सोमवार, मई 02, 2011

ओसामा को जन्नत .............खुदा खैर करे

धोखा धोखा धोखा अपनो से धोखा ......... यह तो पाकिस्तान की नापाक आदत है . बेचारे ओसामा को जंगल और पहाडो से धोखे से मारने के लिए गद्दारों ने एबटाबाद में रिहायश देकर खुद ही मरवा दिया . कितनी नाइंसाफी है यह तो गद्दारी है इनका हिसाब तो क़यामत के दिन होगा . 

आज तो मुहर्रम सा लग रहा है . एक बार फिर से अपनो ने अपने को मरवा दिया . खुदा भी मुआफ नहीं करेगा इन्हें ..... अब जेहाद अपनो के खिलाफ करना पडेगा . अगर अपने ही धोखा नहीं देते तो यह कौम के गुनाहगार बाल भी बांका ना कर पाते . और अफ़सोस सबसे बड़ा यह भी अमरीका का राष्ट्रपति जो अपना ही था पहले अपने इलेक्शन जीतने के चक्कर में ओसामा  को शहीद कर दिया . खुदा इन्हें कभी मुआफ नहीं करेगा .

यही कुछ लिखना चाहता है बीबीसी शायद  इतनी शालीनता से ओसामा की मौत की खबर दी है उसने कमाल है .

13 टिप्‍पणियां:

  1. क्या कहा जाये, तुरत दफना भी दिया, न कोई बयान, न कोई गिला, न शिकवा, न पक्षियों का चिल्लाना और न विपक्षियों की दहाड़. न कोई इन्क्वायरी, न मुकदमा! हद है नाइन्साफी की. बिल्कुल सनी देयोल वाला मामला, तुरन्त निपटान.
    अरे थोड़ी जांच-पड़ताल हो जाती, कुछ बयान आ जाते, एक-आध जांच समिति और आयोग का गठन हो जाता...
    कैसे हैं ये नाशुक्रे...

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  2. जल्दी से समुंदर मे फ़ेंक दिया, अगर लाश तेर कर पाकिस्तान पहुच गई तो?सण्णू की जी

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  3. जरा जल्दी ही दफन कर दिया...

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  4. .
    गद्दारी तो इस कौम की रगों में है ...
    मेरा मन कर रहा है, इनसे छिपाने और गद्दारी दोनों की ही सफाई माँगी जाये ।

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  5. बीबीसी (हिन्दी/उर्दू टीम) वालों का तो आदरणीय दिखता था।
    जहाँ तक ओसामा के दोज़खनशीन होने की बात है, देर-सबेर ये तो होना ही था। मौकपरस्त बकरों की मौकापरस्त माँ खैर मनाती भी तो कब तक। बहुत से बहुत ये होता कि पाकिस्तान उसकी जान की कीमत थोडी और बढा देता मगर बात फिर भी वहीं अटकती - बिक गया जो वो खरीदार नहीं हो सकता ....
    एक ताज़ा ताज़ा खस्ता शेर मुलाहिज़ा फरमाइये:
    पाकिस्तान तुम्हारी केवल यही कहानी
    अमरीका गरियाय याद आ जाये नानी

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  6. "इलेक्शन जीतने के चक्कर में ओबामा को शहीद कर दिया"

    मैं व्यंग्य समझ नहीं पाया... या टाइपो है?

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  7. @रंजन भाई गलती से ओबामा लिख दिया ओसामा की जगह . समानता है ही इतनी . वैसे दोनो का पेशा भी एक ही है दुनिया मे आंतक फ़ैलाना

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  8. बहुत जल्दी से समुंदर मे फ़ेंक दिया|

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  9. बेचारा पाकिस्तान क्या करता! उसकी तो अरबों की आमदनी मार खा गई:)

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  10. बी बी सी वाले पढ़े लिखे सभ्य लोग हैं, कुछ ज्यादा ही ।

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  11. ग़लत है ... पाकिस्तानियों पे अब कोई विश्वास नही करेगा ... उनसे अच्छे तो हमारे दिग्विजय जी हैं ...

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आप बताये क्या मैने ठीक लिखा