janta ka saath hai, tabhi to kendr main "haath" hai ......
    regard>
    P.S.Bhakuni
    Buransh (Ek Prateek)

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  9. हमारी सहानुभूति नेताजी के साथ है ....

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  10. मुझे बड़ा दुख हो रहा है.. काश कि राजा की तरह मैं भी आपकी सहानुभूति का पात्र बन सका होता..

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  11. व्यंग्य का सहारा लेकर अपनी बात रखना भी एक कला है , सुंदर रचना बधाई

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  12. Lajawaab vyang hai Dhiru ji ...
    jai ho raaja saham ki ... koi mudda to haath mein diya netaaon ko ...

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आप बताये क्या मैने ठीक लिखा