गुरुवार, मार्च 10, 2011

चोरी लेकिन सीना जोरी से

आज पहली बार अपने नए प्रतिष्ठान से यह पोस्ट लिख रहा हूँ . पहले एक चर्चा छिड़ी थी कार्यस्थल से ब्लोगिंग क्या जायज है . यह सच है अगर मेरा स्टाफ यह करेगा तो मै परमीशन नहीं दूंगा . यहाँ तक की टीवी भी देखने की भी मनाही है स्टाफ को .खैर हेड होने का यह तो फ़ायदा है ही कोई आपको टोक नहीं सकता . आप सर है और आपके अंडर में आने वाले लोग आपको कुछ नहीं कह सकते क्योकि यह परम्परा है . 

दिन के चौबीस  घंटे कुछ कम पड़ने लगे है . बिलकुल घड़ी की सुइया हमें चला रही है . सब कुछ एक सा सब दिन एक सा . खैर ओखली में सर दिया तो मूसलो से क्या डरना .

तो कुछ दिनों तक यही चोरी चकोरी चलेगी . तब तक क्षमा सहित उनसे जो अपने ऑफिस से ब्लॉग नहीं लिख सकते .




11 टिप्‍पणियां:

  1. धीरु भाई, सबसे पहले तो नए संस्थान के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं।
    हां!ब्लॉगिंग के लिए चोरी न सही पर,थोड़ी हेराफ़ेरी तो करनी ही पड़ेगी:)

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  2. धीरु भाई,
    आपको और आपके पूरे परिवार को इस मौके पर हार्दिक बधाई।
    रही बात कार्य स्थल से ब्लागिंग की। खुद को छूट इसलिए दी जा सकती है क्योंकि सच में जो खाली समय होगा उसका सदुपयोग होगा, काम का नुक्सान न हो यह बात सदा दिमाग में रहेगी। दूसरे पक्ष को इसी बिना पर छुट नहीं दी जा सकती।

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  3. तन्त्र जब एक बार स्थापित हो जायेंगे, समय मिलने लगेगा।

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  4. संस्थान खुलने पर बधाई.. खूब प्रगति हो..
    लेकिन चोरी और सीनाजोरी.ये तो ठीक नहीं है... ;)

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  5. पहले आफिस का काम निबटा लीजिए, फिर जो चाहे सो कीजिए, कौन रोकता है :)

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  6. खाली समय का सदुपयोग करने मेंकोई बुराई नही है ...
    फिर दिमाग़ भी तो फ्रेश हो जाता है ब्लॉगिंग से ... हार्दिक शुभकामनायें ....

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  7. बिलकुल ठीक, मैं भी आपके साथ हूँ ! शुभकामनायें !

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आप बताये क्या मैने ठीक लिखा